एड्स के प्रति जागरूकता ही सर्वोत्तम बचाव: सीएस
नवादा कार्यालय : विश्व एड्स दिवस पर सदर अस्पताल में एड्स के प्रति जागरूकता व रोकथाम के लिए गुरुवार को कार्यशाला आयोजित की गयी. जिला स्वास्थ्य समिति द्वारा आयोजित कार्यशाला में सिविल सर्जन डॉ श्रीनाथ प्रसाद ने कहा कि एड्स के प्रति जागरूकता ही सर्वोत्तम बचाव है.... इसके लिए चिकित्सकों को प्रत्येक गर्भवती महिलाओं को […]
नवादा कार्यालय : विश्व एड्स दिवस पर सदर अस्पताल में एड्स के प्रति जागरूकता व रोकथाम के लिए गुरुवार को कार्यशाला आयोजित की गयी. जिला स्वास्थ्य समिति द्वारा आयोजित कार्यशाला में सिविल सर्जन डॉ श्रीनाथ प्रसाद ने कहा कि एड्स के प्रति जागरूकता ही सर्वोत्तम बचाव है.
इसके लिए चिकित्सकों को प्रत्येक गर्भवती महिलाओं को एंटी नेटल चेकअप, दुर्घटनाग्रस्त मरीजों को सर्जिकल ऑपरेशन के पहले जांच करवाने के लिए प्रेरित किया गया. एचआइवी के फैलने व उससे बचाव के तरीकों पर विस्तृत चर्चा की गयी. श्री प्रसाद ने बताया कि जिला के सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर एचआइवी जांच की सुविधा उपलब्ध करा दी गयी हैं. संपुष्टित लोगों को सदर अस्पताल में जांच के बाद ही एचआइवी पॉजिटिव के रूप में चिह्नित किया जाता हैं. जिला में एचआइवी पॉजिटिव पाये गये लोगों की कुल संख्या 531 हैं. जबकि इसके लिए इलाज करनेवाले सेंटर एआरटी, गया में नामांकित लोगों की संख्या 1130 हैं. ऐसे में जिले में एचआइवी पॉजिटिव लोगों की संख्या में भयानक बढ़ोतरी दर्ज की गयी हैं. इनमें पलायन करके दूसरे प्रदेशों में रहनेवाले लोग, ट्रक ड्राइवर, सेक्स वर्कर की संख्या ज्यादा हैं.
एआरटी सेंटर के लिए बिहार राज्य एड्स नियंत्रण समिति को प्रस्ताव : जिले में तेजी से बढ़ रहे एचआइवी पॉजिटिव लोगों की संख्या को देखते हुए इसके इलाज की भी पहल तेज कर दी गयी है. ऐसे लोगों का इलाज एंटी रेट्रो वायरल थेरेपी सेंटर पर निःशुल्क दवा व परामर्श देकर किया जाता है. जिले के एचआइवी पॉजिटिव व्यक्ति अनुग्रह नारायण मेमोरियल मेडिकल कॉलेज स्थित एआरटी सेंटर से इलाज करवाते हैं. इस दौरान बड़ी संख्या में लोग लंबे अंतराल तक चलनेवाले इलाज को बीच में ही छोड़ देते हैं. तेजी से बढ़ रहे पीड़ितों को लेकर सदर अस्पताल में ही एआरटी सेंटर खोलने का प्रयास किया जा रहा हैं.
गोपनीयता बरतने पर दिया गया जोर : आइसीटीसी के काउंसेलर संजीव कुमार गुप्ता बताते है कि केंद्र पर आनेवाले प्रत्येक व्यक्ति की पहचान गोपनीय रखी जाती हैं. उनके मानव अधिकारों की गरिमा को ध्यान में रखते हुए उनको जानकारी व जरूरी उपाय उपलब्ध कराया जाता हैं. यौन संक्रमित बीमारियों (एसटीडी सेक्सुअली ट्रांसमिटेड डिजीज) व सेक्स वर्कर को भी परामर्श दिया जाता हैं. उचित उपचार व परामर्श से मरीज काफी समय तक जीवित रहते हैं.
2004 में सदर अस्पताल के आइसीटीसी में आनेवाले एचआइवी पॉजिटिव व्यक्ति आज भी अपना जीवन आसानी से बिता रहे हैं. फिर भी इसके बारे में जागरूकता जरूरी हैं. कार्यशाला में उपाधीक्षक श्री रामनंदन प्रसाद, आइसीटीसी के प्रभारी चिकित्सक डॉ विमल प्रसाद, डॉ अशोक प्रसाद, डॉ एसकेपी चक्रवर्ती, सभी प्रखंड प्रभारी चिकित्सक सहित लैब टेक्नीशियन प्रभाकर कुमार, सुनील कुमार व अन्य मौजूद थे.
