सदर अस्पताल में पारासिटामोल तक नहीं

मुजफ्फरपुर: जिले के सरकारी अस्पतालों में बुखार की सामान्य दवा पारासिटामोल तक नहीं है. इतना ही नहीं पेट खराब की दवा मेट्रॉन, एंटीबायोटिक सहित कई जरू री दवाएं समाप्त हो गयी है. नतीजा मरीजों को बाहर से दवाएं खरीदनी पड़ रही है. डॉक्टर से दिखाने के बाद जब मरीज दवा काउंटर पर जाते हैं तो […]

By Prabhat Khabar Digital Desk |
मुजफ्फरपुर: जिले के सरकारी अस्पतालों में बुखार की सामान्य दवा पारासिटामोल तक नहीं है. इतना ही नहीं पेट खराब की दवा मेट्रॉन, एंटीबायोटिक सहित कई जरू री दवाएं समाप्त हो गयी है. नतीजा मरीजों को बाहर से दवाएं खरीदनी पड़ रही है. डॉक्टर से दिखाने के बाद जब मरीज दवा काउंटर पर जाते हैं तो कहा जाता है, दवा उपलब्ध नहीं है. इतना ही नहीं यहां भरती होने वाले मरीजों के लिए डीएनएस 10 व डीएनएस 15 स्लाइन भी नहीं है. ऐसे मरीजों के परिजनों को दवा बाहर से खरीदनी पड़ रही है.
पीएचसी में आपूर्ति नहीं
दवाओं की किल्लत से जिले के केंद्रीय भंडार ने पीएचसी में भी इन दवाओं की आपूर्ति बंद कर दी है. पीएचसी से दवाओं का ऑर्डर लेकर आने वाले कर्मियों को कहा जा रहा है कि दवाएं नहीं है. दवा आने के बाद ही इसे पीएचसी में भेजा जायेगा. दवाओं की किल्लत से सदर अस्पताल के मरीजों को अधिकतर दवाएं बाहर से लेनी पड़ रही है.

भरती मरीजों को भी डॉक्टर बाहर से स्लाइन सहित अन्य एंटीबायोटिक मंगाने के लिए लिख रहे हैं. दवाओं की यह किल्लत मार्च में ट्रेजरी की ओर से दवा कंपनियों को भेजी जा रही अग्रिम राशि पर रोक लगने से हुई है. अग्रिम राशि नहीं मिलने पर दवा कंपनियों ने दवाओं की आपूर्ति नहीं की थी. दवाओं की किल्लत को देखते हुए सीएस ने मुख्यालय के निर्देश पर कुछ जरूरी दवाओं की खरीद की थी. लेकिन वह दवाएं भी अब समाप्त हो गयी है, जो बची हुई दवाएं हैं, वह भी समाप्त होने को है.

मुख्यालय की स्वीकृति के बाद ही आयेगी दवा
फिलहाल दवाओं की आपूर्ति भी संभव नहीं दिख रही है. यदि मुख्यालय से दवा खरीद की स्वीकृति मिल भी जाती है तो उसे मंगाने में एक महीने से अधिक समय लगेगा. सिविल सजर्न डॉ ज्ञान भूषण कहते हैं कि दवाओं की आपूर्ति के लिए लिखा गया है, लेकिन इसके लिए समय चाहिए. मुख्यालय को सूचना दी गयी है. स्वीकृति मिलने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है.
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