बीएड का परीक्षा फॉर्म भरने का आज है अंतिम अवसर

मुजफ्फरपुर : बीआरए बिहार विश्वविद्यालय में बीएड (सत्र 2015-17) सेकेंड इयर का परीक्षा फॉर्म भरने का सोमवार को अंतिम मौका है, जबकि अभी भी दर्जन भर कॉलेजों के सैकड़ों छात्र फॉर्म नहीं भर सके हैं. विवि व एनसीटीइ के बीच ये छात्र फंसे हुए हैं. अधिक फीस के लिए दबाव बनाते हुए निजी बीएड कॉलेजों […]

By Prabhat Khabar Digital Desk | April 16, 2018 6:36 AM

मुजफ्फरपुर : बीआरए बिहार विश्वविद्यालय में बीएड (सत्र 2015-17) सेकेंड इयर का परीक्षा फॉर्म भरने का सोमवार को अंतिम मौका है, जबकि अभी भी दर्जन भर कॉलेजों के सैकड़ों छात्र फॉर्म नहीं भर सके हैं. विवि व एनसीटीइ के बीच ये छात्र फंसे हुए हैं. अधिक फीस के लिए दबाव बनाते हुए निजी बीएड कॉलेजों ने उन्हें फॉर्म भरने से रोक दिया है. छात्रों ने बार-बार कुलपति सहित प्रशासनिक अधिकारियों के यहां गुहार लगायी, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हो सका है.

परीक्षा फॉर्म भरने के लिये विवि ने चौथी बार समय बढ़ाते हुए 16 अप्रैल तक मौका दिया है. दरअसल, पहली बार 21 मार्च तक समय दिया गया था. इस बीच कॉलेजों में अधिक फीस वसूली को लेकर दबाव बनाया जाने लगा, तो छात्रों ने इसका विरोध किया. हालांकि, इसके बाद विवि ने 31 मार्च तक फॉर्म भरने का समय दिया, लेकिन फीस विवाद का समाधान नहीं निकल सका. तीसरी बार 10 अप्रैल तक समय दिया गया. अब चौथी बार 16 अप्रैल तक का समय दिया गया है. अभी भी वहीं स्थिति है, जो तीन हफ्ते पहले थी. बीएड छात्रों का कहना है कि सोमवार को विवि पहुंचकर फॉर्म भरवाने का अनुरोध करेंगे.

35 हजार रुपये के लिए डाला जा रहा दबाव

निजी बीएड कॉलेज छात्रों पर 35 हजार रुपये अतिरिक्त फीस के लिये दबाव बना रहे हैं. सरकार ने एक लाख रुपये निर्धारित किया है, जबकि कॉलेज 1.35 लाख रुपये मांग रहे हैं. विवि के अधिकारियों का कहना है कि मात्र एक दर्जन कॉलेजों से ही अधिक फीस वसूली की शिकायत मिल रही है. इसको लेकर छात्रों ने काफी हंगामा भी किया.

विश्वविद्यालय के पत्र का नहीं आया जवाब : अधिक फीस वसूली के लिए छात्रों को परीक्षा फॉर्म भरने से रोकने वाले बीएड कॉलेजों के खिलाफ कार्रवाई के लिये बीआरएबीयू के कुलपति डॉ अमरेंद्र नारायण यादव ने एनसीटीइ को पत्र भेजा है. हालांकि, 10 दिन बाद भी एनसीटीइ से कोई जवाब नहीं आया है. विवि को जवाब का इंतजार है. वहीं, दोनों के बीच में छात्र परेशान हो रहे हैं.