मुजफ्फरपुर : चार वर्षों बाद छठ के मौके पर घर आये जीरोमाइल के प्रफुल्ल कुमार का सपना पूरा हुआ है. छठ में घर आने की खुशी उनके चेहरे पर दिख रही है. अटलांटा में सॉफ्ट इंजीनियर
प्रफुल्ल पिछले तीन वर्षों से छठ पर घर आने का प्लान बना रहे थे,
लेकिन उन्हें छुट्टियां नहींं मिल रही थी. इस बार उन्हें छुट्टियां मिली तो ऐसा लगा उनकी मुराद द्य
पूरी हो गयी हो. पत्नी प्रीति व बेटे के साथ घर आये प्रफुल्ल कहते हैं कि मां छठ करती हैं.
अटलांटा से आये घर
पर्व पर घर आने की खुशी, अब पूजा में सहयोग की तैयारी
छठ पर घर नहीं आने का रहता था मलाल
हर वर्ष छठ के मौके पर घर नहीं आने का मलाल रहता था. उस दिन मां के अलावा परिवार में सबसे बातें होती थी. लेकिन ऐसा लगता था कि कुछ छूट गया हो. मन छठ की सामग्री की तैयारी, छठ घाट, अर्घ व पूजा में ही लगा रहता. दिन भर उदासी छायी रहती थी. लेकिन इस बार मैं काफी खुश हूं. तीन वर्षां के प्रयास के बाद इस बार छठ के लिए मुझे छुट्टी मिली है. प्रफुल्ल बताते हैं कि छठ हमारी आस्था से जुड़ा है. यह हमारे संस्कार में है. बचपन से ही छठ की महिमा देखता व सुनता रहा हूं.
ऐसे में इस पूजा से दूर रहना मेरे लिए संभव नहीं है. नौकरी की विवशता के कारण मैं यहां नहीं आ पा रहा था. लेकिन मन से मैं यहीं होता था. प्रफुल्ल ने कहा कि मेरा डेढ़ वर्ष का बेटा पहली बार अपने घर आया है. वह पहली बार यहां छठ की पूजा देखेगा व अपने संस्कारों से परिचित होगा.