दो शौचालय, डेढ़ सौ सुरक्षाकर्मी

असुविधा के बीच सुरक्षा देने को बाध्य हैं सुरक्षाकर्मी मंडल कारा की सुरक्षा में तैनात कर्मियों को हो रही है परेशानी बैरक व क्वार्टर की स्थिति दयनीय सहरसा : मंडल कारा की सुरक्षा में तैनात जवान खुद असुविधा के माहौल में जेल जैसी संवेदनशील जगहों की सुरक्षा कर रहे हैं. सुरक्षाकर्मियों के लिए उपलब्ध बैरक […]

By Prabhat Khabar Digital Desk |

असुविधा के बीच सुरक्षा देने को बाध्य हैं सुरक्षाकर्मी

मंडल कारा की सुरक्षा में तैनात कर्मियों को हो रही है परेशानी
बैरक व क्वार्टर की स्थिति दयनीय
सहरसा : मंडल कारा की सुरक्षा में तैनात जवान खुद असुविधा के माहौल में जेल जैसी संवेदनशील जगहों की सुरक्षा कर रहे हैं. सुरक्षाकर्मियों के लिए उपलब्ध बैरक व क्वार्टर की स्थिति दयनीय है. बावजूद ये जवान चौकस भरी निगाह रख कर मंडल कारा में बंद कैदियों की गतिविधि पर नजर रखते हैं. खास बात यह है कि तैनात जवान मुस्तैदी से रतजगा कर अपनी ड्यूटी भी करते हैं. लेकिन उनके सोने व रहने के लिए जो बैरक व क्वार्टर है, वह काफी जर्जर है. जहां मेहनती जवानों को सुविधाओं के नाम पर असुविधाओं की सौगात मिली हुई है. जवानों ने बताया कि बरसात हो, ठंड या गर्मी, सभी मौसम में परेशानी है. सबसे बड़ी परेशानी शौचालय की है. डेढ़ सौ जवानों के लिए मात्र दो शौचालय है. जिसके कारण सुबह में शौचालय जाने के लिए जवानों की लंबी लाइन लगी रहती है. जवानों ने कहा कि समस्या के बावजूद ईमानदारी पूर्वक हमलोग अपनी सेवा दे रहे हैं.
जमीन पर सोने की मजबूरी
चार बैरेक व क्वार्टर में लगभग डेढ़ सौ से अधिक की संख्या में जवानों व उसके परिवार को रहने की व्यवस्था है. फर्श पर जवान बिछावन डाल कर सोने को मजबूर हैं. बारिश के मौसम में इनलोगों को काफी परेशानी उठानी पड़ रही है. जबकि अन्य बैरेकों में बिहार सैन्य पुलिस के जवानों को सोने के लिए चौकी व प्लाइ कॉट की व्यवस्था रहती है. जवानों ने बताया कि कब कौन सी अनहोनी हो जाय, कहना मुश्किल है. खिड़की व गेट टूटा है. खिड़कियों में प्लास्टिक लगा कर ठंड से बचाव कर रहे हैं. इतना ही नहीं जमीन पर सोने के बाद सांप व अन्य कीड़े का भय हमेशा सताते रहता है. सबसे खराब स्थिति होमगार्ड जवानों के बैरेक की है. जवान कंपकंपाती ठंड में फर्श पर बिछावन डाल कर सोने को मजबूर है.
संक्रमण का खतरा
बैरेक में पानी के लिए चापानल लगा हुआ है. जहां से जल निकासी के लिए कच्चे नाले का प्रयोग किया जाता है. खुले नाला में गंदगी व बदबू से संक्रमण फैलता जा रहा है. जवान बताते हैं कि बैरेक के बरामदे पर ही खाना खाना पड़ता है. जहां आवारा पशुओं को हमेशा देखा जा सकता है. वहीं चूहा जवानों के लिए परेशानी का सबब बन गया है. जवान बताते हैं कि रात के समय सोते वक्त कमरे में रखी वर्दी भी चूहे काट देते हैं. नतीजतन सोने से पहले मच्छरदानी के अंदर वर्दी को लेकर सोना पड़ता है. इस अोर प्रशासन को भी ध्यान देना चाहिए.
डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

👤 By Prabhat Khabar Digital Desk

Prabhat Khabar Digital Desk

Digital Media Journalist having more than 2 years of experience in life & Style beat with a good eye for writing across various domains, such as tech and auto beat.

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >