मानक पूरे नहीं होने पर होगी कार्रवाई

जीपीएस व एसएलडी की हो रही है जांच प्रशासनिक निर्देश का नहीं किया जा रहा पालन सासाराम ऑफिस : बच्चों की सुरक्षा को लेकर परिवहन विभाग ने स्कूली बसों पर पैनी नजर रखनी शुरू कर दी है. बुधवार की सुबह परिवहन विभाग ने डीएवी स्कूल के तीन बसों को सड़क पर रोक लिया. हालांकि बस […]

By Prabhat Khabar Digital Desk |

जीपीएस व एसएलडी की हो रही है जांच

प्रशासनिक निर्देश का नहीं किया जा रहा पालन
सासाराम ऑफिस : बच्चों की सुरक्षा को लेकर परिवहन विभाग ने स्कूली बसों पर पैनी नजर रखनी शुरू कर दी है. बुधवार की सुबह परिवहन विभाग ने डीएवी स्कूल के तीन बसों को सड़क पर रोक लिया. हालांकि बस में स्कूल के छात्रों की मौजूदगी के कारण उन बसों को प्रशासन ने जीपीआरएस व एसएलडी लगाने की चेतावनी देकर छोड़ दिया. गौरतलब हो कि प्रशासन ने स्कूल बसों के संचालन के लिए स्पष्ट दिशा निर्देश जारी किया है. इसका अनुपालन कई स्कूलों के प्रबंधन द्वारा नहीं किया जा रहा. हाल के दिनों में स्कूली बसों के दुर्घटना के मद्देनजर प्रशासन अब स्कूल बसों के विरुद्ध सख्ती शुरू कर दी है.
जानकारों की माने तो स्कूल चलानेवाले बच्चों को लाने-लेजाने के लिए मारुति वैन, टाटा मैजिक सहित अन्य कई तरह के वाहनों का प्रयोग कर रहे हैं. कई के पास वैध परमिट नहीं है. चालक पूर्णत: प्रशिक्षित भी नहीं है. न ही स्कूल के फोन नंबर वाहनों पर दर्ज हैं. ज्ञातव्य हो कि स्कूल बसों में जीपीआरएस (वाहन का रूट व स्थल पता करने वाला सिस्टम) व एसएलडी (वाहन की गति नियंत्रण यंत्र स्पीड गवर्नर) लगाने का सरकार ने निर्देश जारी किया है. इसके बावजूद कई स्कूलों के वाहनों में अब तक ये सिस्टम नहीं लगाये गये हैं.
क्या है गाइडलाइन
स्कूल बस पीले रंग में होनी चाहिए. स्कूल बसों के पीछे व आगे स्कूल बस लिखा होना चाहिए. यदि अनुबंधित बस हो तो उक्त बस पर केवल स्कूल ड्यूटी लिखा जाना चाहिए. स्कूल बस में फर्स्टएड बॉक्स की सुविधा होनी चाहिए. स्कूल बसों में सीसीटीवी कैमरे व जीपीआरएस सिस्टम लगा होना चाहिए. बस में गति नियंत्रण यंत्र स्पीड गवर्नर (एलएसडी) लगा होना चाहिए. बसों की खिड़कियों पर सरियों की जाली लगी होनी चाहिए. बसों में अग्निशमन यंत्र की सुविधा होनी चाहिए. 28 सीटर से अधिक क्षमता वाली बसों में नियमानुसार दो दरवाजे प्रवेश व निकलने के लिए अलग-अलग होने चाहिए. राइट साइड व पीछे में आपातकालीन खिड़की होनी चाहिए. बस पर स्कूल का नाम व दूरभाष नंबर अंकित होना चाहिए. चालक के पास कम से कम 5 वर्ष पहले का भारी मोटर वाहन चलाने का लाइसेंस होना चाहिए.
क्या कहते हैं अधिकारी
बच्चों की सुरक्षा के लिए स्कूल बसों की जांच की जा रही है. स्कूलों को बसों में गति नियंत्रण यंत्र स्पीड गवर्नर व जीपीआरएस सिस्टम लगाने का निर्देश दिया गया है. कई स्कूलों ने लगाया भी है. लेकिन अभी भी अधिकतर स्कूल इस आदेश का पालन नहीं कर रहे हैं. इसी के तहत आज डीएवी के तीन बसों की जांच की गयी. उन्हें आदेश का पालन करने की चेतावनी देकर छोड़ दिया गया है.
मो जियाउल्लाह, डीटीओ रोहतास
क्या कहते हैं प्राचार्य
प्रशासन ने हमारी तीन बसों को रोका था. हमारे यहां 35 बसों में तीन अपनी है. अन्य किराये पर ली गयी है. किराये के बस के मालिकों से जीपीआरएस व एसएलडी लागने को कहा गया है. बसों की जांच के बाद अब तक प्रशासन की ओर से कोई पत्र नहीं आया है.
डॉ देवेश कुमार घोष
क्या कहते हैं डीईओ
स्कूली बसों की जांच करायी जा रही है. मानक का पालन नहीं करने वाले स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई की जायेगी.
महेंद्र पोद्दार, जिला शिक्षा पदाधिकारी
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