IPS in Bihar: नैय्यर हसनैन खान आ रहे बिहार, पुलिस मुख्यालय में मिलेगी ये बड़ी जिम्मेदारी
IPS in Bihar: अब वह जल्द ही बिहार पुलिस मुख्यालय में अपनी नई जिम्मेदारियों को निभाएंगे. नैय्यर हसनैन खान का प्रशासनिक करियर बिहार पुलिस के इतिहास में एक मिसाल के रूप में देखा जाता है और उनकी वापसी से राज्य में पुलिस प्रशासन में और सुधार की उम्मीद जताई जा रही है.

IPS in Bihar: पटना. बिहार कैडर के आईपीएस अधिकारी नैय्यर हसनैन खान जल्द ही केंद्रीय प्रतिनियुक्ति से वापस लौटेंगे. केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इस पर अपनी मंजूरी दे दी है. 1996 बैच के आइपीएस अफसर नैय्यर हसनैन खान बिहार पुलिस मुख्यालय में अपना योगदान देंगे. पिछले साल सितंबर में उन्होंने केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर जाने के बाद इस फैसले पर उन्होंने अपनी सहमति दे दी है.
1996 बैच के हैं आईपीएस अधिकारी
नैय्यर हसनैन खान 1996 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं और वर्तमान में सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) के बिहार पटना मुख्यालय में आईजी के पद पर कार्यरत हैं. उनकी वापसी के बाद उन्हें बिहार पुलिस मुख्यालय में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपे जाने की उम्मीद है. नैय्यर हसनैन खान अपने करियर के दौरान आर्थिक अपराध इकाई के एडीजी के रूप में लंबे समय तक कार्यरत रहे हैं और कई पेपर लीक मामलों का खुलासा किया था. सूत्रों के मुताबिक, बिहार सरकार ने केंद्रीय गृह मंत्रालय से उनकी वापसी की मांग की थी, जिसे मंजूरी मिल गई है.
कई महत्वपूर्ण पदों पर किये हैं कार्य
आईपीएस नैय्यर हसनैन खान, बिहार कैडर के एक प्रमुख और चर्चित आईपीएस अधिकारी हैं. वे 1996 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं और अपनी कार्यशैली के लिए जाने जाते हैं. नैय्यर हसनैन खान ने अपने करियर में कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया है, जिनमें आर्थिक अपराध इकाई (EOU) के एडीजी पद पर कार्य करना शामिल है. इस दौरान उन्होंने कई बड़े पेपर लीक मामले को उजागर किया और राज्य की पुलिस व्यवस्था में सुधार के लिए कई अहम कदम उठाए.
सशस्त्र सीमा बल में हैं अभी कार्यरत
नैय्यर हसनैन खान को उनके प्रशासनिक कौशल और समर्पण के लिए पहचाना जाता है. वे सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) के पटना मुख्यालय में आईजी (इंस्पेक्टर जनरल) के पद पर कार्यरत हैं. इसके अलावा, उन्हें उनकी न्यायिक दृढ़ता, भ्रष्टाचार के खिलाफ संघर्ष और पारदर्शिता के लिए भी जाना जाता है. हाल ही में, उन्होंने केंद्रीय प्रतिनियुक्ति से अपनी वापसी का निर्णय लिया है. बिहार सरकार ने उनके कार्यकाल को और बढ़ाने के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय से अनुरोध किया था, जिसे मंजूरी मिल गई है.