26.4 C
Ranchi

BREAKING NEWS

Advertisement

लेटेस्ट वीडियो

Big Boss : बिग बॉस सीजन-12 में ट्राफी हारकर भी दिल जीत लिया दीपक ने

Advertisement

मुजफ्फरपुर : बिग बाॅस सीजन-12 में सेकेंड रनर-अप दीपक ठाकुर के परिजन और फैंस अंतिम राउंड में उसके निर्णय से थोड़े आहत जरूर हुए, लेकिन उसके प्रदर्शन से काफी खुश है. शनिवार की देर रात ग्रैंड फिनाले में दीपक ने जब बजर दबाकर खुद को खेल से अलग किया, तो कुछ देर के लिये सबको […]

Audio Book

ऑडियो सुनें

Advertisement
मुजफ्फरपुर : बिग बाॅस सीजन-12 में सेकेंड रनर-अप दीपक ठाकुर के परिजन और फैंस अंतिम राउंड में उसके निर्णय से थोड़े आहत जरूर हुए, लेकिन उसके प्रदर्शन से काफी खुश है. शनिवार की देर रात ग्रैंड फिनाले में दीपक ने जब बजर दबाकर खुद को खेल से अलग किया, तो कुछ देर के लिये सबको हैरानी हुई. फिर भी सबने उसके निर्णय को सराहा. कहा कि ट्रॉफी लेते हुए देखने की तमन्ना थी, जो पूरी नहीं हुई. फिर भी उसने सबका दिल जीत लिया है.
शहर में दीपक के पड़ोसी और फैन शुभम फाइनल राउंड से दीपक के बाहर होने के बाद भी दोस्तों के साथ आतिशबाजी में जुट गया. कहा कि विनर बनने की उम्मीद थी. लेकिन अभी जो स्थिति है, उसमें पैसा ज्यादा इंपॉर्टेंस रखता है.
शहर के दामूचक स्थित किराये के घर पर ग्रैंड फिनाले देखने पहुंची दीपक की मौसी गीता कुमारी का कहना था कि उम्मीद थी कि दीपक जीत जायेगा, लेकिन उसका फैसला अच्छा रहा. फेमिली की बैकग्राउंड के लिहाज से अभी उसके लिये पैसा ही ज्यादा जरूरी है.
छोटी मौसी ममता ठाकुर ने कहा कि वोटिंग कम होने के कारण वैसे भी दीपक को बाहर हो जाना था. उसने पहले ही निर्णय का अंदाजा लगाकर खुद ही बाहर निकलने का फैसला लिया. पुरस्कार की राशि से 2019 में उसकी बहन की शादी धूमधाम से हो सकेगी.
दीपक के मौसा नंद किशोर ठाकुर ने कहा कि अच्छा खेला, जो निर्णय लिया वह भी सराहनीय रहा. फैंस की चाहत थी कि दीपक विनर बने. उन्हें निराशा हुई है. लेकिन दीपक की ओर से हम उनसे माफी मांगते हैं. निराश न हों. आगे और भी सफर है.
बहन दीपिका की आंखों में आये आंसू
मुजफ्फरपुर . दीपक ठाकुर के किराये के घर दामुचक में मुहल्ले के लोगों की भीड़ जुटी थी. घर में बहन दीपिका, ज्योति व चाची सहित दीपक के दोस्तों की भीड़ लगी थी. होस्ट सलमान खान की हर बात पर सबकी धड़कन बढ़ रही थी. दीपक जब फाइनल में तीन प्रतिभागियों में शामिल हुआ तो लोगों के चेहरे पर खुशी के भाव थे.
शो के अंतिम चरण में जब दीपक ने 20 लाख के लिए घंटी बजायी तो कुछ देर के लिए सन्नाटा छा गया. परिवार सहित दीपक के दोस्त मायूस हो गये. दीपक ने जब यह कहा कि उसने घर के हालात को देख रुपयों से भरे ब्रीफकेश लेने का निर्णय लिया था तो बहन दीपिका की आंखों में आंसू थे.
उसे भाई के विनर नहीं बनने पर दुख तो था, लेकिन घर के लिये बड़े भाई के लिये इतना सोचा, इस बात की खुशी थी. दीपक की जीत पर घर में पहले पटाखे खरीद कर रखे गये थे. दीपक के शो से निकलने के बाद परिवार व आसपास के लेागों ने इसे जीत के रूप में देखा व दीपक की इस सोच पर खुशी जाहिर करते हुए पटाखे भी फोड़े.
गाने के लिए मंच के नीचे खड़ा रहता था दीपक
मुजफ्फरपुर. बोचहां के आथर गांव में साधारण किसान परिवार में जन्म लेने वाले दीपक के पास रहने के लिए गांव में सिर्फ दो कमरे का छोटा सा मकान है, जिस पर प्लास्टर भी नहीं है. दीपक का जन्म 24 मार्च, 1994 को इसी गांव में हुआ था. दीपक से छोटी दो बहनें दीपिका व ज्योति हैं.
तीनों बच्चे जब कुछ बड़े हुए तो इनकी पढ़ाई के लिए पिता पंकज ठाकुर ने शहर के लेनिन चौक के समीप एक किराये का मकान लिया. फिर तीनों भाई-बहनों की पढ़ाई शुरू हुई.
दीपक जब आठ वर्ष का था तो उसने अपने पिता पंकज ठाकुर को संगीत सीखने की बात कही. पिता के पास पैसे नहीं थे, लेकिन उन्होंने संगीत गुरु के बारे में पता किया. चक्कर चौक स्थित रसूलपुर जिलानी में संगीत के शिक्षक डॉ संजय कुमार संजू ने उन्हें दीपक को भेजने को कहा. दीपक की कठोर मेहनत से वे काफी प्रसन्न हुए.
दीपक ने खुद स्वीकार किया था कि एक बार एक जागरण के मंच पर उसने संचालक से एक भजन गाने देने का अनुरोध किया, इंतजार में वह एक घंटे तक मंच के नीचे खड़ा रहा.
आखिरकार उसे एक भजन गाने का मौका मिला. धीरे-धीरे माता के जागरण व लोक संगीत के कार्यक्रम से दीपक को कुछ रुपये मिलने लगे, लेकिन उसने डॉ संजय कुमार संजू से संगीत सीखना जारी रखा. साथ ही ग्रेजुएशन की पढ़ाई भी पूरी की.
स्नेहा खानवलकर ने की थी आवाज रिकॉर्ड वर्ष 2012 में अनुराग कश्यप गैंग्स ऑफ वासेपुर फिल्म बना रहे थे. फिल्म के गाने में नये तरह का स्वर देने के लिए म्यूजिक डायरेक्टर स्नेहा खानवलकर रिसर्च कर रही थी. इस दौरान वे देश के कई राज्यों में जाकर गायकों की आवाज रिकॉर्ड की. इस दौरान वे शहर स्थित संगीतज्ञ डॉ यशवंत पराशर के घर पहुंची.
श्री पराशर ने दीपक ठाकुर को स्नेहा खानवलकर से मिलवाया. वे दीपक की आवाज रिकॉर्ड कर ले गयीं. इसके एक वर्ष बाद अनुराग कश्यप ने दीपक को फोन कर गैंग्स ऑफ वासेपुर में एक गीत गाने का मौका दिया. इसके बाद जब गैंग्स ऑफ वासेपुर 2 बनी तो उसमें भी दीपक को एक गाना गाने का मौका दिया गया. फिल्म मुक्केबाज में भी एक गीत दीपक को दिया.
बहन के इलाज के लिए नहीं मिले पैसे
दीपक ने तीन फिल्मों में गाना तो गाया, लेकिन उसकी आर्थिक स्थिति वैसी ही रही. इसी वर्ष शहर में संगीत का एक कार्यक्रम होना था. आयोजकों ने उसमें गाने के लिए दीपक को भी ऑफर दिया था.
दुर्भाग्यवश 28 जून को दीपक की छोटी बहन घर में खाने बनाते हुए कूकर ब्लास्ट करने से बुरी तरह जल गयीं. इलाज के लिए पिता पंकज ठाकुर के पास रुपये नहीं थे.
दीपक ने आयोजकों को पूरी बात बताते हुये कुछ रुपये बतौर एडवांस की मांग की, लेकिन दीपक को पैसे नहीं मिले. इस घटना के बाद कुछ दिनों तक दीपक टूट गया था. पिता कहते थे कि कहीं जॉब करो, ऐसे कब तक चलेगा.
पिता ने कर्ज लेकर दिये थे तीन हजार रुपये
अभाव व संघर्ष के बाद भी दीपक ने हिम्मत नहीं हारी. उसे पूरा विश्वास था कि संगीत की बदौलत वह एक दिन अपनी प्रतिभा सिद्ध करेगा. उसने बिग बॉस में दावेदरी के लिए ऑन लाइन इंटरव्यू में आवेदन दिया. उसे मुंबई बुलाया गया, लेकिन उसके पास रुपये नहीं थे.
पिता पंकज ठाकुर ने तीन हजार कर्ज लेकर उसे दिये, इंटरव्यू से लौटने के बाद दीपक ने बहन दीपिका को बताया कि इंटरव्यू काफी अच्छा गया है. हालांकि एक महीने तक दीपक को कोई फोन नहीं आया. सितंबर के पहले सप्ताह में दीपक को फोन कर बताया गया कि उसका सलेक्शन हो गया है. यह सुन दीपक खूब रोया.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

संबंधित ख़बरें

Trending News

Advertisement

अन्य खबरें

Advertisement
Advertisement
ऐप पर पढें