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पढ़ रहे थे बाबर को बना दिये गये कबीर

सहरसा नगर : ऐतिहासिक तथ्यों में बाबर को जानने की इच्छा व इतिहास विषय से स्नातक करने चले छात्र परीक्षा परिणाम आते-आते कबीर के प्रशंसक में बदल दिये गये. कुछ इसी प्रकार का कारनामा बीएनएमयू मधेपुरा के तहत शहर के एसएनएस कॉलेज के छात्र अभिमन्यु कुमार को झेलना पड़ रहा है.प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरीSpies […]

By Prabhat Khabar Digital Desk | January 15, 2016 4:37 AM

सहरसा नगर : ऐतिहासिक तथ्यों में बाबर को जानने की इच्छा व इतिहास विषय से स्नातक करने चले छात्र परीक्षा परिणाम आते-आते कबीर के प्रशंसक में बदल दिये गये. कुछ इसी प्रकार का कारनामा बीएनएमयू मधेपुरा के तहत शहर के एसएनएस कॉलेज के छात्र अभिमन्यु कुमार को झेलना पड़ रहा है.

विश्वविद्यालय की इस हरकत को सही माने तो हिंदी साहित्य के छात्र को इतिहास की तैयारी अनिवार्य रूप से करनी होगी. खास बात यह है कि इतिहास के परीक्षार्थी को डिग्री हिंदी की मिल रही हैशेष पेज 15 पर

पढ़ रहे थे…
और होम साइंस में मिले अंकों से संतोष करना पड़ रहा है. यह कोई बकैती नहीं मधेपुरा स्थित बीएनएमयू की सच्चाई है. जहां विश्वविद्यालय द्वारा की गयी गलती की वजह से सर्वनारायण सिंह रामकुमार सिंह महाविद्यालय के वर्ष 2013 के छात्र अभिमन्यु कुमार का भविष्य अधर में लटका हुआ है.
क्या है मामला
जिले के सर्वनारायण सिंह रामकुमार सिंह महाविद्यालय में रामकृष्ण यादव व राधा देवी के पुत्र अभिमन्यु कुमार ने वर्ष 2011 में हिस्ट्री आनर्स से स्नातक करने के लिए दाखिला लिया था. इसके बाद पंजीयन संख्या एसआरएसएच 25894/2011 के तहत छात्र ने परीक्षा का फार्म भरने के बाद इतिहास विषय की परीक्षा भी दी थी.
स्नातक प्रथम, द्वितीय व तृतीय खंड की परीक्षा देने के बाद विश्वविद्यालय से छात्र को गृह विज्ञान (प्रतिष्ठा) में सेकंड क्लास से उत्तीर्ण प्राप्तांक का अंकपत्र जारी कर दिया गया. इसके बाद 28 अगस्त वर्ष 2013 को विश्वविद्यालय द्वारा जारी प्रमाणपत्र में छात्र को हिंदी विषय से स्नातक उत्तीर्ण छात्र बताया गया.
कई बार लगा चुका है गुहार
सर मैं इतिहास का छात्र हूं, लेकिन अंकपत्र गृह विज्ञान का दिया गया है, इतना ही नहीं मेरा प्रमाण पत्र हिंदी आनर्स का जारी कर दिया गया है. इन्हीं शब्दों को दोहराता यह छात्र महाविद्यालय से विश्वविद्यालय तक गुहार लगा चुका है. लेकिन कोई सुधि लेने वाला नहीं है. छात्र बताता है कि विश्वविद्यालय की इस गलती की वजह से प्रतियोगिता परीक्षाओं में शामिल भी नहीं हो पा रहा हूं.

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