दुष्कर्म पीड़िता से जांच अधिकारी ने कहा, ये सब होता रहता है

मुजफ्फरपुर : न्याय के लिए भटक रही दुष्कर्म पीड़िता पर जांच अधिकारी सुलह करने का दबाव बना रहे है. बोलते हैं, मामले को रफा-दफा कर दो, जिंदगी में ये सब होता रहता है, जब भी पीड़िता का पति थाने जाता है, तो उससे जांच अधिकारी अनाप-शनाप की बातें करते हैं. घटना को साल भर से […]

By Prabhat Khabar Digital Desk |
मुजफ्फरपुर : न्याय के लिए भटक रही दुष्कर्म पीड़िता पर जांच अधिकारी सुलह करने का दबाव बना रहे है. बोलते हैं, मामले को रफा-दफा कर दो, जिंदगी में ये सब होता रहता है, जब भी पीड़िता का पति थाने जाता है, तो उससे जांच अधिकारी अनाप-शनाप की बातें करते हैं.
घटना को साल भर से अधिक का समय बीत गया है. पीड़िता पांच से अधिक बार लिखित बयान दर्ज करा चुकी है. इसके बाद भी आरोपी अभियुक्त को गिरफ्तार करने के बजाए पुलिस खामोश है. पुलिस की निष्क्रियता से आरोपित का मन बढ़ गया है. वो पीड़िता को जान से मारने की धमकी दे रहा है. न्याय की उम्मीद लिए पीड़िता गुरुवार को दुबारा एसएसपी के जनता दरबार में पहुंची, लेकिन कोई अधिकारी न होने के कारण उसे वापस लौटना पड़ा.
पीड़िता सदर थाना क्षेत्र की रहनेवाली है. उसके पड़ोस में ही रौशन कुमार दूबे रहता था, जिसने चोरी-छुपे नहाते समय का उसका वीडियो बना लिया. इसके बाद वह उसे ब्लैक मेल करने लगा. विरोध करने पर वीडियो और फोटो को सोशल साइट पर डालने की धमकी देता था.
वीडियो के बल पर तीन साल तक उसका यौन शोषण करता रहा. इतना ही नहीं वह उसे फोन करके भी परेशान करता था. बाद में हिम्मत करके उसने पूरी बात अपने पति को बतायी. पति और पत्नी इस मामले की शिकायत जब सदर थाने लेकर पहुंचे, तो पहले दोनों को थाने से भगा दिया गया. इसके बाद दोनों कोर्ट में गये. कोर्ट के आदेश पर 29 अक्टूबर 2014 को मामला दर्ज हुआ. जांच अधिकारी रमेश दत्त पांडेय ने पीड़िता का बयान दर्ज कराया.
बयान दर्ज होने के बाद भी जब कोई कार्रवाई नहीं हुई, तो एक दिसंबर 2014 को वह अपने पति के साथ थाने गयी, जहां से उसे भगा दिया गया. इसके बाद वह थाने का चक्कर लगाते-लगाते थक गयी, लेकिन बयान से आगे मामला नहीं बढ़ा. इधर, खुद पर कार्रवाई नहीं होता देख आरोपित रौशन कुमार दूबे उसे और प्रताड़ित कर रहा है. वो उसे जान से मारने की धमकी दे रहा है.
इधर, इस संबंध में जब जांच अधिकारी रमेश दत्त पांडेय से बात की गयी, तो वह सफाई देते ही रह गये. कहने लगे कि पीड़िता से वो छह माह ज्यादा हो गये, मिले नहीं हैं. उसके लगाये आरोप निराधार हैं, लेकिन वो ये नहीं बता सके कि आखिर उन्होंने अभी तक मामले में कार्रवाई क्यों नहीं की है?
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