डॉ सूरज की पुस्तक में महाकवि के व्यक्तित्व का दर्शन

मुजफ्फरपुर : महाकवि आचार्य जानकीवल्लभ शास्त्री पर केंद्रित अब मैं चल रहा हूं का लोकार्पण रविवार को नया टोला स्थित थियोसॉफिकल लॉज में किया गया. डॉ सूरज मृदुल की लिखित पुस्तक साहित्यकारों के लिए चर्चा का विषय बनी. पुस्तक का लोकार्पण भाषा विज्ञानी डॉ अवधेश्वर अरुण ने किया. उन्होंने कहा कि शास्त्री जी का व्यक्तित्व […]

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मुजफ्फरपुर : महाकवि आचार्य जानकीवल्लभ शास्त्री पर केंद्रित अब मैं चल रहा हूं का लोकार्पण रविवार को नया टोला स्थित थियोसॉफिकल लॉज में किया गया. डॉ सूरज मृदुल की लिखित पुस्तक साहित्यकारों के लिए चर्चा का विषय बनी. पुस्तक का लोकार्पण भाषा विज्ञानी डॉ अवधेश्वर अरुण ने किया. उन्होंने कहा कि शास्त्री जी का व्यक्तित्व बड़ा था.

उन्होंने छायावादी संस्कृति को साहित्य व जीवन का आधार बनाया. कहा कि डॉ सूरज की पुस्तक में आचार्य के व्यक्तित्व का दर्शन हैं. इससे पूर्व अमरनाथ मेहरोत्रा ने स्वागत भाषण किया. डॉ रामप्रवेश सिंह ने महाकवि के जीवन व दर्शन पर प्रकाश डाला. पूर्व विधायक केदारनाथ प्रसाद ने कहा कि महाकवि का व्यक्तित्व किसी को भी सहज आकर्षित करता था. उनके सानिध्य में मैंने बहुत कुछ सीखा है. संतोष गुप्ता ने कहा कि महाकवि का जाना कचोटता है.

लेखक सूरज मृदुल ने कहा कि महाकवि के साथ मैंने तीन दशक गुजारे हैं. उनके सानिध्य में जो भी कुछ जाना, उसी को संस्मरण के तौर पर पुस्तक का रूप दिया है. कार्यक्रम की अध्यक्षता चितरंजन सिन्हा कनक ने की. संचालन व धन्यवाद ज्ञापन डॉ यशवंत कुमार ने किया. इस मौके पर हरिनारायण गुप्ता, गणेश सारंग सहित कई साहित्यकार मौजूद थे.

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