बिहार में कोरोना के बढ़ते मामले को देखते हुए अब बिहार में पंचायत चुनाव के टलने के आसार अधिक हो गये हैं. कोरोना के चलते अगर बिहार में पंचायत चुनाव समय नहीं हुए तो बिहार विधान परिषद की सूरत भी बदल जाएगी. इसका सबसे अधिक असर सत्ताधारी दल को ही होने वाला है. दरअसल, दो महीने बाद विधान परिषद में भाजपा की सदस्य संख्या आधी हो जाएगी. जबकि राजद के उपर इसका अधिक असर नहीं पड़ने वाला है.
दरअसल, 2015 के चुनाव में सबसे अधिक 11 सीटें भाजपा के ही खाते में आई थी. निर्दलीय अशोक कुमार अग्रवाल और लोजपा की नूतन सिंह भी भाजपा में शामिल हो गईं. अगर चुनाव समय पर नहीं हुए तो परिषद में भाजपा की सीटें 26 से घटकर 14 पर आ जाएंगी. वहीं स्थानीय क्षेत्र से दरभंगा से जीते सुनील कुमार सिंह का निधन हो गया था जो भाजपा के ही एमएलसी थे.
पंचायत चुनाव टलने का असर राजद पर बहुत अधिक नहीं पड़ने वाला है. क्योंकि स्थानीय क्षेत्र प्राधिकार से जीते उसके चार में तीन सदस्य पहले ही दल बदल कर जदयू में शामिल हो गए हैं. वहीं लोजपा के टिकट से जीत दर्ज की नूतन सिंह भाजपा में शामिल हो गई हैं. बता दें कि स्थानीय प्राधिकार से विधान परिषद में कुल 24 सदस्य चुने जाते हैं. हर दो साल पर आठ सदस्यों का निर्वाचन होता है. 2009 और 2015 में सभी सीटें एक साथ भरी गयी थी. 2021 में किस तरह ये सीटें भरी जाएंगी ये अभी तक तय नहीं हुआ है.
गौरतलब है कि स्थानीय क्षेत्र के इस चुनाव के मतदाता पंचायत और नगर निकायों के निर्वाचित प्रतिनिधि होते हैं. हार-जीत का निर्धारण भी पंचायतों-नगर निकायों के निर्वाचित प्रतिनिधियों के मतों से ही होता है. पिछली बार भी पंचायत चुनाव के तुरंत बाद ही विधान परिषद का चुनाव कराया गया था. 17 जुलाई 2015 से जिन नए सदस्यों का कार्यकाल शुरू हुआ था जो अब 16 जुलाई को समाप्त हो जाएगा.
Posted By: Thakur Shaktilochan