सरकारी काम-काज से मिले छुट्टी, तब तो हो पढ़ाई
शिक्षा से छल. परीक्षा, ट्रेनिंग, बैठकों से पढ़ाई हो रही बाधित... हाल शहर के एसएस गर्ल्स प्लस टू हाइस्कूल का लगभग ढाई हजार छात्राएं पढ़ती हैं इस स्कूल में बिहारशरीफ : शहर के प्रमुख विद्यालयों में सुमार एसएस बालिका प्लस-टू विद्यालय बिहारशरीफ में मंगलवार की दोपहर पहुंचने पर पूरे कैंपस में सन्नाटा नजर आया. विद्यालय […]
शिक्षा से छल. परीक्षा, ट्रेनिंग, बैठकों से पढ़ाई हो रही बाधित
हाल शहर के एसएस गर्ल्स प्लस टू हाइस्कूल का
लगभग ढाई हजार छात्राएं पढ़ती हैं इस स्कूल में
बिहारशरीफ : शहर के प्रमुख विद्यालयों में सुमार एसएस बालिका प्लस-टू विद्यालय बिहारशरीफ में मंगलवार की दोपहर पहुंचने पर पूरे कैंपस में सन्नाटा नजर आया. विद्यालय के भवनों के बरामदे में दो तरफ कुछ पुलिस के जवान तथा कार्यालय के बाहर महिला आदेशपाल बेंच पर बैठी नजर आयी. विद्यालय के अधिक कमरों में ताले लगे थे. एक कमरे में कुछ बच्चे परीक्षा दे रहे थे. पता चला विद्यालय में इंटरमीडिएट कंपार्टमेंटल परीक्षा का केंद्र बनाया गया है.
इसलिए 13 जुलाई तक विद्यालय में पठन पाठन स्थगित कर दिया गया है. प्रधानाध्यापिका तथा लिपिक अपने अपने कक्ष में मौजूद थे. प्रधानाध्यापिका कुमारी सुशीला सरकार ने बताया कि परीक्षा समाप्त होने के उपरांत ही विद्यालय में पठन पाठन की शुरुआत होगी. छात्राओं को पूर्व में ही इसकी सूचना दे दी गयी थी. विद्यालय में लगभग ढाई हजार छात्राएं नामांकित हैं.
सरकारी काम काज से विद्यालय का पठन-पाठन प्रभावित:एसएस बालिका विद्यालय के शहर के ह्दय स्थली में अवस्थित होने के कारण अकसर जिले के अधिकांश सरकारी काम काज यहां संपादित होते हैं. साल भर में यहां कई बार विभिन्न मौकों पर पुलिस तथा अर्द्धसैनिक बलों का ठहराव, प्रशिक्षण कार्यक्रम, प्रतियोगिता परीक्षाओं का आयोजन शिक्षा विभाग की बैठकें, मैट्रिक -इंटरमीडिएट के परीक्षा केंद्र आदि बनाये जाने से कम ही दिन यहां पढ़ाई संभव हो पाती है. सरकारी काम काज से इनकार भी नहीं किया जा सकता है.
ढाई हजार छात्राएं नामांकित हैं विद्यालय में: जिले के प्रमुख बालिका विद्यालय होने के कारण यहां जिले भर की छात्राएं मैट्रिक तथा इंटरमीडिएट की पढ़ाई करती हैं. वर्तमान में विद्यालय के नवम वर्ग में 1078 छात्राओं का नामांकन हो चुका है. दशम वर्ग में भी 1078 छात्राएं मौजूद हैं. इंटरमीडिएट कक्षाओं में भी लगभग 350 छात्राएं नामांकित है. ऐसे में किसी न किसी कारण से विद्यालय के बंद होने से छात्राओं की पढ़ाई में बाधा आ रही है.
शिक्षकों तथा कमरों की भी है कमी: विद्यालय के माध्यमिक कक्षाओं के लिए यहां शिक्षकों के कुल 22 पद स्वीकृत है. वर्तमान में विद्यालय में महज 15 शिक्षक ही नियुक्त हैं. इस प्रकार विद्यालय में छात्र शिक्षक का अनुपात 72:1 है, जो विभागीय निर्देशों की अपेक्षा काफी अधिक है. विद्यालयों में 40 विद्यार्थियों पर एक शिक्षक होना चाहिए. विद्यालय का भवन अच्छा है, लेकिन लगभग ढाई हजार छात्राओं के लिए ये कमरे कम ही पड़ जाते हैं.
बुनियादी सुविधाएं सामान्य: विद्यालय में पेयजल की समुचित व्यवस्था नजर आती है. लेकिन दूसरी ओर शौचालय पर्याप्त संख्या में नहीं है. यहां बनाये गये छह शौचालय में से महज दो शौचालय ही उपयोगी है. शेष चार शौचालय जर्जर अवस्था में है. इससे विद्यालय के छात्राओं तथा शिक्षकों को काफी कठिनाई होती है. इसी प्रकार विद्यालय में छात्राओं के हिसाब से उपस्कर भी पर्याप्त नहीं है.
प्रयोगशाला की समुचित व्यवस्था नहीं: विद्यालय में प्रयोगशाला कक्ष अवश्य है तथा यहां उपकरण भी मौजूद है. लेकिन कई जरूरी चीजों के अभाव में उपकरण धूल फांक रहे हैं. केमेस्ट्री लैब में केमिकल नहीं तो बॉटनी तथा जुलोजी लैब में संरक्षित पौधे तथा जंतु उपलब्ध नहीं है. भौतिकी विभाग में भी कमोबेश यहीं स्थिति है. कहा जाये तो विद्यालय की लगभग ढाई हजार छात्राएं प्रैक्टिकल सुविधा से वंचित हो रही हैं.
