बुद्ध पूर्णिमा आज, शक्कर, घी और तिल से करें भगवान विष्णु की पूजा

मुजफ्फरपुर : वैशाख महीने की पूर्णिमा को बुद्ध पूर्णिमा या बुद्ध जयंती के रूप में जाना जाता है. बुद्ध पूर्णिमा बौद्ध धर्मावलंबियों के लिए सबसे बड़ा त्योहार है. यह पर्व महात्मा बुद्ध के जन्मदिवस के रूप में मनाया जाता है. इस दिन श्रद्धालु महात्मा बुद्ध की शिक्षा, उनके कार्यों व उनके व्यक्तित्व को याद कर […]

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मुजफ्फरपुर : वैशाख महीने की पूर्णिमा को बुद्ध पूर्णिमा या बुद्ध जयंती के रूप में जाना जाता है. बुद्ध पूर्णिमा बौद्ध धर्मावलंबियों के लिए सबसे बड़ा त्योहार है. यह पर्व महात्मा बुद्ध के जन्मदिवस के रूप में मनाया जाता है. इस दिन श्रद्धालु महात्मा बुद्ध की शिक्षा, उनके कार्यों व उनके व्यक्तित्व को याद कर उनके प्रति अपनी श्रद्धा प्रकट करते हैं और उनके द्वारा बताये गये रास्ते पर चलने का संकल्प लेते हैं.

वहीं हिंदू धर्मावलंबियों का मानना है कि महात्मा बुद्ध विष्णु भगवान के नौवें अवतार है. ऐसे में यह हिंदुओं के लिए पवित्र दिन माना जाता है. इस दिन भगवान विष्णु की पूजा- अर्चना की जाती है. मान्यता है कि घी, तिल व शक्कर से भगवान विष्णु की पूजा करने से सभी तरह के कष्ट दूर होते हैं.

वैशाख महीने की पूर्णिमा को सूर्य अपनी उच्च राशि मेष में होता है और चन्द्रमा भी अपनी उच्च राशि तुला में होता है. ऐसे शुभ मुहूर्त में पवित्र जल से स्नान करने से कई जन्मों के पापों का नाश हो जाता है.
दान का है विशेष महत्व
बुद्ध पूर्णिमा के दिन पूजा- पाठ करने के साथ ही दान देने का भी विशेष महत्व है. इस दिन सत्तू, मिष्ठान, जलपात्र, भोजन व वस्त्र दान करने और पितरों का तर्पण करने से पुण्य की प्राप्ति होती है. वैशाख पूर्णिमा या बुद्ध जयंती के दिन प्रात: पवित्र नदी या सरोवर में स्नान करना चाहिए. यदि पवित्र नदी में स्नान करना संभव न हो तो शुद्ध जल में गंगाजल मिला कर स्नान करें. प्रात: स्नान के बाद पूरे दिन का व्रत रखने का संकल्प लें. पूरे विधि- विधान से भगवान विष्णु की पूजा करें. प्रसाद के रूप में चूरमें का भोग लगाएं. पूजा सम्पन्न होने के बाद सभी को प्रसाद ग्रहण करने के लिए दें और अपने सामर्थ्य अनुसार गरीबों को दान दें.
रात में करें चंद्रमा का पूजन
बुद्ध पूर्णिमा के दिन रात में भी पूजन का विशेष महत्व है. रात के समय फूल, धूप, गुड़, दीप, अन्न आदि से पूरी विधि – विधान से चंद्रमा की पूजा करें.
ऐसे करें पूजा
पूर्णिमा के दिन सबसे पहले भगवान विष्णु की प्रतिमा के सामने घी से भरा हुआ पात्र, तिल व शक्कर स्थापित करें.
पूजा वाले दीपक में तिल का तेल डाल कर जलाना चाहिए. तिल के तेल का दीया जलाना अत्यंत शुभ माना जाता है.
अपने पितरों की तृप्ति के लिए व उनका आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए पवित्र नदी में स्नान करके हाथ में तिल रखकर तर्पण करें.
बोधिवृक्ष की शाखाओं को हार व रंगीन पताकाओं से सजाकर उसकी पूजा करें. उसकी जड़ों में दूध व सुगंधित पानी डाले और बोधिवृक्ष के आस- पास दीपक जलाएं.
इस दिन पक्षियों को पिजड़े से मुक्त कर आकाश में छोड़ा जाता है.
पूर्णिमा के दिन दान में गरीबों को वस्त्र, भोजन दें. ऐसा करने से गोदान के समान फल प्राप्त होता है.
पूर्णिमा के दिन तिल व शहद दान करने से व्यक्ति पापों से मुक्त होता है.
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