मत्स्य उत्पादन में आत्मनिर्भर होंगे मछलीपालक

बाहर से जीरा नहीं मंगाना पड़ेगा बहुत जल्द ही दो नयी मत्स्य बीज हैचरी का होगा निर्माण बिहारशरीफ : मत्स्य उत्पादन में जिले के मछलीपालक बहुत जल्द ही आत्मनिर्भर हो जायेंगे. मछली पालकों को अब बाहर से मछली उत्पादन के लिए जीरा नहीं आयात करना पड़ेगा. बहुत जल्द ही जिले में दो नये मत्स्य बीज […]

By Prabhat Khabar Digital Desk | August 17, 2016 5:46 AM
बाहर से जीरा नहीं मंगाना पड़ेगा
बहुत जल्द ही दो नयी मत्स्य बीज हैचरी का होगा निर्माण
बिहारशरीफ : मत्स्य उत्पादन में जिले के मछलीपालक बहुत जल्द ही आत्मनिर्भर हो जायेंगे. मछली पालकों को अब बाहर से मछली उत्पादन के लिए जीरा नहीं आयात करना पड़ेगा. बहुत जल्द ही जिले में दो नये मत्स्य बीज हैजरी का निर्माण कार्य पूरा हो जायेगा. इस तरह मत्स्य पालकों को जीरा लाने में अतिरिक्त खर्च का वहन नहीं करना होगा. इससे उन्हें आर्थिक बचत के साथ ही समय की भी बचत होगी. जिले में मछली व्यवसाय को बढ़ावा देने के लिए विभाग ने ठोस कदम उठाया है. जिले में बहुत पैमाने पर मछली उत्पादन करने की योजना है. इससे इच्छुक किसान लाभ उठा सकते हैं.
अभी जिले में हैं पांच हैचरी : नालंदा जिले में अभी कुल पांच हैचरी हैं. इन हैचरी में हर महीनों बड़े पैमाने पर मछली का उत्पादन हो रहा है. लोकल मछली का उत्पादन होने से इसकी खपत भी अधिक है. स्थानीय लोग लोकल मछली ही ज्यादा पसंद करते हैं. साथ ही मछली उत्पादकों को उत्पादन की बिक्री करने के लिए बाहर नहीं जाना पड़ता है. इन हैचरी से हर माह अच्छी खासी मछली का उत्पादन हो रहा है. इससे मत्स्य पालकों की भी अच्छी खासी कमाई हो रही है.
यहां हो रहा नये हैचरी का निर्माण : मत्स्यपालकों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से जिले में दो नये हैचरी भी बनाये जा रहे हैं. ताकी अधिक-से-अधिक मछली का उत्पादन जिले में हो सके और मछली उत्पादन में जिला पूरी तरह आत्मनिर्भर बन सके.
जिले के रहुई प्रखंड के पेशौर में व हिलसा प्रखंड के गजेंद्र बिगहा गांव में नये हैचरी बनाये जा रहे हैं. उक्त हैचरी की भी क्षमता8.10 मिलियन ही होगी. इन दो नये हैचरी बन जाने से जिले में इसकी संख्या पांच से बढ़ कर सात हो जायेगी. इससे मछली उत्पादकों को बाहर के हैचरी पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा. उन्हें यहीं से मछली का जीरा भी उपलब्ध हो जायेगा. इस तरह मछली उत्पादन कर किसान अपनी आर्थिक स्थिति भी मजबूत कर पायेंगे और मछली उत्पादन में आत्मनिर्भर भी बन जायेंगे. यह व्यवसाय धीरे-धीरे उद्योग का भी रूप ले लेगा.
क्या कहते हैं अधिकारी
जिले में मछली उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए दो नये हैचरी बनाये जा रहे हैं. इससे मछली पालक मछली का उत्पादन कर अच्छी आमदनी कर पायेंगे. उन्हें मछली के जीरे लाने के लिए भी बाहर नहीं जाना पड़ेगा.
अशोक कुमार सिन्हा,जिला मत्स्य पदाधिकारी,नालंदा

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