सूर्य आराधना का पर्व मकर संक्रांति कल
सूर्य आराधना का पर्व मकर संक्रांति कल15 जनवरी की शाम 5.26 तक रहेगा संक्रांति का योगवरीय संवाददाता, मुजफ्फरपुरइस वर्ष मकर संक्रांति शुक्रवार मनायी जायेगी. सूर्य 14 जनवरी की अर्धरात्रि के बाद 1.26 बजे मकर राशि में प्रवेश करेगा. इस कारण संक्रांति 15 को होगी. संक्रांति का पुण्यकाल 15 जनवरी को सूर्योदय से सायंकाल 5.26 मिनट […]
सूर्य आराधना का पर्व मकर संक्रांति कल15 जनवरी की शाम 5.26 तक रहेगा संक्रांति का योगवरीय संवाददाता, मुजफ्फरपुरइस वर्ष मकर संक्रांति शुक्रवार मनायी जायेगी. सूर्य 14 जनवरी की अर्धरात्रि के बाद 1.26 बजे मकर राशि में प्रवेश करेगा. इस कारण संक्रांति 15 को होगी. संक्रांति का पुण्यकाल 15 जनवरी को सूर्योदय से सायंकाल 5.26 मिनट तक रहेगा. स्नान व दान के साथ पर्व मनाने से पुण्य की प्राप्ति होगी. आचार्य रंजीत नारायण तिवारी कहते हैं कि पौष महीने में सूर्य के मकर राशि में प्रवेश के साथ मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाता है. साथ ही सूर्य उत्तरायण हो जाता है. यह भगवान सूर्य की आराधना का पर्व है. इस दिन पवित्र तीर्थों में स्नान और दान का काफी महत्व है. मान्यता है कि इस दिन तीर्थों में स्नान और दान करने से पुण्य फल की प्राप्ति तो होती ही है, साथ ही रोगों का निवारण भी होता है. प्रत्येक दो वर्ष पर बदलेगी मकर संक्रांति की तिथिपृथ्वी अपनी धुरी पर घूमते हुए प्रतिवर्ष 55 विकला या 72 से 90 सालों में एक अंश पीछे रह जाती है. इससे सूर्य मकर राशि में एक दिन देरी से प्रवेश करता है. करीब 1700 साल पहले 22 दिसंबर को मकर संक्रांति मनायी जाती थी. इसके बाद पृथ्वी के घूमने की गति के चलते यह धीरे-धीरे दिसंबर के बजाय जनवरी तक आने लगी. मकर संक्रांति का समय हर 80 से 100 साल में एक दिन आगे बढ़ जाता है. 19वीं शताब्दी में कई बार मकर संक्रांति 13 व 14 जनवरी को मनायी जाती थी. वहीं 2017 व 2018 में संक्रांति 14 जनवरी शाम को होगी, लेकिन उसका पुण्यकाल 15 जनवरी को ही माना जायेगा. सूर्य जब मकर राशि में प्रवेश करता है, तब संक्रांति मानी जाती है. इसका पर्व काल 12 घंटे तक रहता है.
