हंगामे के बीच बजट पास

बीआरए बिहार विवि का 2016-17 का सीनेट बजट हो-हल्ला के बीच पास हो गया. सीनेट की बैठक से पहले हुए हंगामे का असर सीनेट हाल में बिल्कुल नहीं दिखा. सभी मेंबरों के पास अपने-अपने मुद्दे थे, जिस पर जोरदार तरीके से चर्चा भी हुई. और उसका जवाब भी उन्हें अध्यक्ष की तरफ से लिखित तौर […]

By Prabhat Khabar Digital Desk |
बीआरए बिहार विवि का 2016-17 का सीनेट बजट हो-हल्ला के बीच पास हो गया. सीनेट की बैठक से पहले हुए हंगामे का असर सीनेट हाल में बिल्कुल नहीं दिखा. सभी मेंबरों के पास अपने-अपने मुद्दे थे, जिस पर जोरदार तरीके से चर्चा भी हुई. और उसका जवाब भी उन्हें अध्यक्ष की तरफ से लिखित तौर पर मिला.
मुजफ्फरपुर : बीआरए बिहार विवि में शनिवार को जोरदार हंगामे के बीच सीनेट के मेंबरों की सहमति से विवि का 665,88,52,971 रुपये का बजट पास कर दिया गया. तीखी बहस और जोरदार तरीके से जनप्रतिनिधियों का जवाब कभी हो-हल्ला करा रहा था तो कभी मेंबरों के के चेहरे पर खुशी के भाव उमड़ रहे थे. हंगामेदार बहस के बीच एक दो बार खुद कुलपति को बीच-बचाव के लिए बोलना पड़ा. इस पर मेंबर शांत हुए.
कई बार स्थिति ऐसी आ गई मानों सदस्य आपस में लड़-भिड़ेंगे, लेकिन सब कुछ बेहद लोकतांत्रिक तरीके से हुआ. सदस्यों ने प्रति कुलपति डॉ प्रभा किरन के बजट भाषण को गौरपूर्वक सुनकर इसका अनुमोदन किया.
11 बजे से शुरू हुई सीनेट की बैठक : 11 बजे से शुरू हुई सीनेट की बैठक : हो-हंगामे के बीच कुलपति डॉ पी पलांडे व सीनेट मेंबर सीनेट हाॅल में पहुंचे और सीनेट के बैठक की कार्रवाई शुरू की गयी. अध्यक्षीय भाषण देते हुए कुलपति ने कहा कि कुलाधिपति रामनाथ कोविंद का अभिनंदन करता हूं.
उनके मार्गदर्शन में विवि निरंतर विकास की ओर अग्रसर होगा. कहा, विगत साल में हमने कई महान विभूतियां खाेई हैं. इनमें राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम, बीआरए बिहार विवि के पूर्व कुलपति राजदेव सिंह, प्रति कुलपति भूषण राय, पूर्व राज्यपाल शामिल हैं.
विवि ने कई चुनौतियों का सामना करते हुए आधारभूत संरचना को मजबूत किया है. हमारा अतीत गौरवशाली रहा है. हम अपनी पंरपरा का निर्वहन करते हुए अग्रसर हो रहे हैं. नैक मूल्यांकन के कारण हमें प्राप्त हाेने वाले अनुदानों में त्रुटि हुई है.
रूसा ने विवि के विकास के लिए बीस करोड़ की राशि आवंटित की है. विज्ञान प्रौद्योगिक विभाग ने एलएस कॉलेज व आरडीएस कॉलेज को 80-80 लाख रुपये दिये हैं. विवि को 50 लाख रुपये का अनुदान मिला है. कहा, छात्रों के लिए कंप्यूटरीकृत मार्क्सशीट जारी किया गया है. विवि को सभी के सहयोग से आदर्श विवि बनाना ही लक्ष्य है. अंत में उन्होंने इस पंक्ति के जरिए अपने अभिभाषण को समाप्त किया, ‘‘आपने कर दिया इस महफिल को इतना रौशन, आप सलामत रहे दिल में चिरागों की तरह.’’
सहमति से पास हुआ बजट : सीनेट सदस्यों के हो-हल्ला के बीच शनिवार को 665,88,52,971 का बजट पास हुआ. इस पर सभी सदस्यों ने रायशुमारी भी जताई. शिक्षकेत्तर पेंशनधारियों को पेंशन का पुनरीक्षण नये यूजीसी वेतनमान में किया गया है. शिक्षकेत्तर पेंशनधारियों के लिए उपादान की अधिकतम सीमा दस लाख रुपये रखी गयी है.
छात्रहित वेलफेयर स्कीम में 44,80,00, डिसक्रीशनरी ग्रांट हेतु तीन लाख, छात्रों के खेलकूद मद में बदलाव करते हुए 50 लाख का प्रावधान किया गया है. एसीपी पेंशन योजना के तहत प्रोन्नति होने पर भुगतान हेतु 14,95,67,400 का प्रावधान किया गया है. छात्रावासों के क्वार्टर के जीर्णाेद्धार हेतु एक करोड़ 13 लाख, विवि के मरम्मत व रखरखाव हेतु 3,65,00,000 के मद में 1,44,00,000 का बजट में प्रावधान किया गया है. इसी तरह पीजी विभाग में कार्यरत 104 शिक्षकों के वेतन के लिए 19,98,40,924 रुपये है. कॉलेज में कार्यरत 598 शिक्षकों के लिए 17,94,67,849 रुपये है.
क्लास थ्री में कार्यरत 253 कर्मचारियों के लिए 9,73,72,872 रुपये है. पीजी डिपार्टमेंट में ननटीचिंग शिक्षकों के लिए 2,55,68,340 रुपये है. इसी तरह पेंशन और एरियर के लिए 294,21,53,035 हजार खर्च करेगा. ग्रांट फॉर रिसर्च के लिए 50 लाख, रिसर्च फेलोशिप के नाम पर 50 लाख का बजट का प्रावधान है. इसके अलावा रुसा के लिए बीस करोड़ 68 लाख रुपये का अनुदान मिला है.
एचसी-एसटी टीचरों की हो नियुक्ति . सीनेट मेंबर ने पीजी डिपार्टमेंट में एचसीएसटी टीचर नियुक्ति की मांग करते हुए कहा कि कैश व मेरिट के तहत प्रमोशन हो. तीन वर्षाें से अनुकंपा के आधार पर बहाली नहीं हो रही है. विवि के आवासों की स्थिति बेहद खराब है.
विवि में एचसीएसटी टीचर नियुक्ति किये जायें.
खेल शिक्षा को मिले बढ़ावा. सीनेट मेंबर दिल मोहन झा ने कहा कि 2007 के बाद से एक भी अंतरदेशीय प्रतियोगिता की मेजबानी विवि ने नहीं करायी है. इस सत्र में दो प्रतियोगिता हुई.
उसके लिए 11 टीमें खुद के पैसे से खेलने गयीं. 2007 से खिलाड़ियों का सम्मान समारोह नहीं हुआ. विवि के क्रीड़ा परिषद में पैसे की कमी है. स्पोर्ट्स कमेटी में तकनीकी एक्सपर्ट रखे जायें. इस बीच सीनेट अध्यक्ष ने खेल के मद में बजट बढ़ाते हुए 50 लाख करने की घोषणा की.
मानदेय समस्या का हो निवारण.एमएलसी संजय सिंह ने कहा कि नन टीचिंग स्टॉफ के सामने वेतन की समस्या है. इस पर विवि लिखित आश्वासन कर भुगतान का निर्णय ले. 55 ऐसे लिखित केस हैं, जो पेंडिंग पड़े हैं. इसी क्रम में पूर्व विधायक अच्युतानंद ने भी नन टीचिंग के मुद्दे पर संजय सिंह का समर्थन किया.
गर्ल्स हॉस्टल बने . एनएसएस कोटे से सीनेट सदस्य के रूप में आयी छात्रा ने शहर में अन्य दो गर्ल्स कॉलेज में गर्ल्स हॉस्टल बनवाने की मांग की. कहा, एनएसएस की छात्रों को अतिरिक्त 10 अंक मिले.
विद्यार्थी हित में करें बात
डॉ मोहम्मद इकबाल शमी ने कहा सीनेट के मेंबरों के बीच हुए हो-हल्ले पर कहा कि सभी सदस्य छात्रों के हिताें की बात करें. विद्यार्थी के हित की बात हो, कॉलेज में पढ़ाई हो रही है, क्लास चलते हैं, सेमिनार होते हैं. इन मुद्दों पर बहस होनी चाहिए. न कि एक-दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप.
आरोप पूरी तरह से गलत
एमएलसी देवेश चंद्र ठाकुर ने सीनेट मेंबरों के पैसे के बंदरबांट के सवाल पर जवाब देते हुए कहा कि धन के बंदरबांट का जो आरोप लगाया गया है, वह पूरी तरह से निराधार है. सरकार की ओर से अभी विवि से संबद्ध कॉलेजाें को पैसे रिलीज किये जा रहे हैं. ऐसे में बंदरबांट कहा से होगा. इसके अलावा सिंडिकेट मेंबर डॉ रेवती रमण ने इस मामले में सफाई देते हुए कहा कि अगर पैसे की बंदरबांट का आरोप सिद्ध हो जाता है तो वह अपने पद से इस्तीफा दे देंगे.
बीएड कॉलेज को जांच के बाद मिले मान्यता
सीनेट मेंबर सतीश चंद्र मिश्रा ने पूर्वी चंपारण में कॉलेज न होने के मुद्दे को जोरदार तरीके से रखा. कहा, रक्सौल, पूर्वी चंपारण और बेतिया के छात्रों को शिक्षा के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है. 28 बीएड कॉलेज को तभी मान्यता दी जाये, जब उनकी जांच हो कि वे बीएड शिक्षा कराने में सक्षम हैं. उनके पास संसाधन है. उन्होंने कुलपति से कहा कि आपका कार्यकाल केवल झूठ का पुलिंदा है. आप की क्या उपलब्धि है? एकेडमिक सेशन इतना लेट क्याें हैं? इस पर सीनेट में जमकर हो-हल्ला हुआ. इस पर एमएलसी देवेश चंद्र ठाकुर ने सदस्यों को शांत कराया. उन्होंने बीएड कॉलेज की मांग का समर्थन किया.
बेतिया कॉलेज में हो रही लूट . बेतिया से आये शारदा सिंह ने कहा कि बेतिया कॉलेज में नैक मूल्यांकन के नाम पर लूट हाे रही है. प्राचार्य का स्थानांतरण हो चुका है. इसके बाद भी वह वहां से नहीं हट रहे हैं. इस पर प्राचार्य ने हो-हल्ला करते हुए कहा कि ये लोग माफियागिरी करते हैं. पैसा वसूलते हैं. छात्रों की शिकायत है. जो मैं नहीं होने दूंगा. इस पर बैठक में काफी हो-हल्ला शुरू हो गया. इस पर कुलपति को बोलना पड़ा कि शैक्षणिक माहाैल पर चर्चा करें. एक दूसरे पर आरोप लगाकर विषयानंतर न हो.
सलेक्शन कमेटी की बैठक हो
डॉ हरेंद्र कुमार ने कहा की डिस्टेंस तो बन गया है, लेकिन जो भी काम हो, वह नियम से हाे. यूजीसी के नियमानुसार सलेक्शन कमेटी की बैठक हो. इसका समर्थन देवेश चंद्र ठाकुर ने करते हुए कहा कि इससे शिक्षा में सुधार होगा.
अध्यक्षीय कुर्सी मत छोड़िये
सीनेट की शुरुआत होते ही जैसे ही कुलपति पी पलांडे अपनी कुर्सी से उठकर मंच पर लगे माइक के पास बोलने के लिए पहुंचे तो एक सदस्य ने अध्यक्षीय कुर्सी के पद की गरिमा का हवाला देते हुए कहा कि यह कुर्सी मत छोड़िये, क्योंकि कभी भी अध्यक्षीय कुर्सी खाली नहीं होती है. इस पर सभी सदस्यों ने एक राय होकर कहा कि कुर्सी कभी खाली नहीं होती. इस पर कुलपति ने अपने अध्यक्षीय भाषण अपने कुर्सी से बैठकर ही दिया.
शोक सभा पर जताई आपत्ति
कुलपति पी पलांडे के अध्यक्षीय भाषण के दौरान जब उन्होंने दिवंगत हुए महान विभूतियों के नाम पर दो मिनट का मौन रखने की बात कही. तो सभी लोगों ने दो मिनट का मौन रखकर प्रार्थना की. लेकिन जैसे ही भाषण खत्म हुआ तो देवेश चंद्र ठाकुर ने बेहद सलीके से कहा कि शोकसभा सीनेट की बैठक के अंत में होना चाहिए था. यह नियम नहीं है.
हाजीपुर एलएन कॉलेज का गूंजा मुद्दा
हाजीपुर एलएन कॉलेज का मुद्दा सीनेट की बैठक में जोर-शोर से गूंजा. सीनेट मेंबरों ने कहा कि एजेंडे में इसे क्यों शामिल नहीं किया गया. जबकि कॉलेज में कामर्स की पढ़ाई होती है.
इंश्योरेंस स्कीम के मामले पर हुई बहस
कुछ सीनेट मेंबरों एक शुमारी करते हुए कहा कि शिक्षकों का कटा हुआ रुपये नहीं मिलता है. जबकि ग्रुप इंश्योरेंस है. ऐसे में बजट में इसका प्रावधान नहीं है. इस पर एमएलसी संजय सिंह ने बताया कि 1982 से ही इसे बंद कर दिया गया है. ऐसे में विवि इस दिशा में कुछ नहीं कर सकता है.
लिफ्ट लगाया जाये या परीक्षा विभाग को नीचे लाया जाये
सीनेट मेंबरों ने कहा कि शारीरिक रूप से अक्षम लोगों को परीक्षा विभाग में जाने के लिए काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है. कई बार यह मुद्दा उठ चुका है. जबकि पूर्व में लिफ्ट लगवाने की बात कही गयी थी. ऐसे में या तो लिफ्ट लगाया जाये या तो परीक्षा विभाग को नीचे लाया जाये.
इनकी रही गरिमामयी उपस्थिति
सीनेट की बैठक में एमएलसी देवेश चंद्र ठाकुर, एमएलसी संजय कुमार सिंह, पूर्व विधायक अच्युतानंद, रजिस्टार डॉ रत्नेश कुमार मिश्रा, प्रॉक्टर डॉ सतीश कुमार राय, डॉ हरेंद्र सिंह, डॉ ममता रानी, डॉ पकंज कुमार, डीओ डॉ कल्याण झा, एलएस कॉलेज प्राचार्य डॉ उपेंद्र कुंवर विवि के सभी पदाधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे.
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