दिन में बालू व सीमेंट, शाम में होता है देह व्यापार

आवासीय मोहल्ले से कब हटेगा रेडलाइट एरिया स्थानीय लोगों की जान सांसत में सहरसा : कोसी क्षेत्र के सबसे पुराने रेड लाइट एरिया में दिन हो या रात बाजार सजा हुआ मिलता है. दिन के समय रेडलाइट रोड में खुले व्यावसायिक प्रतिष्ठान का संचालन होता है तो शाम को इसके बंद होते ही यह पूरा […]

By Prabhat Khabar Digital Desk |

आवासीय मोहल्ले से कब हटेगा रेडलाइट एरिया

स्थानीय लोगों की जान सांसत में
सहरसा : कोसी क्षेत्र के सबसे पुराने रेड लाइट एरिया में दिन हो या रात बाजार सजा हुआ मिलता है. दिन के समय रेडलाइट रोड में खुले व्यावसायिक प्रतिष्ठान का संचालन होता है तो शाम को इसके बंद होते ही यह पूरा इलाका रेड लाइट एरिया में तब्दील हो जाता है.
मिली जानकारी के अनुसार वर्तमान में तीन सौ के करीब सेक्स वर्कर व उसके एजेंट परिवर्तन नगर की आड़ में देह व्यापार में यहां शामिल हैं. इसमें अमूमन सेक्स वर्क्स अपने परिवार के साथ रहती हैं. कई ऐसी हैं, जो पिछले कई साल से इस धंधे में हैं.
इसके बावजूद इनके पास कोई भी लीगल डाॅक्यूमेंट नहीं है. स्थानीय लोगों द्वारा आवासीय मोहल्ले से देह व्यापार के धंधे को समाप्त करने की मांग कई बार की जा चुकी है.
शाम को बन जाता है रेडलाइट एरिया
वार्ड नंबर 26 का यह इलाका रेलवे क्वार्टर क्षेत्र का प्रमुख बाजार है. यहां किराना और गृह निर्माण सामग्री की कई दुकानें हैं. भीड़-भाड़ वाला इलाका होने के कारण शाम को जब ये दुकानें बंद हो जाती है, तो सड़क से लेकर गलियां तक रेड लाइट एरिया के रूप में गुलजार हो जाती हैं. रात के अंधेरे में आम लोगों का पैदल चलना भी बहुत मुश्किल होता है.
पूरा रखा जाता है ख्याल
अमूमन परिवर्तन नगर के इस रेडलाइट में महिला यौनकर्मी छोटे-छोटे कमरों में उमस, गरमी और दुर्गंध के बीच अपने परिवार के साथ रहती है. इन बदनाम गलियों में घुसने के लिए सिर्फ पांच फीट चौड़ी सड़क है. वैसे तो वातानुकूलित घरों के अलावा इन गलियों में लकड़ी और कंक्रीट के बने पुराने घर देखने को मिल जायेंगे. शाम के बाद इन जर्जर मकानों के बाहर और सीढ़ियों पर मेकअप लगाकर खड़ी लड़कियां ग्राहकों को आकर्षित करती रहती है. बिचौलिया बताता है कि कमरों की लंबाई से ज्यादा ग्राहकों की पसंद मायने रखती है.
बाहर से लायी जाती हैं लड़कियां
रेड लाइट का यह एरिया बहुत पहले से चल रहा है. पहले भी कई बार कार्रवाई की गयी, लेकिन कुछ दिन बाद यहां महिलाएं फिर आ कर बस जाती है. यहां नेपाल, उत्तरप्रदेश, कोलकाता व अन्य प्रांतों से लड़कियों को लाकर देह व्यापार कराने की शिकायतें आती रहती हैं. यहां बने मकानों के मालिक प्रतिदिन के हिसाब से देह व्यापार के लिए कमरों को किराये पर देते हैं. पुलिस की सख्ती के बाद भी बिचौलिये सक्रिय हैं. बदनाम हो चुके इस इलाके में सुबह, दोपहर या फिर शाम संभ्रांत लोगों का चलना मुश्किल हो गया है.
जब कभी पुलिस सख्ती करती है तो घरों के बाहर सड़क किनारे सज धज कर दिखने वाली महिलाएं घरों में दुबक जाती है, बिचौलिये गायब हो जाते हैं, लेकिन दूसरे दिन फिर देह व्यापार अपने चरम पर होता है.
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