पीजी विभागाध्यक्ष ही करायेंगे कॉपी की जांच

मुजफ्फरपुर: बीआरए बिहार विवि में स्नातक पार्ट थर्ड की कॉपियों की जांच के लिए मूल्यांकन केंद्र के विकेंद्रीकरण का फैसला वापस ले लिया गया है. बीते साल की तरह एक बार फिर संबंधित पीजी विभागाध्यक्ष की देखरेख में ही कॉपियों की जांच करायी जायेगी. हालांकि इस बार परीक्षक बहाल करने का अधिकार उन्हें नहीं होगा. […]

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मुजफ्फरपुर: बीआरए बिहार विवि में स्नातक पार्ट थर्ड की कॉपियों की जांच के लिए मूल्यांकन केंद्र के विकेंद्रीकरण का फैसला वापस ले लिया गया है. बीते साल की तरह एक बार फिर संबंधित पीजी विभागाध्यक्ष की देखरेख में ही कॉपियों की जांच करायी जायेगी. हालांकि इस बार परीक्षक बहाल करने का अधिकार उन्हें नहीं होगा. परीक्षा विभाग परीक्षकों की सूची तैयार करेगी. फिर उसे संकाय के डीन से दिखाया जायेगा कि जिन्हें परीक्षक बनाया गया है, वे उसके योग्य हैं अथवा नहीं. उनकी मुहर लगने के बाद ही परीक्षक कॉपी जांच सकेंगे.
रिजल्ट में देरी के कारण परीक्षा बोर्ड ने इस साल एक प्रयोग करने का फैसला लिया था. इसके तहत विवि के कार्यक्षेत्र में पड़ने वाले पांच जिलों, मुजफ्फरपुर, वैशाली, सीतामढ़ी, पूर्वी चंपारण व पश्चिम चंपारण में एक-एक मूल्यांकन केंद्र बनाने का फैसला लिया गया. प्रत्येक केंद्र पर दूसरे जिले में स्थित कॉलेजों की कॉपियां जांची जानी थी. लेकिन बीते 29 सितंबर को कुलपति डॉ पंडित पलांडे की अध्यक्षता में जब दुबारा परीक्षा बोर्ड की बैठक हुई तो सदस्यों ने इसका विरोध कर दिया. उनका तर्क था कि बाहर कॉपी जांच कराने पर उसकी विश्वसनीयता खतरे में पड़ सकती है.

इसके बाद केंद्रों के विकेंद्रीकरण का फैसला वापस ले लिया गया.

वरीयता पर फिर फंसेगा पेच : बीते साल पार्ट थर्ड की कॉपियों की जांच के लिए परीक्षक की नियुक्ति को लेकर काफी विवाद हुआ था. अधिकांश विवाद संबद्ध कॉलेजों के परीक्षक को लेकर हुआ था. विवि पर आरोप लगा था कि कई जूनियर शिक्षकों को परीक्षक बना दिया गया, जबकि सीनियर की अनदेखी हुई. इसके बाद प्रतिकुलपति ने प्रत्येक संबद्ध कॉलेजों से शिक्षकों की वरीयता सूची देने को कहा था. कुछ कॉलेजों ने सूची उपलब्ध की करायी, लेकिन फिलहाल वह गायब है. ऐसे में एक बार फिर जूनियर-सीनियर का सवाल खड़ा हो सकता है.
मिल सकता है मैनुअल अंकपत्र : स्नातक पार्ट थर्ड की परीक्षा में एक बार फिर परीक्षार्थियों को मैनुअल अंकपत्र दिया जा सकता है. यदि ऐसा होता है तो एक बार फिर अंकपत्र की विविधता पर सवाल उठ सकते हैं. फिलहाल सत्र 2012-15 की स्नातक पार्ट थर्ड की परीक्षा चल रही है. इस सत्र में नामांकित छात्र-छात्राओं को स्नातक पार्ट वन में मैनुअल अंकपत्र दिया गया था. वहीं बीते साल हुई पार्ट टू परीक्षा में सफल होने पर उन्हें कंप्यूटराइज्ड अंकपत्र दिया गया था. इस बार परीक्षा सिस्टम को कंप्यूटरीकृत करने के लिए एनआइसी (नेशनल इन्फॉर्मेटिक सेंटर) के साथ अनुबंध की प्रक्रिया जारी है, लेकिन इसमें अभी वक्त लग सकता है. इधर, प्रतिकुलपति डॉ प्रभा किरण स्नातक पार्ट वन व टू के अनुभवों को देेखते हुए विवि कंप्यूटर सेंटर में कार्यरत कर्मियों से पार्ट थर्ड का अंकपत्र तैयार करवाने के पक्ष मे नहीं हैं.
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