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स्पर की मरम्मत का यही है माकूल समय

फिलहाल नदी भी तटबंध से दूर पश्चिम की ओर खिसकीप्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरीSpies In Mauryan Dynasty : मौर्य काल से ही चल रही है ‘रेकी’ की परंपरा, आज हो तो देश में मच जाता है बवालRajiv Gauba : पटना के सरकारी स्कूल से राजीव गौबा ने की थी पढ़ाई अब बने नीति आयोग के […]

By Prabhat Khabar Digital Desk | May 5, 2017 9:37 AM

फिलहाल नदी भी तटबंध से दूर पश्चिम की ओर खिसकी

नवहट्टा : राज्य सरकार के कैलेंडर में बाढ़ की अवधि 15 जून से 31 अक्तूबर तक घोषित है. प्रत्येक वर्ष इस अवधि में बाढ़ से बचाव के लिए जल संसाधन विभाग सुपौल डिवीजन को काफी मशक्कत करनी पड़ती है. साथ ही राज्य सरकार के राजस्व का करोंड़ों रुपये का खर्च होता है. अभी नदी में जल की मात्रा कम है और नदी भी अपनी बहाव के संग तटबंध से दूर पश्चिम की ओर खिसक गयी है. लिहाजा स्पर की मरम्मत का माकूल समय यही है. तटबंध निर्माण के समय से अब कई स्परों की लंबाई चौथाई से भी कम रह गयी है.
लगातार कटता रहा है स्पर : 1962 में पूर्वी कोसी तटबंध निर्माण के समय एन-6 स्पर की लंबाई 650मीटर थी. जबकि इ-2 स्पर की लंबाइ 1150 मीटर. पुराने देवनवन मंदिर के समीप बना स्पर 666 मीटर लंबा था. हर साल कोसी नदी में आयी उफान व उसके थपेड़े से स्परों को लगातार छोटा करते रहे. अब एन-6 की लंबाई महज सौ मीटर, इ-2 की लंबाई 125 मीटर व पुराने देवनवन मंदिर के पास के 80.05 बिंदू के स्पर की लंबाई महज 300 मीटर शेष रह गयी है. ये सभी स्पर पूर्वी कोसी तटबंध के 74 से 84 किलोमीटर के बीच हैं.
कहते हैं प्रभावित
1984 में कोसी तटबंध के नवहट्टा में टूटने व पूरे क्षेत्र में जल प्रलय देखने वाले 56 वर्षीय रवींद्र सिंह राणा बताते हैं कि नवहट्टा में बाढ़ के खतरे को देखते हुए स्पर की लंबाई तय की गयी थी. लेकिन जल संसाधन विभाग की लापरवाही के कारण दिनों दिन स्पर की लंबाई नदी के कटाव के कारण कम होती गयी. इससे तटबंध के बाहर बसने वाले लोग बाढ़ से सशंकित और भय के माहौल में जीने लगे हैं. अभी नदी तटबंध से दूर है. स्पर की लंबाई को पुरानी स्थिति में लाने का उपयुक्त समय है. यदि विभाग अभी इस समस्या को हल करने की कोशिश करे तो बाढ़ अवधि में एंटी रोजन कार्य एवं बेवजह खर्च की जाने वाली राशि से बचा जा सकेगा.

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