पौधों में जीवित रहेंगे पूर्वज

ताजपुर गांव में नयी परंपरा की शुरुआत रोह : किसी की मृत्यु के उपरांत बरखी के दिन पीपल के पेड़ में जल अर्पण करने की परंपरा सदियों पुरानी है. इस पुरानी परंपरा से अलग हट कर प्रखंड के ताजपुर गांव के ग्रामीणों ने करने की ठानी और इसकी पहल बुधवार को समाजसेवी राजेश चौधरी के […]

By Prabhat Khabar Digital Desk |
ताजपुर गांव में नयी परंपरा की शुरुआत
रोह : किसी की मृत्यु के उपरांत बरखी के दिन पीपल के पेड़ में जल अर्पण करने की परंपरा सदियों पुरानी है. इस पुरानी परंपरा से अलग हट कर प्रखंड के ताजपुर गांव के ग्रामीणों ने करने की ठानी और इसकी पहल बुधवार को समाजसेवी राजेश चौधरी के दादा 81 वर्षीय मोती चौधरी की तेरहवीं पर शुरू की गयी. उनकी स्वाभाविक मौत 24 दिसंबर को हो गयी थी.
मृतक के परिवार के सदस्यों ने तेरहवीं को पुराने पीपल के वृक्ष में पानी देने के बजाय नये पौधे का रोपण कर उसमें जल अर्पण किया. इस मौके पर ग्रामीणों का कहना था कि इस नयी परंपरा की शुरुआत होने से गांव में वृक्ष लगाने की होड़ लगेगी. जो पर्यावरण संरक्षण में एक महत्वपूर्ण कड़ी बनेगी़ इससे न सिर्फ ग्रामीणों को शुद्ध हवा मिलेगी, बल्कि पूर्वजों की याद को वृक्ष के रूप में ताजा रखा जा सकेगा. मौके पर मृतक के पुत्र रामलखन चौधरी, उमेश चौधरी, जानकी चौधरी, मुखिया पति सरजन राम, त्रिलोकी नाथ वर्मा, आयुष कुमार, विक्रम कुमार, राकेश कुमार, मुकेश कुमार के अलावा दर्जनों गण्यमान्य ग्रामीण उपस्थित थे. लोगों का कहना था कि इस पहल से पर्यावरण काे प्रदूषित होने से बचाया जा सकता है़
जब 13वीं के दिन पीपल के पेड़ में ही पानी देने की परंपरा है, तो क्यों न हम उस दिन पीपल का नया पौधा लगा कर उसमें पानी दें़ इससे आनेवाली पीढ़ी को नयी सीख मिलेगी़ परंपरा भी नहीं टूटेगा. उसके साथ कई अन्य पौधे भी लगाये जा सकते हैं़
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