एनएच 77 व बाइपास के निर्माण होने से मुजफ्फरपुर, बेतिया, मोतिहारी, रक्सौल, दरभंगा, मधुबनी, झंझारपुर, सीतामढ़ी, शिवहर जिलों से पटना का आवागमन काफी सुगम हो जायेगा. हाजीपुर रामदयालु रेल लाइन के दोहरीकरण से मुजफ्फरपुर जंक्शन से गाड़ियों की संख्या बढ़ेगी. डबल लाइन होने से समय पर गाड़ियां पहुंचेंगी. इसी तरह हाजीपुर सुगौली रेल लाइन के बनने से चंपारण रक्सौल के तरफ से आने वाले लोगों का पटना आना आसान हो जायेगा. मोतिहारी में केंद्रीय विवि बनने से उत्तर बिहार के छात्रों को उच्च गुणवत्ता की शिक्षा मिलेगी.
कानूनी दावंपेच में फंसा उत्तर बिहार का विकास
मुजफ्फरपुर: भूमि अधिग्रहण में जमीन के किस्म व मुआवजा दर निर्धारण पर जमीन मालिकों की आपत्ति के कारण उत्तर बिहार में विकास योजनाएं कछुए की गति से आगे बढ रही हैं. जिन योजनाओं को चार से पांच वर्ष में पूरा होना था, यह दस साल बाद भी अधूरी हैं. इसमें रेल सड़क, पावर प्रोजेक्ट, स्टेट […]
मुजफ्फरपुर: भूमि अधिग्रहण में जमीन के किस्म व मुआवजा दर निर्धारण पर जमीन मालिकों की आपत्ति के कारण उत्तर बिहार में विकास योजनाएं कछुए की गति से आगे बढ रही हैं. जिन योजनाओं को चार से पांच वर्ष में पूरा होना था, यह दस साल बाद भी अधूरी हैं. इसमें रेल सड़क, पावर प्रोजेक्ट, स्टेट हाइवे, सेंट्रल विवि बनाये जाने वाली बड़ी योजनाएं शामिल हैं.
बाजार दर से किसान मांग रहे मुआवजा. ये सभी योजनाएं भूमि अधिग्रहण के पेच में फंसी हैं. किसान अधिग्रहण किये गये जमीन का वर्तमान बाजार दर से मुआवजा भुगतान की मांग कर रहे हैं. इसकी वजह अधिग्रहण किये गये जमीनों का विगत सालों में काफी विकसित होना है. सामान्य किस्म की जमीन अब कॉमर्शियल व आवासीय दर पर बिक रही है, जबकि जिस समय जमीन का अधिग्रहण किया गया, उस जमीन का दर भीठ-चौर का था. दरअसल योजनाओं के चालू होने में देरी होने के कारण भी ये परेशानी आ रही है.
आॅर्बिटेशन में मामले का नहीं हो रहा निबटारा . अधिग्रहण किये गये जमीनों का किस्म बदलने व मुआवजा दर में वृद्धि को लेकर जमीन मालिक अपर समाहर्ता के न्यायालय में केस कर चुके हैं. लेकिन उक्त मामले का निबटारा नहीं हो पा रहा है. अधिकारी जमीन के किस्म बदलने से हाथ पीछे खींच रहे हैं. इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि तीन साल से एनएच 77 के अधिग्रहण का मामला आॅर्बिटेशन में लटका हुआ है.
इन प्रोजेक्टों से बदलेगी उत्तर बिहार की तस्वीर.भूमि अधिग्रहण के मामले का निबटारा तेजी से हो, तो उत्तर बिहार के एक दर्जन मेगा प्रोजेक्ट साल दो साल के अंदर पूरा हो सकता है. इससे मुजफ्फरपुर सहित उत्तर बिहार के जिलों में यातायात सुविधा सुगम हो जायेगा. सभी योजनाओं के लिए राशि भी उपलब्ध है.
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