पोते गया के कंधों पर चार बहनों की शादी की बड़ी जिम्मेवारी
मीनापुर : मुनिया के निधन के बाद पोते गया कुमार पर परिवार की जिम्मेवारी बढ़ गयी है. बड़ी बहन रिंकू का तो चंदे से हाथ पीला हुआ था. लेकिन बाकी चार बहनों की डोली कैसे उठेगी, यह चिंता उन्हें सताने लगी है. गया बनारस में दिहाड़ी मजदूरी का काम करता था. दादी की बीमार होने […]
ByPrabhat Khabar Digital Desk|
मीनापुर : मुनिया के निधन के बाद पोते गया कुमार पर परिवार की जिम्मेवारी बढ़ गयी है. बड़ी बहन रिंकू का तो चंदे से हाथ पीला हुआ था. लेकिन बाकी चार बहनों की डोली कैसे उठेगी, यह चिंता उन्हें सताने लगी है. गया बनारस में दिहाड़ी मजदूरी का काम करता था. दादी की बीमार होने की सूचना पर वह वापस चला आया. वह मामा के साथ जीरोमाइल में राजमिस्त्री के साथ मजदूरी का काम करता है. सन आॅफ मल्लाह मुकेश सहनी की ओर मुनिया के परिजनों को पांच हजार रुपये की आर्थिक सहायता मिलनी शुरू हो गयी है.
स्कूली बच्चों ने चिता के लिए जुटाया गोइठा व जलावन
महदेइया. बागमती पुरानी धारा के किनारे मुनिया का दाह संस्कार में उन बच्चों को भी देखा गया, जिन्हें उस टाइम में स्कूल में होना चाहिए. वे स्कूली पोशाक में मुनिया के लिए जलावन ढो रहे थे. वह शायरा पर गोइठा डाल रहे थे. लेकिन श्मशान में वैसे चेहरे नजर नहीं आ रहे थे, जो इनके नाम पर जिला, राज्य व देश में राजनीतिक रोटी सेकते हैं. सोशल मीडिया में बड़ी-बड़ी बातें करनेवाले लोगों की भी हकीकत सामने आयी है.
परिजनों को आज तक नसीब नहीं हुई एक अदद चौकी
फूस के घर में गुजर बसर करने वाली मुनिया अब इस दुनिया में नहीं है. लेकिन अब भी उसकी दर्द भरी कहानी टीस देती है. तत्कालीन सांसद कैप्टन जयनारायण प्रसाद निषाद की ओर से दिया गया गैस सिलेंडर व चूल्हा आज भी मुंह चिढ़ा रहा है. वह घर के कोने में पड़ा है. बदलते दौर में जहां लोग चांद पर पहुंच रहे हैं. लेकिन अमर शहीद जुब्बा की पतोहू मुनिया के घर में आज एक चौकी तक नसीब नहीं हुआ. उसके घर के लोग आज भी चटाई पर सोते हैं. बारिश के दिनोे मेे बांस का मचान बनाया था. वह भी टूट गया. डेढ़ दशक पहले इंदिरा आवास के पैसे बिचौलिया गटक गये. केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री बनने के बाद डॉ रघुवंश प्रसाद सिंह जब गांव पहुंचे तो उनसे मुनिया का दर्द नहीं देखा गया. उन्होंने अपने मद से स्नानगार बनवाया. आज भी मुनिया का परिवार स्नानगार में ही रहती है.
टाइमलाइन
6 बजे: मुनिया का निधन
7 बजे: मुखिया और ग्रामीण जुटे
8 बजे: बीडीओ के साथ अधिकारी पहुंचे
10 बजे: विधायक मुन्ना यादव पहुंचे
11 बजे : पार्थिव शरीर श्मशान के लिए चला
1 बजे: शव को मुखाग्नि दी गयी
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