बिना करुणा के हास्य नहीं होता : डॉ मृदुला

मुजफ्फरपुर: बिना संवेदनशीलता के साहित्य की रचना नहीं हो सकती. दूसरों को हंसाने वाला कोई वियोगी ही होगा. बिना करुणा के हास्य पैदा नहीं होता. अपने हृदय में दूसरे के हुलास को ढूंढ़ कर सृजन करना ही कविता है. आज की कविता समाज का प्रतिनिधित्व नहीं कर रही है. दूसरों के दुख को हास्य में […]

By Prabhat Khabar Digital Desk |
मुजफ्फरपुर: बिना संवेदनशीलता के साहित्य की रचना नहीं हो सकती. दूसरों को हंसाने वाला कोई वियोगी ही होगा. बिना करुणा के हास्य पैदा नहीं होता. अपने हृदय में दूसरे के हुलास को ढूंढ़ कर सृजन करना ही कविता है. आज की कविता समाज का प्रतिनिधित्व नहीं कर रही है. दूसरों के दुख को हास्य में ढालना जारी रहना चाहिए. कविता में सीता की आह, भामही की शक्ति व आरती की बुद्धिमता होनी चाहिए.

उक्त बातें गोवा की राज्यपाल डॉ मृदुला सिन्हा ने शनिवार को शहीद खुदीराम बोस ग्राउंड में प्रभात खबर हास्य कवि सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहीं. इससे पूर्व उन्होंने सूबे के परिवहन मंत्री रमई राम, विधायक सुरेश शर्मा, विधान पार्षद दिनेश सिंह, पूर्व विधायक विजेंद्र चौधरी व कवियों के साथ संयुक्त रूप से दीप जला कर उद्घाटन किया. राज्यपाल डॉ सिन्हा ने ‘आ गइले चैत के महीनवा हो रामा, पिया नाही अइले’ चैती गीत सुना कर श्रोताओं को मुग्ध कर दिया. हालांकि हास्य कवि सम्मेलन को उसका माहौल देते हुए उन्होंने कहा कि इसमें भी हास्य का पुट है. पति डॉ रामकृपाल सिंह की ओर इशारा करते हुए कहा कि मेरे पिया तो मेरे दाहिनी ओर बैठे हैं. यूनिट मैनेजर निर्भय सिन्हा ने सभी अतिथियों का स्वागत किया.

दीदी मृदुला बनेंगी राष्ट्रपति
डॉ सिन्हा के संबोधन के बाद माइक बाहर से आये नामचीन कवियों के हवाले किया गया. कार्यक्रम का संचालन करते हुए देवास से आये शशिकांत यादव ने कहा, दीदी मृदुला सिन्हा का आशीर्वाद है. अबतक मैंने विधायकों के सामने कविता सुनायी है, वे सभी मंत्री बन गये. दीदी भी राष्ट्रपति बन जायेंगी, फिर हमलोग राष्ट्रपति भवन जाकर कविता सुनायेंगे. श्री यादव के माइक संभालने के बाद से ही श्रोताओं के चेहरे खिल गये. हास्य रस की फुहारों की बारिश में लोग भींगने लगे. कभी ताली तो कभी वाह-वाह की आवाज से ठहाकों की महफिल परवान चढ़ी. मुंबई से आये दिनेश बावरा, मध्य प्रदेश से आये शशिकांत यादव व अनिल तेजस, बनारस से डॉ अनिल चौबे, पूना से दिलीप शर्मा व धवलपुर से प्रतिभा शुक्ल ने हास्य रस की कविता से लोगों को लोटपोट होने के लिए मजबूर कर दिया. देर रात चली महफिल में हजारों श्रोताओं ने कविता का जमकर लुत्फ उठाया.
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