पहले था डकैतों का तांडवतत्कालीन पुलिस अधीक्षक ने दी थी शाबाशी प्रतिनिधि, मोरवा 1 जनवरी 1987 का वह सुनहला सुबह. आंखे खोलते ही लोग नये साल की मुबारकबाद एक दूसरे को देने क ी तैयारी कर रही रहे थे कि एक साथ 6 डकैतों की मौत की खबर ने लोगों के चेहरे पर मुस्कान और बढ़ा दिया. लोग घटना साल की ओर दौड़ पड़े. शव को अपनी आंखों से देखने के बाद लोगों ने राहत की सांस ली थी. इस घटना के बाद तो लोग सुकून से रहने लगे. अपराधियों की कमर टूट गयी थी. जबकि घटना के पहले पूरे प्रखंड क्षेत्र में डकैतों का बोलबाला था. शाम ढलते ही सड़कें सूनी होने लगता व लोग घर में दुबक सुरक्षित महसूस करते थे. राहगीर दिन के उजाले में घर लौटने की सलाह एक दूसरे को देते थे. अगर कहीं शाम ढल गयी तो वहीं रुकने की कवायद करने लगते. इसके बाद से लगातार अब तक इस तरह की घटना पर विराम ही लग गया जिससे लोग राहत में हैं. 31 दिसंबर रात्रि जब सारी दुनिया बेसुध सो रही थी डकैत तांडव कर रहे थे. कई गांव में घटना को अंजाम देने के बाद डकैत हलई ओपी क्षेत्र के कौवा गांव में प्रवेश किया ही था कि हल्ला शुरू हो गया. जानबाजी दिखाते हुए क्षेत्र के जवान डकैतों से दो दो हाथ करने की ठानी. लोगों से घिरता देख डकैत भागने लगे. कौवा चौक पर घेरकर लोगों ने पांच डकैतों को मौत के घाट उतार दिया. एक डकैत भागने के क्रम में बाजितपुर करनैल चौक पर मारा गया. 6 डकैतों की एक साथ मौत से लोगों ने बड़ी राहत ली. तत्कालीन एसपी रतन लाल क नौजिया घटना स्थल पर पहुंच लोगों को शाबाशी दी. इसके बाद क्षेत्र में शांति कायम है.
छह डकैतों की मौत ने तोड़ दिया अपराध का कमर
पहले था डकैतों का तांडवतत्कालीन पुलिस अधीक्षक ने दी थी शाबाशी प्रतिनिधि, मोरवा 1 जनवरी 1987 का वह सुनहला सुबह. आंखे खोलते ही लोग नये साल की मुबारकबाद एक दूसरे को देने क ी तैयारी कर रही रहे थे कि एक साथ 6 डकैतों की मौत की खबर ने लोगों के चेहरे पर मुस्कान और […]
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