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चतुर्थवर्गीय कर्मियों के पद खत्म, अब ये तृतीय वर्ग में, जानें कैबिनेट के अन्‍य महत्‍वपूर्ण फैसले

पटना : अब राज्य सरकारी की नौकरियों में चतुर्थवर्गीय कर्मियों के पद समाप्त कर दिये गये हैं. अब कोई भी कर्मचारी चतुर्थवर्गीय कर्मी नहीं कहे जायेंगे.मौजूदा व्यवस्था के तहत चपरासी, आदेशपाल या अनुसेवक समेत ऐसे अन्य पद चतुर्थवर्गीय कर्मियों के वर्ग में शामिल थे. चतुर्थ वर्ग को समाप्त करने के बाद अब राज्य सरकार की […]

पटना : अब राज्य सरकारी की नौकरियों में चतुर्थवर्गीय कर्मियों के पद समाप्त कर दिये गये हैं. अब कोई भी कर्मचारी चतुर्थवर्गीय कर्मी नहीं कहे जायेंगे.मौजूदा व्यवस्था के तहत चपरासी, आदेशपाल या अनुसेवक समेत ऐसे अन्य पद चतुर्थवर्गीय कर्मियों के वर्ग में शामिल थे. चतुर्थ वर्ग को समाप्त करने के बाद अब राज्य सरकार की नौकरियों में सिर्फ तीन वर्ग या समूह बचे, जिनमें समूह क, ख और ग शामिल हैं.
मंगलवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में कैबिनेट की हुई बैठक में यह निर्णय लिया गया. बैठक के बाद कैबिनेट विभाग के प्रधान सचिव अरुण कुमार सिंह ने कहा कि इसमें कुल 20 महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर मुहर लगी.
उन्होंने कहा कि चतुर्थवर्गीय कर्मियों का वर्ग समाप्त होने के साथ-साथ उनके पद का नाम भी बदलते हुए इसे तृतीय वर्ग में शामिल कर लिया गया है. अब चपरासी, आदेशपाल और अनुसेवक के स्थान पर इन्हें कार्यालय परिचारी और परिचारी (विशिष्ट) के पदनाम से जाना और बुलाया जायेगा.
सातवें वेतनमान की अनुशंसा लागू होने के बाद से पदों का वर्गीकरण किया गया है. अब पे-ग्रेड के स्थान पर पे-लेवल या वेतन स्तर लागू हो गया है. इसके तहत समूह ग में 1 से 5 तक के वेतन स्तर, समूह-ख में 6 से 9 वेतन स्तर और समूह-क में 11 से 14 वेतन स्तर को रखा गया है. ऐसे में चतुर्थ वर्ग का कोई अस्तित्व ही नहीं रह जाता है.
इसके अलावा राज्य की विभिन्न सेवाओं या संवर्गों में वेतन स्तर के आधार पर ही टाइम बाउंड प्रोन्नति देने की प्रक्रिया पूरी की जायेगी. बिहार न्यायिक सेवा के रिटायर्ड पदाधिकारियों की पेंशन में 1 जनवरी, 2016 के प्रभाव से अंतरिम राहत दी गयी है.
इसी सेवा के पदाधिकारियों को 1 जनवरी, 2016 के प्रभाव से मूल वेतन पर 30% अंतरिम राहत देने की भी स्वीकृति दी गयी है. सातवां वेतनमान लागू होने के बाद यह नयी व्यवस्था की गयी है.चपरासी और आदेशपाल को अब कार्यालय परिचारी के पदनाम से जाना और बुलाया जायेगा
शिक्षकों के वेतन के लिए 1,436 करोड़ रुपये जारी
राज्य के प्राथमिक और मध्य विद्यालयों में राज्य सरकार के अधीन स्वीकृत पदों के लिए वित्तीय वर्ष 2018-19 के वेतन के लिए 1,436 करोड़ रुपये जारी किये गये हैं. इनमें नगर प्रारंभिक, प्रखंड और पंचायत स्तरीय शिक्षक शामिल हैं.
आईजीआईएमएस :नर्सिंग कॉलेज के फैकल्टी को एम्स के अनुरूप वेतन
पटना स्थित इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान (आईजीआईएमएस) के नर्सिंग कॉलेज के फैकल्टी को एम्स की तर्ज पर वेतनमान और अन्य सुविधाएं मिलेंगी. इस निर्णय से सरकार के खजाने पर 45 लाख रुपये सालाना का बोझ पड़ेगा.
इसके अलावा पीएमसीएच में किडनी ट्रांसप्लांट विभाग और नेफ्रोलॉजी विभाग का कार्य शुरू करने के लिए 88 नये पदों का सृजन किया गया है. इसी तरह पटना डेंटल कॉलेज एवं हॉस्पिटल में पोस्ट ग्रेजुएट की पढ़ाई शुरू करने के लिए सभी तरह के 25 शैक्षणिक और गैर शैक्षणिक पदों के सृजन की स्वीकृति दी गयी है.
अन्य महत्वपूर्ण निर्णय
किशनगंज में फिशरीज कॉलेज की स्थापना होगी. इसके लिए अकादमिक और प्रशासनिक पदों समेत सपोर्टिंग पदों का सृजन, आधारभूत संरचना का विकास और विविध कार्यों के लिए 40.31 करोड़ रुपये दिये गये
विभिन्न जिलों में 24 थाना या ओपी भवन के निर्माण के लिए 37.07 करोड़ रुपये
भोजपुर, वैशाली और बांका में इंजीनियरिंग कॉलेजों के लिए प्रति संस्थान 64 शैक्षणिक और 51 गैर शैक्षणिक यानी कुल 192 शैक्षणिक और 153 गैर शैक्षणिक पदों का सृजन
नालंदा के सरमेरा प्रखंड के प्रणावां गांव में आयोजित होने वाले बाबा महतो साहब मेले को राजकीय मेले का दर्जा भवन निर्माण विभाग में संविदा पर नियुक्त 100 असिस्टेंट इंजीनियरों (असैनिक) के नियोजन की स्वीकृति.
भवन निर्माण विभाग में नियोजित 18 जूनियर इंजीनियरों का 4 सितंबर, 2018 तक पुनर्नियोजन करने के संबंध में.पथ निर्माण विभाग में 88 जूनियर इंजीनियरों की संविदा अवधि का एक साल विस्तार बिहार राज्य सहकारी बैंक लिमिटेड को उपलब्ध करायी जाने वाली राशि पर ब्याज दर 9% से घट कर 7% की गयी, जिससे जिला केंद्रीय सहकारी बैंक को 7.25% और जिला केंद्रीय सहकारी बैंक से पैक्स या व्यापार मंडलों को 8% वार्षिक ब्याज दर पर कैश-क्रेडिट ऋण उपलब्ध कराने की स्वीकृति दी गयी.
एनएच-31 (बख्तियारपुर-खगड़िया) फोर लेन परियोजना के लिए पटना जिले के मोकामा अंचल के मरांची दियारे में 15.03 एकड़ खासमहाल की भूमि एनएचएआई को हस्तांतरण करने का आदेश जारी
बिहार सोसाइटी निबंधन नियमावली, 2018 को मंजूरी दी गयी. अब संस्थान का रजिस्ट्रेशन कराने की प्रक्रिया काफी बदल गयी है. संस्थान का ऑनलाइन निबंधन कराने के साथ ही संस्थान के दायित्व का पर्यवेक्षण और संस्था से संबंधित विवाद का निबटारा जल्द कराया जायेगा.
Prabhat Khabar Digital Desk
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