मिली कामयाबी. गिरफ्तार चारों अपराधियों की लंबे समय से कई घटनाओं में थी तलाश
समस्तीपुर : मोरवा रायटोल में बुधवार की रात एसटीएफ के हत्थे चढ़े चारों अपराधी डबलू झा और पप्पू चौधरी गिरोह के हैं. इन सबों की कई चर्चित घटनाओं में पुलिस को काफी अरसे से तलाश थी. पुलिस सूत्रों का बताना है कि डबलू झा की 16 अक्तूबर को जमशेदपुर के बागबेड़ा थाना क्षेत्र से गिरफ्तारी के बाद गिरोह के सदस्य किसी बड़ी घटना को अंजाम देने के लिये मोरवा में जमा हुए थे. ग्रामीण सूत्र बताते हैं कि एसटीएफ की छापेमारी के बाद इलाके के दो दर्जन से अधिक लोग अचानक भूमिगत हो गये हैं.
जिनके बारे में उनके परिजन भी कुछ बताने की स्थिति में नहीं है. काफी अरसे से समस्तीपुर की फलक से गायब डबलू झा व पप्पू चौधरी का नाम एक माह पूर्व उस वक्त एकबारगी चर्चा में आ गया. दलसिंहसराय नगर पंचायत के पूर्व अध्यक्ष व एक कपड़ा व्यवसायी ने थाने में प्राथमिकी दर्ज कराकर दोनों पर क्रमश: 50 व 30 लाख रंगदारी मांगने का आरोप लगाया है. इसके बाद मुसरीघरारी के भी एक किराना व्यवसायी ने दस लाख रंगदारी मांगे जाने की प्राथमिकी दर्ज करवायी. पुलिस सूत्रों की मानें तो कई ऐसे भी व्यवसायी थे जो थाना तक नहीं पहुंचे.
मोरवा से गिरफ्तार अपराधियों के पास से एसटीएफ को मिले हथियारों को लेकर दिनभर पुलिस महकमे में चर्चाएं होती हैं. पुलिस अधिकारी जहां पूरे घटनाक्रम पर कुछ भी कहने से कन्नी काट रहे हैं. वहीं पुलिस सूत्रों की मानें तो अपराधियों के पास से एके-47 जैसे हथियार बरामदगी की यह पहली घटना है. हालांकि, जिले में एके-47 के गरजने का इतिहास काफी पुराना है. जानकार बताते हैं कि जिले में पहली बार एके-47 रोसड़ा में गरजा था. उसके बाद हुई कई चर्चित हत्याओं में इस हथियार के इस्तेमाल होने की बात होती रही है.
क्या थी अपराधियों की मंशा
पुलिस के हत्थे चढ़े अपराधियों की निशानदेही पर छापेमारी में जुटे पुलिस अधिकारियों के सामने यह सवाल बन कर खड़ा है कि आखिर इतने हथियार को जमा करने के पीछे अपराधियों की मंशा क्या थी. वैसे पुलिस सूत्रों का बताना है कि किसी बड़ी घटना को अंजाम देने के लिये ही बेगूसराय और वैशाली जिले के अपराधी वहां पहुंचे थे और हथियारों को जमा किया गया था. हालांकि, गिरफ्तार अपराधियों से पूछताछ के बाद ही पूरे मामले का खुलासा हो सकेगा. वैसे इनकी गिरफ्तारी से फिलहाल पुलिस ने राहत की सांस ली है.