हरिश्चंद्र की मौत पर कटघरे में जेल प्रशासन

मुजफ्फरपुर: बंदी हरिश्चंद्र राम के मौत ने जेल प्रशासन को कटघरे में खड़ा कर दिया है. जिस पंप हाउस में उसका शव लटके होने की बात कहीं जा रही है. उसकी ऊंचाई मात्र साढ़े छह फीट के आसपास है. ऐसे में साढ़े पांच फीट का हरिशचंद्र कैसे सुसाइड कर सकता है. मौके से कोई ऐसा […]

By Prabhat Khabar Digital Desk |
मुजफ्फरपुर: बंदी हरिश्चंद्र राम के मौत ने जेल प्रशासन को कटघरे में खड़ा कर दिया है. जिस पंप हाउस में उसका शव लटके होने की बात कहीं जा रही है. उसकी ऊंचाई मात्र साढ़े छह फीट के आसपास है. ऐसे में साढ़े पांच फीट का हरिशचंद्र कैसे सुसाइड कर सकता है. मौके से कोई ऐसा सामान भी नहीं मिला है, जिस पर चढ़ कर लोहे की पाइप से गमछा की गांठ को बांधा गया हो. वहां पर पंप का पाइप जमीन से छह इंच उठा हुआ है. उस पर चढ़ कर गांठ नहीं बांधा जा सकता है.

यहीं नहीं, एसबेस्टस की बनी पंप हाउस में सबसे अंतिम लोहे की पाइप में कटा हुआ गमछा बंधा मिला है. जेल कर्मियों का कहना था कि उसका शव लटकता देख आधा से ही गमछा काट कर उसे अस्पताल भेजा गया था. जिस जगह पर शव लटके होने की बात कहीं जा रही है, वहां पर बिजली के कई तार बंधे हुए है. लेकिन कोई भी तार उजड़ा हुआ नहीं है. सब कुछ व्यवस्थित तरीके से बंधा है. कोने में मकड़ी का जाल भी लगा है. अगर कोई उस जगह पर फांसी लगाता तो कम से कम बिजली का तार खोल कर जरूर हटाता. उसके हटाये बिना जगह बनाना भी मुश्किल प्रतीत लगता है. आश्चर्य की बात यह है कि जिस गमछे का सुसाइड में इस्तेमाल करने की बात कहीं जा रही है, वह हरिशचंद्र की नहीं है. क्या वह दूसरे से गमछा मांग कर सुसाइड करने गया था? अगर उसने किसी जेल कर्मी से गमछा मांगा तो उसने कारण क्यों नहीं पूछा? सूत्र बताते हैं कि जिस गमछे का इस्तेमाल किया गया है, वह सजायफ्ता को मिलता है.

दर्ज हो सकती है तीन प्राथमिकी. बंदी के मौत के मामले में तीन प्राथमिकी दर्ज हो सकती है. हरिशचंद्र के मौत व जेल में बंदियों के बवाल पर मामला दर्ज होगा. इसके साथ ही वार्ड जमादार वीरेंद्र राय भी अलग से प्राथमिकी दर्ज करा सकते है. हालांकि देर रात तक एक भी मामला दर्ज नहीं हो पाया था.
जेल में बना खाना पोखर में फेंका. मौत के बाद हुए बवाल में सोमवार को कैदियों ने खाना नहीं खाया. बताया जाता है कि अधिकांश कैदियों ने जेल प्रशासन की ओर से उपलब्ध कराये गये खाना को पोखर में फेंक दिया. देर रात तक जेल के अंदर तनाव बरकरार था. अधिकारियों के समझाने के बाद भी बंदी मानने को तैयार नहीं थे.
ट्रांसफर हो सकते है एक दर्जन बंदी. जेल में हुए बवाल के बाद एक दर्जन से अधिक कैदियों को दूसरे जेल में ट्रांसफर किया जा सकता है. जेल प्रशासन की ओर से सूची बनायी जा रही है. सोमवार के बवाल में जेल में बंद नक्सली राम प्रवेश बैठा, महिला वार्ड में बंद ललिता देवी, टिंकू हत्याकांड में बंद रोजी सरकार के साथ बम बलास्ट व जाली नोट प्रकरण में बंद इमरान की भूमिका बतायी जा रही है. इन पर बंदियों को भड़काने का आरोप है. इनके अलावा भी कई अन्य को चिह्ति किया गया है. पांच मई को कोर्ट हाजत में भी अमरेश ठाकुर सहित कई बंदियों ने हंगामा किया था.
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