मुजफ्फरपुर : सीबीआई जांच पर चुप्पी क्यों : तेजस्वी

बालिका गृह में यौनशोषण कांड की जांच को पहुंचे विपक्ष के नेता मुजफ्फरपुर : बालिका गृह में बच्चियों के साथ कथित यौनशोषण की जांच के लिए बुधवार को नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के नेतृत्व में आयी विपक्षी नेताओं की टीम ने राज्य सरकार पर जमकर हमला बोला. तेजस्वी ने कहा, ‘राज्य सरकार इस मामले की […]

By Prabhat Khabar Digital Desk |
बालिका गृह में यौनशोषण कांड की जांच को पहुंचे विपक्ष के नेता
मुजफ्फरपुर : बालिका गृह में बच्चियों के साथ कथित यौनशोषण की जांच के लिए बुधवार को नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के नेतृत्व में आयी विपक्षी नेताओं की टीम ने राज्य सरकार पर जमकर हमला बोला. तेजस्वी ने कहा, ‘राज्य सरकार इस मामले की सीबीआई जांच से क्यों घबरा रही है.
कहीं सरकार में शामिल लोगों को बचाने की साजिश तो नहीं है. मुख्यमंत्री चुप क्यों हैं.’ विपक्षी दलों ने इस मामले की जांच हाईकोर्ट की निगरानी में सीबीआई से कराने की मांग की है. इसके पहले तेजस्वी यादव के नेतृत्व में विपक्षी दलों के नेता दोपहर करीब दो बजे यहां पहुंचे.
उनमें कांग्रेस के सदानंद सिंह, राजद के अब्दुल बारी सिद्दीकी, पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी, भाकपा माले के महबूब आलम आदि थे. तेजस्वी सबसे पहले साहू रोड स्थित बालिका गृह पहुंचे. वहां पर मजिस्ट्रेट शीला रानी गुप्ता से पूरे मामले की जानकारी लेने के बाद उस स्थल को देखा, जहां पर शव की तलाश में खुदाई की गयी थी.
भारी भीड़ की वजह से विपक्षी नेता थोड़ी देर ही यहां रुके. बाद में सर्किट हाउस में आयोजित प्रेस वार्ता में तेजस्वी ने कहा कि केंद्र सरकार जब सीबीआई जांच के लिए तैयार है, तो राज्य सरकार इससे क्यों बचना चाह रही है.
कहीं इस घटना में शामिल लोगों को बचाने की साजिश तो नहीं है. उन्होंने कहा कि मुख्य आरोपित ब्रजेश ठाकुर का सत्ताधारी दलों के बड़े नेताओं से कनेक्शन की बात सामने आयी है. सरकार द्वारा तय मानक का उल्लंघन कर बालिका गृह के संचालन का जिम्मा एनजीओ को दिया गया.
लॉ एंड आॅर्डर से मतलब नहीं : मांझी
पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने यहां कहा कि मुख्यमंत्री को प्रदेश के लाॅ एंड ऑर्डर से मतलब नहीं है. वे केवल अपना नाम चमकाने में लगे हैं. यौनशोषण मामले की जांच को पहुंचे मांझी ने आरोप लगाया कि घटना के मुख्य आरोपित को सत्ताधारी दल का संरक्षण प्राप्त है और इसी वजह से सरकार मामले को दबाने में लगी है.
यदि पूरे मामले की सीबीआई जांच हो जाये, तो सबकुछ साफ हो जायेगा. बिहार सरकार खुद सीबीआई जांच की पहल करे, अन्यथा हम हाईकोर्ट के पर्यवेक्षण में जांच की मांग करेंगे. पूरी घटना में सरकार और सिस्टम की मिलीभगत है. ऐसा नहीं होता, तो जांच रिपोर्ट आने के एक महीने बाद मुकदमा दर्ज नहीं कराया जाता.
बीच के समय में साक्ष्य मिटाने का काम किया गया है. पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि केवल मुजफ्फरपुर की घटना नहीं है, बल्कि सूबे के अन्य जिलों में भी हाल में बड़ी घटनाएं हुई है.
उनका पूरा ध्यान केवल शराब पीने वालों को पकड़ने पर है. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि बालिका गृह कैंपस में खुदाई के दौरान पीड़िता दूसरी जगह दिखाना चाहती थी, लेकिन उससे जबरदस्ती जगह चिह्नित कराकर खुदाई की गयी. पूर्व मुख्यमंत्री ने सरकार से मांग की कि टीस ने जिन केंद्रों की रिपोर्ट दी है, उसकी तत्काल जांच करायी जाए.
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