एम्स प्रवेश परीक्षा में पटना के अपूर्व को 76वां व दिव्यांशु को 101वां रैंक

पटना : एम्स प्रवेश परीक्षा का रिजल्ट बुधवार देर रात घोषित कर दिया. इसमें 3884 परीक्षार्थी सफल हुए हैं. पटना के अपूर्व राघव को 76वां रैंक हासिल मिला है. वह नीट और जीपमर में भी बिहार टॉपर थे. उन्होंने नीट में ऑल इंडिया 26वां और जीपमर में नौवां रैंक हासिल किया था. इसके साथ ही […]

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पटना : एम्स प्रवेश परीक्षा का रिजल्ट बुधवार देर रात घोषित कर दिया. इसमें 3884 परीक्षार्थी सफल हुए हैं. पटना के अपूर्व राघव को 76वां रैंक हासिल मिला है.

वह नीट और जीपमर में भी बिहार टॉपर थे. उन्होंने नीट में ऑल इंडिया 26वां और जीपमर में नौवां रैंक हासिल किया था. इसके साथ ही दिव्यांशु को एम्स में 101वां रैंक प्राप्त हुआ है. बिहार से अन्य छात्रों का भी बेहतर रैंक है. रिजल्ट एम्स की वेबसाइट aiimsexams.org पर उपलब्ध हैं.

मॉक काउंसेलिंग 20 से

एम्स में सफल परीक्षार्थियों के लिए 20 जून से मॉक काउंसेलिंग शुरू होगी. एम्स ने काउंसेलिंग की संभावित तिथि जारी की है. वैसे सफल परीक्षार्थियों को लगातार वेबसाइट देखने को भी कहा है. काउंसेलिंग प्रक्रिया ऑनलाइन होगी.

इसके लिए सफल सभी परीक्षार्थियों को अपना रजिस्ट्रेशन करवाना होगा. रजिस्ट्रेशन करवाने के बाद उम्मीदवारों को कॉलेज और कोर्स का चुनाव करना होगा. एम्स एमबीबीएस रैंक, किये गये चुनाव, सीटों की उपलब्धता के आधार पर सीटों का आवंटन किया जायेगा. एम्स का नया सत्र एक अगस्त से शुरू होगा.

मेरा सपना दिल्ली एम्स में पढ़ना : अपूर्व

बेगूसराय के रामदीरी गांव के रहने वाले अपूर्व राघव ने कहा कि मेरे लिए चैलेंज का विषय है. मेरा सपना दिल्ली एम्स में पढ़ने का है. एम्स में 76वां रैंक हासिल हुआ है, जबकि और बेहतर रिजल्ट की उम्मीद थी. पहली बार ही एग्जाम दे रहा था.

लेकिन तैयारी काफी बेहतर थी. नीट में 26वां और जीपमर में नौवां रैंक प्राप्त हुआ है. अब तीनों अलग-अलग रिजल्ट है. तीन में से जिस रैंक के आधार पर सबसे बेहतर कॉलेज मिलेगा, वहीं एडमिशन लूंगा. अभी फैसला करना बाकी है कि किस रैंक के साथ काउंसेलिंग में शामिल हो जाऊं. अभी थोड़ा समय मिला है.

सभी पहलुओं को देख कर फैसला लिया जायेगा. अपूर्व ने कहा कि मैं डॉन बास्को से 10वीं की पढ़ाई पूरी करने के बाद मैं दिल्ली चला गया था. 10वीं आइसीएसइ का जोनल टॉपर था. 2017-2019 में दिल्ली में रहकर 12वीं की पढ़ाई पूरी की. साथ में मेडिकल की तैयारी जारी रही.

हर दिन तय समय पर पढ़ाई करता था. पूरे मन से पढ़ाई करने का फायदा मिला. सभी लोग एक लक्ष्य निर्धारित करेंगे तो सफलता मिलेगी. लगातार मेहनत करना बहुत जरूरी है. मेरे साथ पिता अालोक कुमार (बिहार रिन्यूवल एनर्जी डेवलपमेंट एजेंसी के डायरेक्टर ) और माता डॉ पूर्णिमा सिंह (जेडी वीमेंस कॉलेज में एसोसिएट प्रोफेसर) का काफी सपोर्ट रहा. समय-समय पर मुझे प्रोत्साहित करते रहते थे.

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