पुत्र की मौत से टूट चुकी सुधा के जीने का सहारा भी अपराधियों ने छीना
मुजफ्फरपुर/गायघाट : गायघाट का कमरथू गांव. ये रामनाथ सिंह का मकान है. जली झाेंपड़ी के मलबे के बीच दरवाजे पर बरतन पड़ी थी. तपिश भरी गरमी में गांव के मुखिया वीरन राम, ग्रामीण मुकेश कुमार सिंह, राकेश कुमार सिंह पहुंचे. लेकिन, सबकुछ लुटा कर बैठी सुधा देवी बिलख-बिलख कर रोने लगी. उसे सभी लोग चुप […]
ByPrabhat Khabar Digital Desk|
मुजफ्फरपुर/गायघाट : गायघाट का कमरथू गांव. ये रामनाथ सिंह का मकान है. जली झाेंपड़ी के मलबे के बीच दरवाजे पर बरतन पड़ी थी. तपिश भरी गरमी में गांव के मुखिया वीरन राम, ग्रामीण मुकेश कुमार सिंह, राकेश कुमार सिंह पहुंचे. लेकिन, सबकुछ लुटा कर बैठी सुधा देवी बिलख-बिलख कर रोने लगी. उसे सभी लोग चुप करा रहे थे, लेकिन उसके आंसू थम नहीं रहे थे.
उसका सबकुछ एक माह में छिन गया. उसकी हालत पर वहां मौजूद सभी लोगों की आंखों में आंसू भर आये. सुधा देवी के घर पर आये उनके भैंसुर ब्रज किशोर सिंह व ग्रामीण मनोज सिंह भी अपने आंसुओं को नहीं रोक सके. 13 अप्रैल की रात अज्ञात लोगों ने रामनाथ सिंह का मकान व झोंपड़ी में आग लगा दी थी.
सुधा बताती हैं कि उसका एकमात्र पुत्र सुशील घर का सहारा था. उसी पर घर का सारा दारोमदार था. वह नोएडा स्थित एक प्राइवेट कंपनी में नौकरी कर रहा था. 14 फरवरी, 2017 को नोएडा में एक सड़क दुर्घटना में उसकी मौत हो गयी. सुधा के पति रामनाथ सिंह अभी नोएडा में ही हैं. इस सदमे से वह उबर भी नहीं पायी थी कि 13 अप्रैल की रात उसका घर फूंक दिया गया. झोंपड़ी में रखे जीने के तमाम संसाधन स्वाहा हो गये. उसकी भैंस भी झुलस गयी. उसके इलाज के लिए पैसे नहीं हैं. पुत्र की मौत के बाद भैंस ही आय का स्रोत है.
सुधा देवी बताती हैं कि सुशील की कमाई से ही छत का घर बना. बेटी ममता व रूपा की शादी हुई. प्रियंका व पल्लवी पढ़ाई कर रही थी. सुशील दूसरी संतान था. सुशील ने हादसे से कुछ दिन पूर्व बहनों की परीक्षा के खर्च के लिए 20 हजार रुपये घर पर भेजा था. प्रियंका व पल्लवी ने इंटरमीडिएट व मैट्रिक की परीक्षा दी थी. भाई को याद कर दोनों बहनों के आंसू बहने लगते हैं. परिवार के आय का स्रोत एकमात्र भैंस, जो झोंपड़ी में बंधी थी, वह आग से झुलस गयी. आगजनी में अनाज, बरतन, कपड़ा,
सिंचाई पाइप सब स्वाहा हो गया. घर के पास पुलिया के नीचे महिला की तसवीर, रुमाल व मोबाइल नंबर फेंका हुआ था. यहां पर दो वर्ष पूर्व ही घर बनाने की प्रक्रिया शुरू हुई थी. अर्धनिर्मित होने के कारण यह खाली पड़ा है. घटनावाले दिन तड़के सुबह करीब साढ़े तीन बजे परिवार के सभी लोग एक साथ सोये हुए थे. आग की गरमी से नींद खुली. अन्यथा सभी लोग जल जाते. यहां दो बाइक पर सवार चार लोगों को देखा गया था.
फौजी का पुत्र दालान में सोया था, तभी लगायी आग
रिटायर्ड फौजी शिव नरेश सिंह का दालान एकांत में है. यहां पर दूसरे घर करीब चार मीटर की दूरी पर हैं. इनका दालान गत तीन अप्रैल को फूंका गया था. घटना सुबह करीब 4.15 बजे की है. दौनी से आकर थका मांदा उनका पुत्र संतोष कुमार दालान में सो रहा था. घर के पीछे से आग लगा दी गयी. आग लगते ही सभी गायें एक साथ हुंकार भरने लगीं. नरेश राम नाम के व्यक्ति ने देखा, तो इनका घर जल रहा था. शिव नरेश सिंह बताते हैं कि इस घर में डीजल, प्लास्टिक पाइप, ट्रैक्टर, गेहूं, मसूर, भूसा सभी चीजें दालान में थीं. संयोग था डीजल के ड्राम में आग नहीं पकड़ी. यहां भी फोटो, मोबाइल व रुमाल पुलिया के पास बरामद हुआ था.
वर्षों पुराने दालान को फूंका जले लाखों के सामान
28 मार्च, 2017 की रात सुरेश सिंह के दालान को फूंक दिया गया था. आग पूरब कोना से लगायी गयी थी. घटना तड़के सुबह करीब 3.45 बजे की है. इसमें रखे ग्राम समिति का बरतन, तोरी, चावल, मसूर व खेसारी भी स्वाहा हो गये. यहां भी घर के पीछे से पेट्रोल की बोतल, लाल रुमाल व महिला की तसवीर बरामद हुई थी. इनका घर एकदम सुनसान बागीचे में है. सुरेश सिंह बताते हैं कि बदमाशों ने बागीचे को पिकनिक स्पॉट बना रखा है. रात में इनकी आवाजाही लगी रहती है. जिस वक्त आग लगी थी, उस वक्त बगल के दालान में कई गायें बंधी थीं. वे जलने से बच गयीं. इसके बाद थाने में प्राथमिकी के लिए आवेदन दिया.
इसमें फोटो पहचान के आधार पर महिला को लोगों ने उसके घर से पकड़ कर पंचायत के हवाले किया. उसने अपनी संलिप्तता स्वीकार करते हुए जुर्माना के रूप में 50 हजार रुपये देने का वादा किया, लेकिन सुरेश सिंह के नुकसान की भरपाई नहीं हुई.
लोगों की मौजूदगी में मुखिया के दरवाजे की थी फायरिंग
मुखिया वीरन राम बताते हैं कि लगातार हो रही आगजनी की घटनाओं के संबंध में पंचायत के लोगों के साथ 12 अप्रैल, 2017 की रात आम के पेड़ के नीचे रात करीब 10.45 बजे बैठक कर रहे थे. बैठक के बाद लोग अपने-अपने घर के लिए चले गये. पड़ोस के हिरावन राम, नरेश राम, शैलेंद्र महतो, सीताराम राम दरवाजे पर थे. तभी कमरथू-लोमा सड़क से उतर कर दो महिला व दो पुरुष दो बाइक से दरवाजे पर आये. मुखिया-मुखिया कह कर राकेश उर्फ राहुल नाम का व्यक्ति खोजने लगे. चंद्रिका राय ने मुखिया की ओर इशारा किया. पकड़ने के लिए दौड़े, तो उजली अपाचे बाइक पर पीछे बैठा युवक फायरिंग करते हुए भाग गये.
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