तीन करोड़ खर्च, फिर भी आवास जजर्र

पटना: प्रतिवर्ष करीब एक करोड़ का बजट खर्च होने के बावजूद रेलवे कॉलोनियों के भवन की स्थिति शर्मसार करने वाली है. भवन की मलिन दीवारें, पानी गिरने के कारण उन पर जमी मोटी कायी के अलावा टूटे हुए छज्जे, खिड़कियां व दरवाजे मरम्मत कार्य की हकीकत को बयां कर रहे हैं. प्रभात खबर ने मंगलवार […]

By Prabhat Khabar Digital Desk |

पटना: प्रतिवर्ष करीब एक करोड़ का बजट खर्च होने के बावजूद रेलवे कॉलोनियों के भवन की स्थिति शर्मसार करने वाली है. भवन की मलिन दीवारें, पानी गिरने के कारण उन पर जमी मोटी कायी के अलावा टूटे हुए छज्जे, खिड़कियां व दरवाजे मरम्मत कार्य की हकीकत को बयां कर रहे हैं. प्रभात खबर ने मंगलवार को राजेंद्र नगर रेलवे कॉलोनी के भवनों की पड़ताल की, तो घोटाले की पोल खुल गयी. सरकारी आवास के लोगों ने बताया कि पिछले तीन वर्षो से दीवारों पर रंग-रोगन तक नहीं हुआ है.

आखिर कहां हुए खर्च
रेलवे कॉलोनियों में पिछले तीन वर्षो में कराये गये मरम्मत कार्य सवालों के घेरे में हैं. बजट की बात करें, तो प्रतिवर्ष लगभग एक करोड़ की राशि खर्च होती है. अगर तीन वर्षो से मरम्मत कार्य नहीं हुए, तो तीन करोड़ का बजट आखिर कहां खर्च हुआ. 2013-14 के वित्तीय वर्ष में दो चरणों में विभाग की तरफ से रुपये आवंटित हुए हैं. पहले चरण में 55 लाख 12 हजार रुपये तथा दूसरे चरण में 54 लाख 37 हजार रुपये रिलीज हुए हैं.

प्रतिवर्ष एक करोड़ के बजट में पांच रेलवे कॉलोनियों में मरम्मत कार्य कराया जाना था. इनमें मीठापुर रेलवे कॉलोनी, आरएमएस कॉलोनी, राजेंद्र नगर कॉलोनी, लोको व इस्ट कॉलोनी शामिल हैं. लेकिन, किसी भी कॉलोनी में मरम्मत कार्य नहीं हुआ है. राजेंद्र नगर कॉलोनी की हालत यह है कि दीवारों पर लगातार पानी गिरने के कारण मोटी कायी जम गयी है. भवन जजर्र हालत में हैं. दरवाजा व खिड़की डैमेज हैं. चारों तरफ जलजमाव है. पूरी तरह से नारकीय स्थिति है.

रेलवे स्टेशन पर हुए कार्य
एक करोड़ के बजट में पटना जंकशन, राजेंद्र नगर टर्मिनल व स्टाफ बिल्डिंग में मरम्मत कार्य हुए हैं. रंगाई-पुताई से लेकर अन्य कार्य कराये गये हैं. लेकिन, रेलवे कॉलोनियों की तरफ ध्यान नहीं दिया गया. यह स्थिति तब है, जब स्टेशन की मरम्मती के लिए यात्री सुविधा के आवंटित बजट को भी खर्च किया गया है. सूत्र बताते हैं कि चूंकि स्टेशन पर आला अधिकारियों का दौरा होता रहता है, इसलिए यहां कार्य दुरुस्त रखा जाता है. वहीं कॉलोनियों में कोई नहीं पहुंचता है, इसलिए वहां लापरवाही व घोटाले का आलम है.

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