किसको सुना रहा था गोली की आवाज!

मुजफ्फरपुर: हरिनारायण, उनकी पत्नी व नौकर को गोली मारने के बाद अपने घर पहुंचकर डोनाल्ड ने किसी को फोन लगाया था. आस-पास के लोगों की मानें तो जोर-जोर से बात करते हुए वह कह रहा कि उन लोगों को खत्म कर चुका हूं. अब अपनी बेटियों के साथ ही खुद को भी खत्म कर रहा […]

By Prabhat Khabar Digital Desk |
मुजफ्फरपुर: हरिनारायण, उनकी पत्नी व नौकर को गोली मारने के बाद अपने घर पहुंचकर डोनाल्ड ने किसी को फोन लगाया था. आस-पास के लोगों की मानें तो जोर-जोर से बात करते हुए वह कह रहा कि उन लोगों को खत्म कर चुका हूं. अब अपनी बेटियों के साथ ही खुद को भी खत्म कर रहा हूं. चिल्लाते हुए वह काफी कुछ बोल गया. इसी बीच गोली की आवाज सुनाई दी, तो लोग सन्न रह गए. थोड़ी ही देर में सन्नाटा छा गया. अंदर से आवाज आनी भी बंद हो गई तो लोगों को अनहोनी की आशंका हुई.
हाथ में था पिस्टल, जेब में 21 गोलियां . पुलिस ने जब डोनाल्ड के शव की तलाशी ली तो हाथ में एकदम नया 3.65 एमएम का पिस्टल और जेब में 21 गोलियां मिलीं. उसके पास से सुसाइड नोट भी बरामद हुआ. पिस्टल में घटना के बाद भी गोली बची थी, जिसे पुलिस ने मिस करके कब्जे में ले लिया. पुलिस के लिए यह भी जांच का विषय है कि डोनाल्ड के पास पिस्टल कहां से आया. वैसे गांव के कुछ लोगों का कहना था कि महीने भर पहले उसने अपनी कुछ जमीन भी बेची थी.
कनपटी पर सटाकर मारी थी हरिनारायण को गोली . किसी भी खतरे से बेपरवाह अपने बरामदे में सो रहे हरिनारायण की कनपटी के ऊपर सटाकर गोली मारी गई थी. वहीं उनकी पत्नी लक्ष्मी देवी को तीन गोलियां मारी. वह आंगन में दरवाजे के पास ही निढाल पड़ी हुई थी. इसके अलावा नौकर शिवदयाल महतो के साथ खुद को व अपनी दो बेटियों को एक-एक गोली मारी थी. शिवदयाल के सीने पर गोली लगी थी.
मां रहती थी परेशान, भाई ने घर छोड़ा . डोनाल्ड की करतूत से उसकी मां व भाई काफी परेशान रहते थे. करीब 10 साल पहले उसके पिता की मौत हो गई थी. उसका भाई जितेंद्र सिंह उसकी करतूत से परेशान होकर घर छोड़ दिया था. ग्रामीणों ने बताया कि सत्येंद्र किसी प्राइवेट स्कूल में पढ़ाता है. वह अपना परिवार लेकर मुजफ्फरपुर में रहता है. मंगलवार को डोनाल्ड के साथ झगड़ा हुआ तो उसकी मां भी बड़े बेटे के पास चली गई. हालांकि घटना के बाद देर शाम तक वह या उसकी मां घर नहीं पहुंचे थे.
जहां जिंदगी मिली वहीं आई मौत
शिवदयाल महतो को बचपन में जहां जिंदगी मिली थी, वहीं उसको मौत भी मिली. हरिनारायण सिंह का नौकर शिवदयाल कहां का रहने वाला था, यह गांव के लोग नहीं बता सके. वजह कि उसने कभी इसकी चर्चा ही नहीं की. बताया कि बचपन से ही वह यहीं रह गया था. ग्रामीणों ने बताया कि अपनी उम्र का महत्वपूर्ण समय उसने हरिनारायण सिंह के परिवार की सेवा में ही गुजार दी.
ढांढस बंधाने वालों का तांता
बनिया गांव में अपने मिलनसार स्वभाव के चलते सबके लिए खास बने हरिनारायण की मौत से हर काेई आहत था. सबकी जुबान पर इस बात की ही चर्चा थी कि वे कभी किसी का बुरा नहीं किए, लेकिन काल ने उन्हें असमय ही निशाना बना लिया.
एसकेएमसीएच में देर रात जलाया गया सत्येंद्र का शव
देर रात सत्येंद्र के भाई जितेंद्र कुमार एसकेएमसीएच शव लेने पहुंचे. अहियापुर थाना पुिलस से कहा कि शव गांव ले जाने पर उन्हें खतरा है. इसलिए यहां ही अंतिम संस्क्ार कर दिया जाय. वन विभाग में देर रात सत्येंद्र के शव को जलाया गया, जबकि दोनों बेटियों के शव को मिट्टी में दफना दिया गया. वहीं हरिनारायण सिंह, उनकी पत्नी लक्ष्मी व नौकर शिवदयाल का शव लेकर परिजन घर चले गए, जहां से देर रात अंतिम संस्कार कर दिया गया.
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