आठ को बनाया आरोपित
सासाराम कार्यालय : नगर पर्षद के पूर्व मुख्य पार्षद सहित आठ लोगों के विरुद्ध निगरानी कोर्ट पटना में प्राथमिकी दर्ज होते ही शहर का राजनीतिक माहौल एक बार फिर गरमा गया है. निगरानी डीएसपी नंदकिशोर राम को मुकदमें का जांच अधिकारी बनाया गया है. डीएसपी ने बताया कि सासाराम नगर पर्षद में करीब सात करोड़ […]
सासाराम कार्यालय : नगर पर्षद के पूर्व मुख्य पार्षद सहित आठ लोगों के विरुद्ध निगरानी कोर्ट पटना में प्राथमिकी दर्ज होते ही शहर का राजनीतिक माहौल एक बार फिर गरमा गया है. निगरानी डीएसपी नंदकिशोर राम को मुकदमें का जांच अधिकारी बनाया गया है. डीएसपी ने बताया कि सासाराम नगर पर्षद में करीब सात करोड़ रुपये से अधिक के लैपटॉप, एलइडी, डेकोरेटेड स्ट्रीट लैंप, हाइमास्ट लाइट आदि की जांच के बाद प्राथमिकी दर्ज हुई है.
प्राथमिकी में नगर पर्षद की पूर्व मुख्य पार्षद नाजिया बेगम, उप मुख्य पार्षद चंद्रशेखर सिंह, सशक्त स्थायी समिति सदस्य शशि पांडेय, रीता सिन्हा, मीरा कौर व विनोद प्रसाद, निवर्तमान कार्यपालक पदाधिकारी राजीव रंजन प्रकाश व निवर्तमान विद्युत कार्यपालक अभियंता अविनाश कुमार को आरोपित बनाया गया है. प्राथमिकी के अनुसार कार्रवाई की जायेगी.
गौरतलब है कि वर्ष 2014-15 में नगर पर्षद में लैपटॉप, एलइडी, डेकोरेटेड स्ट्रीट लैंप, हाइमास्ट लाइट आदि की बड़े पैमाने पर खरीद हुई थी. नियमों को ताक पर रख हुए खरीद के विरुद्ध पार्षद अतेंद्र कुमार सिंह, दशरथ प्रसाद आदि ने आंदोलन छेड़ा था. धरना-प्रदर्शन के बाद डीएम ने घोटाले की जांच करायी थी. डीएम के रिपोर्ट के बाद मामला ठंडा पड़ते देख. पार्षद द्वय हाइ कोर्ट की शरण में गये. हाइ कोर्ट के आदेश पर नगर विकास व आवास विभाग ने कार्रवाई करते हुए निवर्तमान मुख्य पार्षद नाजिया बेगम को पद से बरखास्त कर दिया था. इसके बाद मामला निगरानी को सौंप दिया गया था. निगरानी की टीम ने जांच के बाद अपना रिपोर्ट सौंपा और इसके बाद अपने ही थाना में प्राथमिकी मंगलवार को दर्ज कर ली.
प्राथमिकी के बाद नगर पर्षद में राजनीति गरमायी
प्राथमिकी की भनक लगते ही नप में भूचाल सा आ गया है. सभी को अपना नाम जानने की उत्सुकता थी. चुकि, मामला पटना में दर्ज है, जिसके कारण पटना तक की दौड़ शुरू हो गयी है. वर्तमान समय में पूर्व मुख्य पार्षद शहर में नहीं हैं.