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निबंधन कार्यालयों की रैंकिंग में छोटे कस्बों ने मारी बाजी

राज्य के 137 निबंधन कार्यालयों में से 92 कार्यालयों ने निर्धारित लक्ष्य से अधिक राजस्व वसूली की है, लेकिन जो सबसे ऊपर रहा, वह है मधुबनी जिले का बाबूबरही निबंधन कार्यालय.

मधुबनी जिले का बाबूबरही निबंधन कार्यालय बना टॉपर संवाददाता, पटना राज्य के 137 निबंधन कार्यालयों में से 92 कार्यालयों ने निर्धारित लक्ष्य से अधिक राजस्व वसूली की है, लेकिन जो सबसे ऊपर रहा, वह है मधुबनी जिले का बाबूबरही निबंधन कार्यालय. मद्यनिषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक बाबूबरही ने महज 10.19 करोड़ रुपये के लक्ष्य के मुकाबले 15.69 करोड़ रुपये की वसूली कर 153.96 फीसदी की रिकॉर्ड सफलता पायी. इसके बाद निर्मली (141.87%), जयनगर (140.38%), मढ़ौरा (138.81%) और चनपटिया (136.79%) जैसे अपेक्षाकृत छोटे इलाकों ने टॉप फाइव में अपनी जगह पक्की की है. अगर जिला स्तर पर बात करें, तो कैमूर ने सबसे ज्यादा 123.14 फीसदी की उपलब्धि हासिल की. उसके बाद खगड़िया, शेखपुरा, मधुबनी और बेतिया ने लक्ष्य से कहीं अधिक राजस्व जुटाकर शीर्ष पांच जिलाें में जगह बनायी. बेतिया ने 189.65 करोड़ के लक्ष्य के मुकाबले 228.34 करोड़ रुपये की वसूली की है. बड़े नाम पीछे छूटे, पटना सिटी रहा सबसे फिसड्डी दिलचस्प बात यह है कि जहां निबंधन के छोटे कार्यालय अव्वल रहे, वहीं पटना सिटी जैसे महत्वपूर्ण निबंधन कार्यालय सबसे नीचे रहे. यहां 113.61 करोड़ के लक्ष्य के मुकाबले सिर्फ 73.10 फीसदी ही वसूली हो सकी. फतुहा, संपतचक, मुंगेर और हिलसा निबंधन कार्यालय भी पिछड़े गये. हालांकि, कुल वसूली के लिहाज से पटना जिला अव्वल रहा. यहां से 1262.17 करोड़ रुपये की आमदनी हुई़ मोतिहारी (421.09 करोड़) और मुजफ्फरपुर (439.98 करोड़) ने भी बेहतरीन प्रदर्शन किया. पटना व मगध सहित चार प्रमंडल पीछे निबंधन विभाग की ताजा रिपोर्ट के अनुसार राज्य के नौ प्रमंडलों में से चार प्रमंडल राजस्व लक्ष्य से पीछे रह गये हैं. सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि राजधानी क्षेत्र वाला पटना प्रमंडल भी इनमें शामिल है. पटना प्रमंडल को वर्ष 2024-25 के लिए 2067.65 करोड़ रुपये का लक्ष्य मिला था, लेकिन यह सिर्फ 2016.44 करोड़ रुपये ही जुटा सका. यह लक्ष्य का 97.52 फीसदी है. मगध प्रमंडल ने 680.67 करोड़ के लक्ष्य के सामने 658.06 करोड़ की वसूली की यानी 96.68 फीसदी. वहीं, भागलपुर प्रमंडल की स्थिति और भी कमजोर रही. 366.78 करोड़ के लक्ष्य के मुकाबले सिर्फ 352.36 करोड़ की वसूली हो सकी, जो 96.07 फीसदी है. सारण प्रमंडल भी लक्ष्य से थोड़ा पीछे रहा. उसे 614.67 करोड़ रुपये जुटाने थे, लेकिन उसने 606.66 करोड़ रुपये ही जमा किये यानी 98.70 फीसदी टारगेट पूरा कर सका है.

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