बेल बांड देने में असक्षम कैदियों को रिहाई का निर्देश
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सुनवाई. कैदियों की सुनवाई में रुचि नहीं रखने वाले विधिक प्राधिकार प्रदत्त अधिवक्ताओं पर होगी कार्रवाई
मानसिक रूप से विक्षिप्त कैदियों पर हो कार्रवाई
बिहारशरीफ : जिला विधिक सेवा प्राधिकार अध्यक्ष सह जज जितेन्द्र कुमार के आदेशानुसार पीठासीन पदाधिकारी सह मुंसफ व जेएम विमलेन्दु कुमार व मानवेन्द्र मिश्र की अध्यक्षता में जिला कारागार में लोक अदालत आयोजित की गयी. लोक अदालत के दौरान जेल पैनल अधिवक्ता प्रमोद कुमार ने भी उपस्थित होकर सहयोग किया. इसके तहत जेएम व मुंसफ ने कैदियों की समसयाएं भी सुनी. जिसके तहत कुछ कैदी ऐसे थे, जो कोर्ट से जमानत मिलने के बावजूद निर्धनता या अन्य कारणों से बंधपत्र नहीं भर पाने के कारण रिहा नहीं हो पाये हैं. इन्हें प्रावधानों की प्रक्रिया पूरी कर रिहा करने के लिए कार्रवाई करने का निर्देश दिया. जेएम मानवेंद्र मिश्र ने बताया कि सीआरपीसी की धारा 436 ए के तहत कोर्ट में आवेदन देकर पीआर बांड इन्हें रिहा करने की शीघ्र व्यवस्था की जाये.
क्या है प्रावधान:
जब किसी कैदी का कोर्ट से जमानत आदेश मिल जाता है, परंतु वह कोर्ट के आदेश से बंधपत्र बेलर सहित निर्धनता या जमानतदार के अभाव में नहीं दे पाता है, तो वह सीआरपीसी की धारा 436 के तहत कोर्ट को अपनी स्थिति बयान करते हुए बंधपत्र जमा करने में अक्षम होने का कारण बता आवेदन देकर पीआर बांड पर कोर्ट से रिहाई करा सकता है. इसी प्रकार से कुछ मानसिक रूप से विक्षिप्त कैदियों को छोड़े जाने या उनके संबंध में अग्रतर कार्रवाई करने का जेल प्रशासन को निर्देश दिया. कैदियों ने विधिक सहायता के तहत विधिक प्राधिकार से मामले की सुनवाई के लिए प्रदत अधिवक्ताओं की सुनवाई में रुचि न लेने की शिकायत की. इन कैदियों को आश्वस्त करते हुए कहा गया कि ऐसे अधिवक्ताओं जो प्राधिकार से ऐसे मामलों में संबंधित होने का सहमति देने के बावजूद सुनवाई में नकारात्मक हैं. उनके खिलाफ सचिव सह तृतीय एडीजे को शिकायत भेज कार्रवाई करने का अनुरोध किया जायेगा. कार्यक्रम के दौरान जेल अधीक्षक तथा अन्य मौजूद थे.