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भाई व भतीजे पर संपत्ति हड़पने का लगाया आरोप

एमडीएम पर दिखा असर कोचस : पांच सौ व हजार रुपये के नोटों के चलन पर पाबंदी लगने का असर अब मिड-डे-मील (एमडीएम) पर भी दिखने लगा है़ रुपये की निकासी समय से नहीं होने के कारण एमडीएम भी समय से नहीं बन पा रहा है. बैंकों द्वारा रुपये एक्सचेंज का लिमिट घटाने व चेक […]

By Prabhat Khabar Digital Desk | November 23, 2016 7:38 AM
एमडीएम पर दिखा असर
कोचस : पांच सौ व हजार रुपये के नोटों के चलन पर पाबंदी लगने का असर अब मिड-डे-मील (एमडीएम) पर भी दिखने लगा है़ रुपये की निकासी समय से नहीं होने के कारण एमडीएम भी समय से नहीं बन पा रहा है. बैंकों द्वारा रुपये एक्सचेंज का लिमिट घटाने व चेक पर मात्र 10 हजार रुपये तक की ही निकासी हो रही है.
उसमें भी घंटों क्यू में लगना पड़ रहा है. गारा उत्क्रमित मध्य विद्यालय के प्रधानाध्यापक वीरेंद्र कुमार तिवारी बताते हैं कि क्षेत्र के एमडीएम के खाता का संचालन एक ही बैंक पीएनबी से होता हैं. यहां रुपये की निकासी समय से नहीं होने के कारण सामग्रीयों की खरीदारी समय से नहीं हो पा रही है. सोरठी मध्य विद्यालय के प्रधानाध्यापक बबन प्रसाद का कहना है कि एमडीएम से संबंधित निकासी का कांउटर अलग से होना चाहिए या फिर पैसों का लीमिटेशन बढ़ाना चाहिए.परसियां मध्य विद्यालय के प्रधानाध्यापक बुद्धिबलधन राव का मानना है कि एमडीएम का खाता एक ही बैंक में होने की वजह से शिक्षकों का हुजूम एक ही बैंक में जमा हो जा रहा है. इस वजह से समय की बरबादी के साथ ही शिक्षण कार्य भी प्रभावित हो रहा है.
डीडीओ सह राजकीय मध्य विद्यालय के प्रधानाध्यापक रामाश्रय सिंह का कहना है कि एमडीएम की जवाबदेही ने शिक्षकों को हमेशा शक के कटघरे में खड़ा कर दिया है. इनकी भूमिका संदिग्ध हो गयी है. इधर, पीएनबी के शाखा प्रबंधक राजेंद्र चौधरी का कहना है कि रुपये निकासी का लिमिट तभी बढ़ाया जायेगा जब चेस से पर्याप्त मात्रा में रुपये उपलब्ध होगा. कारोबारी, किसान के अलावा शादी के मौसम में रुपये एक्सचेंज के साथ ही अन्य तमाम तरह की जरूरतें सबको हैं. परंतु अभी तक नये नोट नहीं आये हैं, सो परेशानी में सहयोग ग्राहक से भी अपेक्षित हैं. जरूरत के हिसाब से आप हमसे सहयोग लें और सहयोग दें.

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