चाय वाले के बेटे ने राज्यस्तर पर बनायी पहचान

पंकज भारतीय पूर्णिया : ‘ नयी दुनिया बनाने के नये अन्सुर नहीं आते,यही मिट्टी संवरती है और यही जर्रे उभरते हैं ‘ कहते हैं कि हौंसले बुलंद हों और साध्य के प्रति इच्छाशक्ति प्रबल हो तो साधन कोई मायने नहीं रखता है. उसी तरह कर्म क्षेत्र में अगर अर्जुन जैसा सारथी हो तो जीत सुनिश्चित […]

By Prabhat Khabar Digital Desk |
पंकज भारतीय
पूर्णिया : ‘ नयी दुनिया बनाने के नये अन्सुर नहीं आते,यही मिट्टी संवरती है और यही जर्रे उभरते हैं ‘
कहते हैं कि हौंसले बुलंद हों और साध्य के प्रति इच्छाशक्ति प्रबल हो तो साधन कोई मायने नहीं रखता है. उसी तरह कर्म क्षेत्र में अगर अर्जुन जैसा सारथी हो तो जीत सुनिश्चित मानी जाती है. जिले के धमदाहा प्रखंड के सुदूर ग्रामीण क्षेत्र के रहने वाले एक चाय दुकानदार के बेटे ने राज्यस्तरीय स्कूली विज्ञान प्रतियोगिता में जो अपनी पहचान स्थापित की है, वह अन्य साधनहीन छात्रों के लिए भी नजीर बन गया है.
वहीं सारथी के रूप में मौजूद विज्ञान शिक्षक संतोष कुमार ने लगातार चौथी बार राज्यस्तर और राष्ट्रीय स्तर पर अपने विद्यालय उच्च विद्यालय धमदाहा का प्रतिनिधित्व जारी रखते हुए साबित कर दिया है कि प्रतिभाएं किसी संसाधन का मोहताज नहीं होता है और उसके लिए किसी खास पानी और मिट्टी की जरूरत नहीं होती है.
उच्च विद्यालय धमदाहा के छात्र मनीष कुमार ने 07वीं राज्यस्तरीय इंस्पायर अवार्ड प्रतियोगिता 2017 में सूबे में 08वां स्थान हासिल किया है. अब वह जनवरी 2018 में आयोजित राष्ट्रस्तरीय इंस्पायर अवार्ड प्रतियोगिता में सूबे का प्रतिनिधित्व करेगा.
पिता चलाते हैं चाय की दुकान : मनीष कुमार प्रखंड के ठाकुरबाड़ी टोला के निवासी हैं, जिसे गरीबी और अभाव विरासत में मिली है. पिता बुद्धन मंडल अनुमंडल मुख्यालय में नेहरू चौक पर एक छोटी सी चाय की दुकान चलाते हैं.
वहीं मां सुनीता देवी गृहिणी हैं और अनपढ़ भी है. बावजूद पढ़ाई के महत्व से वाकिफ है. लिहाजा गरीबी के बावजूद अपने तीनों बच्चों को पढ़ाने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ रखी है. पिता बुद्धन मंडल अपनी माली हालत से बखूबी वाकिफ हैं. लेकिन उन्हें भी बच्चों को पढ़ा-लिखा कर आगे बढ़ाने की तमन्ना है.
ऐसे में चाय की दुकान से जो कुछ उपार्जन हो पाता है, उससे दो वक्त की रोटी के जुगाड़ के बाद सारे पैसे बच्चों की पढ़ाई में ही खर्च कर देते हैं. उन्होंने खासकर मनीष से ढ़ेर सारी उम्मीदें पाल रखा है. इस अवार्ड के लिए राज्यस्तर पर चुनाव के बाद मानों उनके सपनों को पंख लग गये हैं. श्री मंडल कहते हैं ‘ चाय की दुकान क्या बेटे को पढ़ाने के लिए और भी कुछ करना पड़ा तो जरूर करेंगे ‘ .
स्पायर अवार्ड की शुरुआत प्रखंडस्तर से होती है और इसका अंतिम पड़ाव अंतराष्ट्रीय स्तर होता है, जो जापान में पूरा होता है. 06 और 07 अक्तूबर को पटना में 07वीं राज्यस्तरीय इंस्पायर अवार्ड प्रतियोगिता का आयोजन हुआ.
इसमें पूरे प्रदेश के 20 ऐसे प्रतिभाशाली सरकारी स्कूली छात्रों का चयन हुआ, जिन्होंने बेहतर प्रदर्श का प्रदर्शन किया. मनीष ने शिक्षण सहायक सामग्री (टीएलएम) को प्रदर्श के रूप में प्रस्तुत किया. यह ऐसी शिक्षण सामग्री होती है, जिसके माध्यम से किसी भी पाठ को बच्चों को समझने में आसानी होती है.
07 अक्तूबर को मनीष सूबे के शिक्षा मंत्री कृष्णनंदन वर्मा के हाथों सम्मानित हुआ. इस मौके पर मनीष के गाइड स्कूल के विज्ञान शिक्षक संतोष कुमार को भी सम्मानित किया गया.
उच्च विद्यालय धमदाहा कर रहा लगातार बेहतर प्रदर्शन : सीमित संसाधन के बीच उच्च विद्यालयधमदाहा जिस तरह विज्ञान के क्षेत्र में लगातार बेहतर प्रदर्शन कर रहा है, वह अन्य सरकारी स्कूलों के लिए भी उदाहरण बना हुआ है.
ग्रामीण परिवेश के किशोर वैज्ञानिकों को राष्ट्रीय फलक तक पहुंचाने में स्कूल के विज्ञान शिक्षक संतोष कुमार की महत्वपूर्ण भूमिका रही है. गौरतलब है कि यह चौथा मौका है, जब इस स्कूल के छात्रों ने राष्ट्रीय स्तर तक अपनी पहुंच बनायी है.
पहली बार वर्ष 2013 में स्कूल के छात्र मनोज कुमार राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में शामिल हुए. दूसरी बार वर्ष 2014 में स्कूल के छात्र राजेश हांसदा ने राष्ट्रीय स्तर की बाधा को तोड़ते हुए अंतराष्ट्रीय स्तर पर जापान में अपनी उपस्थिति दर्ज कराया था. वहीं वर्ष 2016 में विद्यालय के दीपक कुमार ने राष्ट्रीय प्रतियोगिता में शिरकत किया था. अब मनीष की बारी है.
क्षेत्रीय शिक्षा उप निदेशक डा चंद्रप्रकाश झा और जिला शिक्षा पदाधिकारी मिथिलेश कुमार कहते हैं कि उच्च विद्यालय धमदाहा का लगातार प्रदर्शन जिले के लिए गौरव का विषय है और अन्य विद्यालयों के लिए उदाहरण भी है.
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