कांटी रैक प्वाइंट पर अवैध कमाई को लेकर हो सकता है संघर्ष

मुजफ्फरपुर : कांटी रैक प्वाइंट पर प्रतिमाह बीस लाख की अवैध कमाई को लेकर वर्चस्व की लड़ाई काफी दिनों से चली आ रही है. इसी लड़ाई के तहत नक्सली परचा चिपकाये जाने की भी बात आ रही है. वर्चस्व की लड़ाई को लेकर ही गिट्टी अनलोडिंग ठेकेदार धर्मेंद्र कुमार की हत्या 11 नवंबर 2015 को […]

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मुजफ्फरपुर : कांटी रैक प्वाइंट पर प्रतिमाह बीस लाख की अवैध कमाई को लेकर वर्चस्व की लड़ाई काफी दिनों से चली आ रही है. इसी लड़ाई के तहत नक्सली परचा चिपकाये जाने की भी बात आ रही है. वर्चस्व की लड़ाई को लेकर ही गिट्टी अनलोडिंग ठेकेदार धर्मेंद्र कुमार की हत्या 11 नवंबर 2015 को कर दी गई. 18 अगस्त 2015 को कांटी स्टेशन टोला माेहल्ला में अपराधियों ने घूम-घूम कर गोलियां चलायी थी. सूत्रों की मानें तो इस कमाई में कई

अधिकारियों, दबंगों व राजनीतिज्ञों के बीच पैसे बंटवारे की बात बताई जा रही है. नारायणपुर स्टेशन पर अधिक लाेडिंग के कारण निर्माण एजेंसियों को गिट्टी का रैक कांटी में उतरवाना पड़ रहा है. सड़क निर्माण कंपनी के बड़े ठेकेदार सिंह कंस्ट्रक्शन के मालिक शैलेश सिंह ने बताया कि एक रैक गिट्टी कांटी रैक प्वाइंट पर उतरवाने पर नारायणपुर से एक लाख 12 हजार रुपये अधिक खर्च आता है. नारायणपुर में गिट्टी, सीमेंट, खाद,

नमक सहित कई चीजों का रैक आता है. इसके कारण हमेशा वहां जगह का अभाव रहता है. इस मजबूरी में ठेकेदार कांटी में रैक प्वाइंट पर ही सामान मंगवाते हैं. खासकर गिट्टी के रैक को लेकर वहां काफी कठिनाइया होती है. नारायणपुर रैक प्वाइंट पर प्रति बैगन मजदूर को गिट्टी अनलोड करने के लिए सोलह सौ रुपये देना पड़ता है. जबकि कांटी में पैंतालीस सौ रुपये एक रैक में 42 बैगन होता है. इसी प्रकार कई खर्च है. जिसमें विभाग से लेकर दबंग व सफेद पोश शामिल है. एक खर्च नारायणपुर में पांच सौ रुपये, कांटी में तीन हजार वही नारायणपुर में जो खर्च पंद्रह सौ रुपये वह कांटी में दस हजार है. रैक का गिट्टी उतारने की जगह का प्रति रैक छह हजार. एक और खर्च है, जो नारायणपुर में नहीं लगता है. लेकिन कांटी में प्रति रैक पांच हजार लगता है. गिट्टी से धूल नहीं उड़े इसे लेकर चार हजार रुपये पानी से पटाने के लिए लगता है. लेकिन पानी पटाया नहीं जाता है. इस अवैध कमाई को लेकर वर्षों से वहां गुटबाजी चल रही है. बीच-बीच में गोलियां चलती रहती हैं. मारपीट व वर्चस्व की लड़ाई चलती आ रही है, लेकिन स्थानीय पुलिस इसमें कोई ठोस कदम नहीं उठाती है, जिससे यह वर्चस्व की लड़ाई लगातार बढ़ती जा रही है, जो एक दिन खूनी संघर्ष का रूप ले सकती है.

हर माह बीस लाख की होती है अवैध कमाई
बंटवारे को लेकर होती रही है वर्चस्व की लड़ाई
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