लोगों की छोड़, अपने विकास पर करते रहे बात

जिला पर्षद के सदस्य बोले- सरकार ऐसा पद क्यों बनाती है, जिसमें कोई सुविधा नहीं 13वें वित्त आयोग की जो राशि है, उससे कार्यालय बनाने के प्रस्ताव को भी नकारा पटना : सर, हमलोगों को भी चैंबर चाहिए, मुखिया-प्रमुख की तरह ऑफिस चाहिए. हमको भी फंड मिले, ताकि जनता के प्रति उत्तरदायित्व को पूरा किया […]

By Prabhat Khabar Digital Desk |
जिला पर्षद के सदस्य बोले- सरकार ऐसा पद क्यों बनाती है, जिसमें कोई सुविधा नहीं
13वें वित्त आयोग की जो राशि है, उससे कार्यालय बनाने के प्रस्ताव को भी नकारा
पटना : सर, हमलोगों को भी चैंबर चाहिए, मुखिया-प्रमुख की तरह ऑफिस चाहिए. हमको भी फंड मिले, ताकि जनता के प्रति उत्तरदायित्व को पूरा किया जा सके. हमें याचकों की तरह 2500 रुपये का भत्ता मिलेगा, तो हम कैसे क्षेत्र में घूम सकेंगे? इसे बढ़ाकर दस हजार किया जाये.
गुरुवार को जिला पर्षद अध्यक्ष अंजू देवी, उपाध्यक्ष ज्योति सोनी की उपस्थिति में हिंदी भवन में आयोजित पहली बैठक में पंचायती राज के वरिष्ठतम सदस्यों ने अपने से जूनियर मुखिया और प्रमुख से खुद की तुलना करते हुए सुविधाएं मांगीं, आॅफिस-चैंबर के साथ ही सरकार से फंड मांगा, तो विधायक श्याम रजक ने दो टूक कहा कि वो तो नियम ही नहीं है, जो नियम रहेगा वही न मिलेगा.
जैसे ही यह जवाब मिलता, तो खुद को ठगा महसूस करते ही जिला पर्षद के सदस्य अपनी भड़ास निकालते हुए बोले सरकार ऐसा पद क्यों बनाती है, जिसमें कोई सुविधा नहीं मिलती है? जिप सदस्य पद को क्यों नहीं खत्म कर दिया जाये. इन सबके बीच नवनिर्वाचित सदस्यों के निराशा का आलम उस वक्त और बढ़ गया जब पर्षद के मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी सह डीडीसी ने कहा कि सरकार ने तो 14वें वित्त आयोग में एक भी रुपया जिला पर्षद को नहीं देने का नियम बना दिया है. चतुर्थ आयोग में भी वही हश्र है, अब बीआरजीएफ में कुछ राशि यदि भविष्य में आयी तब उसी का आसरा है.
जिला पर्षद भवन जर्जर : इसके पहले इसी आस में जिप सदस्यों ने 13वें वित्त आयोग की बची 70 लाख की राशि से जर्जर पड़े जिला पर्षद भवन को बनाने के प्रस्ताव को भी नकार दिया, ताकि वह राशि जिप सदस्यों को विकास के काम के लिए दे दिया जाये. पिछली बैठक में पारित प्रस्ताव को संपुष्टि के लिए डीडीसी ने सदन के समक्ष रखा- कहा हमारा हॉल गिरने की स्थिति में है. पानी टपकता है, गिर जाये इससे पहले उसे बनवाना जरूरी है.
बख्तियारपुर विधायक रणविजय उर्फ लल्लू मुखिया ने कहा कि आपकाे रहने-बैठने के लिए घर भी नहीं है, इसी कारण बैठक के लिए हिंदी भवन आना पड़ रहा तो उसे बनवाइये, जवाब में बाढ़ पूर्वी के जिप सदस्य विजय शंकर ने सबसे पहले कहा कि जब फंड ही नहीं मिलता है, तो हम जमा राशि से कैसे घर बनाएं. सरकार जब पंचायत राज सरकार भवन बना सकती है, तो फिर जिला सरकार का भवन क्यों नहीं बनायेगी? मोकामा पूर्वी के रामदेव यादव ने कहा कि जीर्णोद्धार के नाम पर गोइठा में घी सुखायें? उनके साथ कई ने अपनी सहमति जतायी. हालांकि, प्रस्ताव नकारने के बाद राशि पर भी ग्रहण लग गया. श्याम रजक ने पूछा कि इससे कौन सा काम करियेगा? नाली-गली का काम तो सात निश्चयों में ग्राम सभा के हिस्से दे दिया गया है. यानी जिप सदस्य समझ गये कि वहां भी मुखिया की ही चलेगी.
प्रखंड प्रमुख और जिप सदस्य भिड़े
जिप की पहली बैठक के बीच में बोलने को लेकर प्रखंड प्रमुख और जिप सदस्य भिड़ गये. जैसे ही एक प्रमुख बोलने लगे कि एक ही जिप सदस्य सबकुछ बोल रहे हैं तो उसके बाद जिप सदस्यों ने ऐतराज जताया. एक ने कहा कि यह जिप सदस्यों के बोलने का मंच है. आपलोग आपत्ति मत जताइए. तो सभी प्रमुख नाराज हो गये, कहने लगे कि फिर हमें क्यों बुलाया गया है. इस क्रम में काफी बहस हुई और हंगामा होने लगा. जिसे बाद में डीडीसी अमरेंद्र कुमार ने सुलझाया.
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