नयी दिल्ली : दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा है कि संसद की सदस्यता से जुड़े जदयू के पूर्व प्रमुख शरद यादव की याचिका पर एक खंडपीठ को सुनवाई करनी चाहिए. दरअसल, शरद यादव ने संसद की सदस्यता से उन्हें अयोग्य करार दिये जाने के राज्यसभा के सभापति के आदेश को चुनौती दी थी. राज्यसभा में जदयू के नेता राम चंद्र प्रसाद सिंह के वकील ने कहा कि यादव को अयोग्य ठहराये जाने से जुड़े विषय की सुनवाई अन्य मामलों में सुप्रीम कोर्ट की व्यवस्था के मुताबिक एक खंडपीठ द्वारा की जानी चाहिए.
न्यायमूर्ति राजीव शकधर ने कहा कि सिंह को इस सिलसिले में एक अलग याचिका दायर करनी चाहिए और इस विषय को 23 मई के लिए सूचीबद्ध कर दिया. सिंह ने वरिष्ठ अधिवक्ता दिनेश द्विवेदी के जरिये अदालत के पिछले साल 15 दिसंबर के उस आदेश में संशोधन करने की मांग की, जिसके तहत यादव को सांसद के तौर पर वेतन भत्ता और बंगला की सुविधा पाने की इजाजत दी गयी थी. यादव को पिछले साल चार दिसंबर को सदन की सदस्यता से अयोग्य करार दिया गया था. साथ ही, उनके सहकर्मी अली अनवर को भी उच्च सदन की सदस्यता के लिए अयोग्य करार दिया गया था.
इससे पहले, राज्यसभा के सभापति का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता संजय जैन ने भी इस मामले की सुनवाई एक खंडपीठ से कराने का अनुरोध किया. वहीं, यादव की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने याचिका का विरोध किया. गौरतलब है कि यादव पिछले साल राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए थे और उनका कार्यकाल जुलाई 2022 में पूरा होगा. वहीं, उनके सहकर्मी अली अनवर का कार्यकाल इस साल पूरा हो रहा है.