अब एड्रेनल हिस्टोप्लास्मोसिस पर शोध करेंगे पीएमसीएच के डॉक्टर

पटना : पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल (पीएमसीएच) के डॉक्टर अब एड्रेनल हिस्टोप्लास्मोसिस बीमारी पर शोध करेंगे. शोध का उद्देश्य मरीज को जल्द से जल्द ठीक कैसे करें और इस बीमारी से बचाव के लिए कौन-कौन सी दवाएं व वैक्सीन इस्तेमाल की जाये, इसका पता लगाना है. दरअसल, पीएमसीएच के हथुआ वार्ड में देव शरण सिंह […]

By Prabhat Khabar Digital Desk | June 2, 2017 6:59 AM
पटना : पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल (पीएमसीएच) के डॉक्टर अब एड्रेनल हिस्टोप्लास्मोसिस बीमारी पर शोध करेंगे. शोध का उद्देश्य मरीज को जल्द से जल्द ठीक कैसे करें और इस बीमारी से बचाव के लिए कौन-कौन सी दवाएं व वैक्सीन इस्तेमाल की जाये, इसका पता लगाना है. दरअसल, पीएमसीएच के हथुआ वार्ड में देव शरण सिंह नाम के एक मरीज को भरती किया गया है.
इस मरीज को एड्रेनल हिस्टोप्लास्मोसिस नाम की बीमारी है. इस बीमारी की जानकारी मिलने के बाद पीएमसीएच के 10 डॉक्टरों की टीम ने बैठक की और इस बीमारी के तह तक जाने का निर्णय लिया है. पीएमसीएच के डॉ एसएस सिंह की देखरेख में इलाज कर रहे एसोसिएट प्रोफेसर डॉ सुरेंद्र कुमार ने कहा कि शोध में मरीज का नाम गुप्त रखा जायेगा. सिर्फ बीमारी पर चर्चा होगी. ऐसा करने से अस्पताल के नये डॉक्टरों को भी इलाज में मदद मिलेगी. उन्होंने कहा कि पीएमसीएच में पहला केस आया है. यह रोग हिस्टोप्लास्म नामक कवक के कारण होता है. यह कवक पूर्वी और मध्य अमेरिका व यूरोप जैसे देशों में पाये जाते हैं. यह पक्षियों से फैलता है.
चिड़ियाघर में चालक है मरीज देव शरण सिंह
पटना जू के डायरेक्टर नंद किशोर का कहना है कि देव शरण सिंह केयर टेकर नहीं है, बल्कि वह चालक के पद पर कार्य करता है. पिछले दो साल से वह वनस्पति प्रक्षेत्र में अनुबंध पर चालक का काम करता है.
उन्होंने कहा कि देव शरण सिंह का पक्षियों से कोई लेना-देना नहीं है. मकाऊ पक्षी की देखरेख पशु पालक विंदा राय व विजय प्रयास करते हैं. जबकि, एमू पक्षी की देखरेख पशुपालक रवींद्र नाथ सिंह करते हैं. डायरेक्टर का कहना है कि दोनों विदेशी पक्षी मकाउ व एमू पूरी तरह से स्वस्थ हैं. इनमें किसी तरह की कोई बीमारी व संक्रमण का लक्षण नहीं है
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क्या है मामला : फुलवारीशरीफ के रहने वाले देव शरण सिंह चिड़ियाघर में गाड़ी चलाने का काम करते हैं. तबीयत खराब होने के बाद परिजन उन्हें पटना के निजी अस्पताल ले गये, उन्हें दिल्ली एम्स जाने के लिए बोला गया, वहां जांच के बाद भरती के लिए लंबी वेटिंग को देखते हुए पीएमसीएच में भरती कराया. इलाज चल रहा है. डॉक्टरों ने जांच के बाद हिस्टोप्लास्मोसिस बताया है.