बीआरए बिहार विवि में करोड़ों की हेराफेरी

मुजफ्फरपुर : छात्रों के हित से जुड़े अपने कारनामों से चर्चा बटोरने वाला बिहार विवि फिर चर्चा में है. अब बिहार विवि से करोड़ों रुपये की हेराफेरी और बहाली से जुड़ी बेहद गोपनीय 23 फाइलें गायब हैं. इनमें बहाली, कॉलेजों की मान्यता शिक्षकों की पदोन्नति और रिसर्च प्रोजेक्ट से जुड़ी गोपनीय फाइलें शामिल हैं. इस […]

By Prabhat Khabar Digital Desk |
मुजफ्फरपुर : छात्रों के हित से जुड़े अपने कारनामों से चर्चा बटोरने वाला बिहार विवि फिर चर्चा में है. अब बिहार विवि से करोड़ों रुपये की हेराफेरी और बहाली से जुड़ी बेहद गोपनीय 23 फाइलें गायब हैं. इनमें बहाली, कॉलेजों की मान्यता शिक्षकों की पदोन्नति और रिसर्च प्रोजेक्ट से जुड़ी गोपनीय फाइलें शामिल हैं. इस फाइल के गायब होने से बिहार विवि की कार्यशैली सवालों के घेरे में आ गयी है. इसका खुलासा महालेखाकार की ऑडिट रिपोर्ट 2016 से हुआ है. फाइल गायब होने की खबर से अधिकारियों की बेचैनी बढ़ गयी है. संचिकाओं की खोजबीन शुरू कर दी गयी है.
ऑडिट अधिकारियों के अनुसार, संचिका गायब होने के कारण जांच के समय 23 अभिलेख सीएजी के अधिकारियों को विवि ने उपलब्ध नहीं कराये. इस कारण उन अभिलेखों की जांच नहीं हो पायी. सीएजी को कागजात उपलब्ध नहीं कराये जाने के बाद गतिविधियां और संदिग्ध होती जा रही हैं.
महालेखाकार को जो अभिलेख उपलब्ध नहीं कराये गये हैं, उनमें महालेखाकार बिहार के पूर्व निरीक्षण प्रतिवेदन का अनुपालन प्रतिवेदन, विवि का 2006 से 2015 तक का वार्षिक प्रतिवेदन, हेल्थ सेंटर से संबंधित अभिलेख, रिसर्च प्रोजेक्ट फाइल व रिकॉर्ड, रिसर्च स्कॉलरशिप फाइल, कंफिडेंशियल प्रिंटिंग से संबंधित अभिलेख, शिक्षक-शिक्षकेत्तर कर्मचारियों की पदोन्नति से संबंधित अभिलेख, संविदा के आधार पर नियुक्ति एवं आउटसोर्सिंग से संबंधित अभिलेख, वेलफेयर से संबंधित अभिलेख, टेबुलेशन रिकॉर्ड, सेमिनार से संबंधित अभिलेख, परीक्षा केंद्र निर्धारण का अभिलेख, बैंक रिकैंसिलेशल स्टेटमेंट, टेबुलेटर नियुक्ति का अभिलेख, फॉर्म बिक्री का अभिलेख, अफिलिएशन से संबंधित अभिलेख, भवन व ब्लॉक मरम्मत का अभिलेख, एलडीसी नियुक्ति की फाइल, जनरल फंड व सैलरी सहित अन्य खर्च का वाउचर, फर्नीचर व कंप्यूटर खरीद की फाइल, किराया से संबंधित रिकॉर्ड व हॉस्टल फंड से होने वाले आय का रिकॉर्ड नहीं दिखाया गया.
महालेखाकार ने सरकार को रिपोर्ट भेजते हुए बिहार विवि से भी जवाब देने को कहा है. सीएजी का कहना विवि में एक साथ इतनी संचिकाओं का नहीं मिलना बेहद गंभीर मामला है.
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