कटिहार : एनसीपी के राष्ट्रीय महासचिव व सांसद तारिक अनवर ने कहा है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपनी विश्वसनीयता खो दिये हैं. इसलिए महागठबंधन में शामिल होना उनके लिए मुश्किल है. महागठबंधन में शामिल होने के लिए सभी घटक दलों की सहमति आवश्यक है. शनिवार को राष्ट्रवादी भवन में संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए तारिक अनवर ने यह बातें कहीं.
एनसीपी सांसद ने कहा कि अभी अटकलें लगायी जा रही हैं. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की ओर से ऐसा कोई बयान सामने नहीं आया है. जब उनकी तरफ से औपचारिक रूप से कोई बयान महागठबंधन में शामिल होने को लेकर नहीं आया है. महागठबंधन में शामिल सभी दलों की सहमति के बाद ही उन्हें महागठबंधन में शामिल किया जा सकता है. केंद्र सरकार पर उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि अपने वादे के मुताबिक नरेंद्र मोदी सरकार ने कुछ नहीं किया. 2019 के चुनाव में जाने के लिए उनके पास कोई मुद्दा नहीं है. ऐसे में वह सर्जिकल स्ट्राइक जैसे मुद्दे को लेकर जाना चाहते हैं, जबकि देश में कई बार सर्जिकल स्ट्राइक हुआ है. पर, इसका पूरा श्रेय भारतीय सेना को जाता है. राजनीतिक दल सैनिक कार्रवाई का श्रेय लेने से बचें.
पिछले दिनों अपने विदेशी दौरे का जिक्र करते हुए सांसद तारिक अनवर ने कहा कि मानवाधिकार के मुद्दे को लेकर पार्लियामेंट्रियन फॉर ग्लोबल एक्शन संयुक्त राष्ट्र संघ एक इकाई है, जो मानवाधिकार आदि के मुद्दों पर काम करती है. पीजीए द्वारा आयोजित कार्यक्रम में भारतीय टीम में शामिल होकर उन्हें भी भाग लेने का मौका मिला तथा वैश्विक स्तर पर मानवाधिकार को लेकर विमर्श में भी हिस्सा लिया. वैश्विक स्तर पर मानवाधिकार व महिला सशक्तीकरण को लेकर भारत की स्थिति ठीक नहीं है. भारत में अत्यधिक मानवाधिकार हनन को लेकर विश्व चिंता कर रहा है. महिलाओं को लेकर भी भारत की स्थिति ठीक नहीं है. दुनिया में इस बात को लेकर चिंता हो रही है कि महिलाएं भारत में अधिक असुरक्षित हैं.
तारिक ने कहा कि पूर्ववर्ती यूपीए सरकार ने महिला आरक्षण बिल को राज्यसभा में पास कराया. लोकसभा में सहमति नहीं होने की वजह से वह बिल लंबित रह गया. पर, मौजूदा केंद्र सरकार चार साल में एक बार भी महिला आरक्षण बिल पर किसी तरह की चर्चा नहीं की. महिला सशक्तीकरण के लिए जरूरी है कि महिला आरक्षण बिल संसद में पास हो तथा महिलाओं को संसद और विधानमंडल में 33 प्रतिशत का आरक्षण मिले. कश्मीर के मुद्दे पर श्री अनवर ने कहा कि भाजपा और पीडीपी का पहले से ही बेमेल गठबंधन था. अचानक गठबंधन तोड़ा जाना चकित करता है. 15 दिन पहले तक बीजेपी के नेता कह रहे थे कि कश्मीर में सबकुछ ठीक-ठाक चल रहा है. पर, अचानक क्या हो गया, जिससे गठबंधन तोड़ने की नौबत आ गयी. दरअसल यह वर्ष 2019 के चुनाव की तैयारी है तथा एक बार फिर देश की जनता को ठगने के लिए यह सब कुछ किया जा रहा है. 2019 में भारत की जनता नरेंद्र मोदी सरकार को सबक सिखाएगी.