प्राइवेट बोरिंग पर फिर होना होगा निर्भर

खरीफ फसल पर मौसम की मार का दिख सकता है असर, किसानों में छाने लगी उदासी खानपुर : धान का बिचड़ा गिराने का समय निकलता जा रहा है़ लेकिन जून माह के आधा समय निकलने के बाद भी किसानों के खेतों में अबतक बिचड़ा नहीं गिर सका है़ फिलहाल मौसम की जो स्थिति बनी हुई […]

By Prabhat Khabar Digital Desk |
खरीफ फसल पर मौसम की मार का दिख सकता है असर, किसानों में छाने लगी उदासी
खानपुर : धान का बिचड़ा गिराने का समय निकलता जा रहा है़ लेकिन जून माह के आधा समय निकलने के बाद भी किसानों के खेतों में अबतक बिचड़ा नहीं गिर सका है़ फिलहाल मौसम की जो स्थिति बनी हुई है उसमें खरीफ फसल पर मौसम की मार स्पष्ट झलक रही है़ खेतों में पानी के लिए किसान त्रहिमाम में हैं.
अगता खेती के लिए बिचड़ा डालने की मंसूबे पर पानी फिर गया है़ क्षेत्र में स्टेट ट्यूबवेल की स्थिति भी ठीक नहीं है़ सभी सरकारी नलकूप दशकों से मृतप्राय है लेकिन इस ओर दूर-दूर तक कोई ठोस पहल नजर नहीं आ रहा है़
इस तरह किसानों की निर्भरता वैकल्पिक सिंचाई व्यवस्था पर ही है़ सम्पन्न किसान तो किसी तरह पैसे की बदौलत खेतों मे बिचड़े तो डाल लेंगे लेकिन गरीब व मध्यम वर्गीय किसानों के लिए यह काफी मुश्किल है किसानों की माने तो प्राइवेट बोरिंग से पानी पटवन का दर एक सौ से डेढ़ सौ रुपये प्रति घंटा है़ इसी से आप सोच सकते हैं की मध्यम वर्गीय किसानों के सामने खेती करना कैसी चुनौती होगी़
किसानों का बताना है की अगर सभी सरकारी नलकूपों को ठीक करा दिया जाए तो किसानों कि माली हालत सुधर सकती है. लेकिन यह विडंबना कहा जाय कि कृषि प्रधान देश होने के बावजूद भी किसानों की समस्या पर कोई ध्यान नहीं है़ अगर यहि स्थिति बनी रही तो किसानों के सामने आये दिन फसल उगाना पत्थर पर घास उगाने के समान होगा.
3788 हेक्टेयर में होना है धान की खेती
विभागीय आंकड़ों पर गौर करें तो इस वर्ष क्षेत्र में 3788 हेक्टेयर में धान की खेती का लक्ष्य रखा गया है़ इसी प्रकार 1991 हेक्टेयर में मक्का उत्पादन, 600 हेक्टेयर में तेलहन व 40 हेक्टेयर में दलहन की खेती का लक्ष्य निर्धारित किया गया है़ मौसम की स्थिति को देखते हुए निर्धारित लक्ष्य को पूरा होने पर संसय बरकरार है़
सिंचाई के सभी साधन दशकों से ठप पड़ा है़ समय से फसलों को पानी उपलब्ध नहीं होने के कारण हर वर्ष फसल प्रभावित होता है़ जिस कारण खेती करना किसानों के लिए घाटा का सौदा साबित होने लगा है़
यहां बंद हैं नलकूप
विभागीय आंकड़ों के अनुसार क्षेत्र के मधुटोल, सलेमपट्टी, सिमराहा, खतुआहा शादीपुर, बछौली, परना, विशनपुर आभी, कानुविशनपुर, दिनमनपुर, रंजीतपुर, शोभन, बसंतपुर, खानपुर, कामोपुर, मसीना, खैरी, पुरुशोत्तमपुर, नत्थुद्वार, रेवड़ा गोटीयाही, फत्तेपुर के नलकूप करीब दो दसकों से खराब पड़ा है़ इसकी मरम्मत करना विभाग के लिए अबतक संभव नहीं हो सका है़ आलम यह है कि सभी नलकूप धराशायी के कगार पर है.
कहते हैं अधिकारी
इधर जिला कृषि परामर्शी ओमप्रकाश ने बताया कि 3788 हेक्टेयर में धान की खेती का लक्ष्य निर्धारित किया गया है़ इसका आच्छादन पूरा होने का अनुमान है़ धान बिचड़ा गिराने का समय 25 मई से शुरू होने लगता है़ लेकिन वेरायटी पर निर्भर करता है जो 25 जून तक बिचड़ा गिराया जा सकता है.
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