प्रशिक्षण में अर्जित ज्ञान को धरातल पर उतारे पूसा. सीतामढ़ी से आये तीन दर्जन से अधिक महिला प्रतिभागी मशरुम उत्पादन सह विपनण के प्रशिक्षण में सैद्धांतिक एवं प्रायोगिक दानों से ही ढंग के साथ क्षेत्रीय मशरुम उत्पादकों के फार्म में भ्रमण किया. गरीब से गरीब परिवार के लिए मशरुम उत्पादन आमदनी के ख्याल से बेहतर विकल्प के रूप में देखा जा रहा है. उक्त बातें आरएयू के मशरुम विभाग में चल रहे तीन दिनी मशरुम उत्पादन सह विपनण विषय पर प्रशिक्षण के समापन के अवसर पर निदेशक अनुसंधान डॉ मिथलेश कुमार ने कही. वहीं डीन डॉ वीके चौधरी अपने कहा कि महिलाओं में खासतौर से अनुसूचित जाति व पिछड़े वर्ग की प्रतिभागी को ज्यादा उत्साह देखकर इनके लिए विशेष प्रशिक्षण सत्र का आयोजन कर लाभान्वित करने का निर्देश दिया. उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण केंद्र से सामान्य वर्ग से अधिक महादलित एवं अनुसूचित जाति की महिला प्रशिक्षण में भाग ले रही है. विभागाध्यक्ष डॉ भीके शाही ने कहा कि प्रशिक्षण के बाद मशरुम का उत्पादन कर अच्छा करें. साथ ही पौष्टिक व्यंजन के तौर पर खाये. संचालन वैज्ञानिक डॉ दयाराम ने करते हुए प्रशिक्षण में अर्जित ज्ञान को धरातल पर उतारने की नसीहत प्रतिभागियों को दिया. धन्यवाद ज्ञापन वैज्ञानिक डॉ गीता देवी ने किया. अंत में मुख्य अतिथि ने सभी प्रतिभागियों को एक एक किलो मशरुम बीज व प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया.
महिलाओं के लिए मशरुम उत्पादन वरदान
प्रशिक्षण में अर्जित ज्ञान को धरातल पर उतारे पूसा. सीतामढ़ी से आये तीन दर्जन से अधिक महिला प्रतिभागी मशरुम उत्पादन सह विपनण के प्रशिक्षण में सैद्धांतिक एवं प्रायोगिक दानों से ही ढंग के साथ क्षेत्रीय मशरुम उत्पादकों के फार्म में भ्रमण किया. गरीब से गरीब परिवार के लिए मशरुम उत्पादन आमदनी के ख्याल से बेहतर […]
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