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महिला सशक्तिकरण : कानून के दम पर आजादी की सांस, कोर्ट ने दी नयी पहचान, मिले ये सारे अधिकार

दो दिन पुराना साल, दे गया महिलाओं को आजादी अनुपम कुमारी पटना : नया साल सबके लिए कुछ नयी उम्मीदें लेकर आता है तो बीते साल में पूरी हुई उम्मीदों की याद खुशी देने के साथ आत्मविश्वास भी बढ़ाता है. साल 2017 महिलाओं के लिए कुछ इसी तरह का रहा. सुरक्षा और अधिकारों के नजरिये […]

दो दिन पुराना साल, दे गया महिलाओं को आजादी
अनुपम कुमारी
पटना : नया साल सबके लिए कुछ नयी उम्मीदें लेकर आता है तो बीते साल में पूरी हुई उम्मीदों की याद खुशी देने के साथ आत्मविश्वास भी बढ़ाता है. साल 2017 महिलाओं के लिए कुछ इसी तरह का रहा. सुरक्षा और अधिकारों के नजरिये से बीते साल में महिलाएं मजबूत होकर उभरी हैं. वर्ष 2017 भले ही विदा ले चुका है, लेकिन इसे महिलाओं की सशक्तीकरण की दिशा में सौगात देने का श्रेय भी जाता है. आइए जाने वर्ष 2017 महिलाआें के लिए क्या और कैसे खास रहा.
तीन तलाक से महिलाओं को मिली आजादी: मुस्लिम महिलाओं के लिए वर्ष 2017 ऐतिहासिक वर्ष रहा. मुस्लिम समुदाय की महिलाओं को तीन तलाक वाली प्रथा से निजात मिल चुकी है. सुप्रीम कोर्ट ने इस प्रथा को कानूनी रूप से असंवैधानिक बताया. . इस फैसले से मुस्लिम महिलाओं की बड़ी जीत हुई है. बिहार की करीब एक करोड़ मुस्लिम महिला आबादी को इसका लाभ मिलेगा.
नाबालिग पत्नी से शारीरिक संबंध बनाना अपराध: दूसरी बड़ी जीत बाल-विवाह के रूप में हुई. इसके तहत बाल-विवाह कानून के मुताबिक शादी के लिए महिला की उम्र 18 साल होनी चाहिए और यदि कोई व्यक्ति अपनी नाबालिग पत्नी के साथ शारीरिक संबंध बनाते हैं, तो वह गैरकानूनी होगा.
मातृत्व अवकाश अब 26 सप्ताह: 2017 की शुरुआत में मातृत्व लाभ का संशोधन बिल पास किया गया. इसके तहत कामकाजी महिलाआें के मातृत्व अवकाश को 12 सप्ताह से बढ़ाकर 26 सप्ताह कर दिया गया है.
यह कामकाजी महिलाआें की बड़ी जीत के रूप में है. इससे महिलाएं न केवल अपने कैरियर के प्रति सजग होंगी, बल्कि अपने मातृत्व दायित्वों का भी बखूबी निर्वहन कर पायेंगी. इसके साथ ही कार्मिक प्रशिक्षण विभाग यानी डीओपीटी ने यौन शोषण की शिकार महिलाओं को तीन महीने तक की सवेतन छुट्टी या पेड लीव देने की बात कही है.
गर्भपात के लिए पति की इजाजत जरूरी नहीं: शादीशुदा महिलाओं के लिए अब अनचाहे गर्भ से निजात दिलाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने इसी वर्ष नवंबर में उनके हित में बड़ा फैसला सुनाया. इसके तहत अब कोई भी शादीशुदा महिला अनचाहे गर्भ को अपनी इच्छा से गर्भपात करा सकती है. इसके लिए अब उन्हें अपने पति से इजाजत तक लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी.
निर्भया कांड का फैसला भी बीते वर्ष की बड़ी सौगात: वर्ष 2012 के दिसंबर माह की सबसे बड़ी हृदयविदारक घटना निर्भया कांड. उस घटना ने देश भर में महिला आंदोलन को नया रूप दिया. मई 2017 में निर्भया के चार दोषियों की फांसी की सजा बरकरार रखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने उसे सदमे की सुनामी का नाम देकर महिलाओं की बड़ी जीत सुनिश्चित किया.
राइट टू प्राइवेसी का अधिकार: बीते वर्ष 24 अगस्त को ही एक और नये अधिकार ने महिलाओं को सशक्त बनाने का काम किया है. वह है राइट टू प्राइवेसी . सुप्रीम कोर्ट ने 1963 के फैसले में बदलाव करते हुए संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत शादी करने से लेकर बच्चे पैदा करने, परिवार रखने से जुड़े कई प्राइवेसी जैसे मामलों में मौलिक अधिकार प्रदान किया है. इससे अब उनके प्राइवेसी का भी ख्याल रखना सरकार और प्रशासन के जिम्मे आ गया है.
पीरियड लीव तक निजी स्तर पर हुई घोषणा
बीते वर्ष जुलाई में मुंबई स्थित एक भारतीय कंपनी कल्चरल मशीन को अपने यहां की महिला कर्मियों को पीरियड्स के पहले दिन छुट्टी देने की घोषणा करने का भी श्रेय मिला. अब तक इसका श्रेय जापान, चीन व इंडोनेशिया आदि देश को ही था.
चर्चित कैंपेन, जिसने बनाया सशक्त
‘मेरी रात मेरी सड़क’ 2017 का चर्चित कैंपेन रहा. सोशल मीडिया में इसने अच्छी जगह बनाते हुए महिलाओं को जागरूक किया. इसके तहत देर रात समूह में लड़कियां सड़कों पर निकली और अपने आत्मबल का प्रदर्शन किया. दूसरा बड़ा कैंपेन ‘मी टू’ भी रहा जो यौन शोषण के खिलाफ चलाया गया.

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