बिहार में जल्द गठित होगा ऑडिट विंग

पटना : राज्य सरकार अपनी योजनाओं और वित्तीय लेन-देने से जुड़े सभी कार्यों की दुरुस्त मॉनीटरिंग करने के लिए अलग ऑडिट विंग का गठन करने जा रही है. वित्त विभाग के अधीन गठित होने वाले इस विंग का मुख्य कार्य सभी विभागों में योजनाओं के क्रियान्वयन के साथ-साथ सरकारी लेन-देन की गहनता से जांच करना […]

By Prabhat Khabar Digital Desk | June 12, 2019 8:58 AM
पटना : राज्य सरकार अपनी योजनाओं और वित्तीय लेन-देने से जुड़े सभी कार्यों की दुरुस्त मॉनीटरिंग करने के लिए अलग ऑडिट विंग का गठन करने जा रही है. वित्त विभाग के अधीन गठित होने वाले इस विंग का मुख्य कार्य सभी विभागों में योजनाओं के क्रियान्वयन के साथ-साथ सरकारी लेन-देन की गहनता से जांच करना है.
खासकर निर्माण कार्य से जुड़ी विभागों में चलने वाली सभी योजनाओं की जांच करनी होगी. इस ऑडिट विंग का गठन जल्द ही नये स्वरूप में कर दिया जायेगा. वित्त विभाग के स्तर पर इसके गठन को लेकर तमाम कवायद शुरू हो गयी है. इसके तहत करीब एक हजार 200 ऑडिटर के पद होंगे. इसमें सीए (चार्टर्ड एकाउंटेंट) की बहाली भी बड़ी स्तर पर करने की योजना है. ये सभी सीए संविदा पर बहाल किये जायेंगे, जो इस विंग में तैनात होकर काम करेंगे.
विंग का गठन होने के बाद इनकी बहाली की प्रक्रिया शुरू कर दी जायेगी. ऐसे वर्तमान में वित्त विभाग के अंतर्गत वित्तीय अंकेक्षण नाम से एक इकाई काम करती है, लेकिन इसे वृहद और ज्यादा सक्षम बनाते हुए इसका नये स्वरूप में गठन किया जा रहा है. सिर्फ ऑडिट के कार्यों को करने के लिए इसे पूरी तरह से अलग विंग के रूप में स्थापित किया जायेगा.
इस विशेष विंग में तैनात सभी ऑडिटरों को सभी सरकारी विभागों में उनका ऑडिट करने के लिए भेजा जायेगा. ये ऑडिटर अलग-अलग विभागों में जाकर उनकी योजनाओं और वित्तीय संबंधित तमाम कार्यों की ऑडिट करेंगे. इसकी रिपोर्ट ऑडिट विंग के स्तर पर तैयार की जायेगी.
फिर सभी विभागों की समेकित रिपोर्ट वित्त विभाग में प्रस्तुत होगी. जिस विभाग में जो भी गड़बड़ी मिलेगी, उसके आधार पर सरकार के स्तर पर कार्रवाई की जायेगी.
अलग ऑडिट विंग के गठन से विभागों में वित्तीय स्तर पर गड़बड़ी और लापरवाही की गुंजाइश काफी कम हो जायेगी. सरकारी धन का गलत उपयोग नहीं हो पायेगा और किसी स्तर पर ऐसा होता, तो इसे आसानी से पकड़ा जा सकता है. संबंधित व्यक्ति के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो सकेगी.

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