अब लीची पर फली छेदक कीट का आक्रमण

मौसम में उतार चढ़ाव से बनी यह स्थिति सुरक्षा नहीं की तो लीची बचाना मुश्किल वरीय संवाददाता, मुजफ्फरपुर इस बार किसानों के हित में कुछ भी नहीं है. गेहूं, गन्ना, मक्का को भारी क्षति के बाद अब लीची पर फली छेदक कीट का आक्रमण शुरू हो गया है. इस कीट की संख्या काफी तेजी से […]

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मौसम में उतार चढ़ाव से बनी यह स्थिति सुरक्षा नहीं की तो लीची बचाना मुश्किल वरीय संवाददाता, मुजफ्फरपुर इस बार किसानों के हित में कुछ भी नहीं है. गेहूं, गन्ना, मक्का को भारी क्षति के बाद अब लीची पर फली छेदक कीट का आक्रमण शुरू हो गया है. इस कीट की संख्या काफी तेजी से बढ़ रहा है. जिन पौधों में इस कीट का प्रकोप है उस पेड़ की लीची काफी तेजी से गिर रहा है. सुरक्षा नहीं की जाये तो बची हुई लीची भी काफी कम दिनों के लिए पेड़ की डालियों में दिख रही है. इस हालत में किसान व व्यापारी ही नहीं वैज्ञानिक भी हलकान हैं. वैज्ञानिकों का कहना है कि अभी का नमी युक्त मौसम कीड़े मकोड़े के लिए अनुकूल है. जहां देखिए वहीं इसका प्रकोप है. किसानों को लीची की सुरक्षा पर काफी ध्यान देने की जरू रत है. ताकि स्थिति कुछ संभल सके. राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केंद्र के निदेशक डॉ विशालनाथ ने बताया कि मौसम में काफी उतार चढ़ाव है. कई जगह फली छेदक का आक्रमण हो गया है. एहतियात के तौर पर किसानों को लीची बागों में कृषि क्रियाओं पर ध्यान देना चाहिए. इस सप्ताह लीची के बागों में कृषि क्रिया करना अनिवार्य है. तभी फसल बच सकती है. विकसित हो रहे लीची फलों पर 20 पीपीएम एनएए अथवा प्लेनॉफिक्स चार मिलीलीटर 10 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें. फलों को फली छेदक कीट से बचाव के लिए साइपरमेथ्रिन 25 इ सी, 0़ 5 लीटर प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें. बगीचा की हल्की सिंचाई करते रहे. विशेष जानकारी के लिए दूरभाष संख्या 9431813884, 9835274642, 9835171891 व 9934273391 पर किसान संपर्क कर सकते हैं.

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