रिमांड होम के बाल बंदियों की उम्र की होगी जांच

मुजफ्फरपुर : पर्यवेक्षण गृह (रिमांड होम) में बाल बंदियों को उत्पात मचाना अब महंगा पड़ेगा. उत्पात मचाने वालों में अधिक उम्र के बाल बंदी शामिल होते हैं. इस पर अंकुश लगाने के लिए सभी बाल बंदियों के उम्र का सत्यापन किया जायेगा. उक्त निर्देश डीएम अनुपम कुमार ने शुक्रवार को पर्यवेक्षण गृह व अन्य आश्रय […]

By Prabhat Khabar Digital Desk |
मुजफ्फरपुर : पर्यवेक्षण गृह (रिमांड होम) में बाल बंदियों को उत्पात मचाना अब महंगा पड़ेगा. उत्पात मचाने वालों में अधिक उम्र के बाल बंदी शामिल होते हैं. इस पर अंकुश लगाने के लिए सभी बाल बंदियों के उम्र का सत्यापन किया जायेगा. उक्त निर्देश डीएम अनुपम कुमार ने शुक्रवार को पर्यवेक्षण गृह व अन्य आश्रय के संचालन की समीक्षा के दौरान दिये.
समीक्षा के दौरान बताया गया कि पर्यवेक्षण गृह में अधिक उम्र के बाल बंदी रहते हैं. इस बात पर डीएम ने ऐसे बाल बंदियों के उम्र की जांच का आदेश दिया. जेजेबी के सदस्य ने कहा कि सिकंदरपुर स्थित पर्यवेक्षण गृह में मुजफ्फरपुर के अलावा सीतामढ़ी, शिवहर, वैशाली के बाल बंदी रहते हैं. मुजफ्फरपुर जेजेबी को दूसरे जिले के बाल बंदी की उम्र जांच का अधिकार नहीं है. इस पर एसएसपी रंजीत कुमार मिश्र ने कहा कि जब दूसरे जिले के बाल बंदी उत्पात मचाते हैं तो तुरंत उसके विरुद्ध स्थानीय थाने में शिकायत करें. इससे मामला स्थानीय हो जायेगा और दूसरे जिले के बाल बंदी की उम्र की जांच करायी जायेगी.
बैठक में जेजेबी के सदस्य ने बताया कि उम्र जांच के लिए निदेश दिया जाता है तो जांच प्रतिवेदन विलंब से मिलता है. इस पर डीएम ने सीएस को तुरंत जांच रिपोर्ट उपलब्ध कराने का निर्देश दिया.
बैठक में बताया गया कि बाल बंदियों द्वारा गृह का सीसीटीवी कैमरा तोड़ दिया जाता है. इस पर डीएम ने आठ सीसीटीवी कैमरे लगाने का निर्देश दिया ताकि बाल बंदियों की पूरी निगरानी की जाये.
बैठक बाल बंदी के मौत पर चर्चा हुई. इसमें बताया गया कि उसकी उम्र अधिक थी और उसके ऊपर करीब दो दर्जन से अधिक संगीन आपराधिक मामले दर्ज थे. बैठक में बाल संरक्षण अधिकार की सहायक निदेशक ने बताया कि पर्यवेक्षण गृह, बाल गृह व बालिका गृह को छोड़कर सभी गृह गैर सरकारी संस्था द्वारा संचालित किये जाते हैं.
विभिन्न आश्रय गृह के संचालकों ने बताया कि दत्तक ग्रहण संस्थान खबड़ा में शून्य से छह वर्ष के लावारिस बच्चों को रखा जाता है. बाल कल्याण आयोग के माध्यम से गोद लेने की प्रक्रिया होती है. खुला आश्रय गृह में काम करने वाले बेघर बच्चों को रखा जाता है. स्वाधार सेल्टर होम में 18 वर्ष से ऊपर की भटकी महिला को रखा जाता है.
बालिका गृह में 6 से 18 वर्ष की बालिकाओं को रखा जाता है. बैठक में सीएस डॉ ज्ञान भूषण, एसडीओ पूर्वी सुनील कुमार, एसडीओ पश्चिमी नुरूल हक शिवानी, बाल सरंक्षण इकाई की सहायक निदेशिका रोजी रानी, जेजेबी की सदस्य गुंजन सिंह सहित विभिन्न होम के संचालक व अधीक्षक मौजूद थे.
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